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मेरठ का ‘मोफस्सुलाइट’ अखबार

मेरठ

 21-01-2018 09:41 AM
संचार एवं संचार यन्त्र

मोफुस्सिल का मतलब है भारत का ग्रामीण प्रादेशिक क्षेत्र जो ब्रिटिश इंडिया में बम्बई ( मुंबई), कलकत्ता, और मद्रास को छोड़ बाकि ग्रामीण इलाकों को कहा जाता था, इनमे से मेरठ एक था। जॉन लांग एक ऑस्ट्रेलियन बैरिस्टर और पत्रकार थे जिन्होंने मेरठ से 1845 में मोफस्सुलाइट (ग्रामीण इलाके का निवासी) यह अखबार शुरू किया। जॉन लांग ऑस्ट्रेलिया के पहले मूल निवासी उपन्यासकार माने जाते हैं। साथ ही वे एक बैरिस्टर थे और उन्होंने झाँसी की रानी के लिए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ केस भी लड़ा था। सिडनी, ऑस्ट्रेलिया उनका जन्मस्थान है और उनके पिता का नाम वाल्टर लांग और माता का नाम एलिज़ाबेथ हैरिस था। 1837 में वे कैंब्रिज में सिखने गए और बैरिस्टर बनके लौटे। उन्होंने 1842 में सर चार्ल्स विलियम वेंटवर्थ के प्रस्ताव ब्रिटिश कॉलोनी के लोगों को भी विधानसभा में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए का समर्थन किया क्यूंकि उनके हिसाब से ब्रितानी शासन अत्याचारी और मनमाना था। जैसे ऊपर बताया गया है की उन्होंने मेरठ से मोफस्सुलाइट यह अखबार छापना शुरू किया था जिसके माध्यम से वे ब्रिटिश सरकार और ईस्ट इंडिया कंपनी के मनमानी कामकाज के खिलाफ आवाज़ उठाते थे। वे हमेशा ब्रितानी शासन के अत्याचारों के खिलाफ भारतीयों की ओर से आवाज़ उठाते थे। वे अपने अखबार से भारतीय लोगों के लिए नौकरी एवं सभी दायरों में सामान हक़ की मांग करते थे और ईस्ट इंडिया कंपनी के अनैतिक व्यवहार के खिलाफ लिखते थे। मेरठ के इस अखबार में उन्होंने यह लिखा की 1857 की क्रान्ति, ब्रितानी साम्राज्य और ईस्ट इंडिया कंपनी के उद्दाम राज्य का नतीजा है। सन 1851 में उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ एक ऐतिहासिक मामले में जीत हासिल की। जोती प्रसाद एक भारतीय व्यापारी थे जिन्हें ईस्ट इंडिया कंपनी ने सिख युद्ध के दौरान ब्रिटिश सैनिकों को रसद पहुंचाने के लिए नियुक्त किया था मगर जब जोती प्रसाद ने अपने पैसों की मांग की तो उनपर धोखाधड़ी का मुक़दमा दायर कर दिया। जॉन लांग ने जोती प्रसाद के लिए केस लडा और अभियोग मतलब ईस्ट इंडिया कंपनी के दावे के पीछे का भ्रष्टाचार सबके सामने ला के रख दिया। आज पाकिस्तान के राष्ट्रीय पुरालेख संग्रह के अखबारों के संग्रहण में मोफस्सुलाइट सबसे पुराना अखबार माना जाता है। 2014 में भारत के प्रधानमंत्री श्री. नरेन्द्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीयुत टोनी अब्बोट को झाँसी की रानी के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी के डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स - व्यपगत का सिद्धान्त या जमीन जुमला हड़प नीति के खिलाफ जो मूलयाचिका दायर की थी वो भेंट की। 1. http://www.gutenberg.org/ebooks/43997 2. http://www.rarebooksocietyofindia.org/postDetail.php?id=196174216674_4698897566743. https://en.wikipedia.org/wiki/John_Lang_(writer) 4. http://www.livemint.com/Politics/PqYPVP2CjuoEoxmnHonWkN/The-story-of-John-Lang.html 5. https://www.dailyo.in/arts/john-lang-the-lawyer-who-defeated-the-east-india-company/story/1/775.html 6. http://writerjohnlang.blogspot.in/



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