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मेरठ से नज़ीबाबाद

मेरठ

 15-01-2018 03:22 PM
पर्वत, चोटी व पठार

मेरठ सदैव से मानव बसाव के लिये उत्तम रहा है यही कारण है कि यहाँ पर आदि काल से मानव बसाव के साक्ष्य प्राप्त होते रहते हैं। अंग्रेजों ने यहाँ पर कैन्ट की स्थापना की जिसका प्रमुख कारण यहाँ का मौसम था। ऐसा क्या खास है यहाँ के मौसम में? मेरठ हिमालय क्षेत्र के अत्यधिक नज़दीक बसा हुआ है जिस वजह से यहाँ का मौसम अत्यन्त सुहावना है। यहाँ के जमीन व हिमालय की रचना तृतियक काल में हुआ जिसे निम्नलिखित रूप से समझा जा सकता है। तृतियक काल से पहले पृथ्वी के तमाम भूःखण्ड एक थे पर तृतियक काल के आने के बाद गोंडवाना भूमी का विखंडन शुरू हुआ था। संभवतः प्रसिद्ध विशाल ज्वालामुखी जो गोंडवाना भूमि के विखंडन के लिये जाना जाता है इसी काल मे विस्फोटित हुआ था, यह ज्वालामुखी अत्यन्त बड़ा था जिसने पृथ्वी के नीचे की सतहों को अस्त व्यस्त कर दिया। इस परिवर्तन के चलते नये भुःखण्डों का विकास हुआ तथा इसी के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी, अरब सागर, दक्षिण अटलांटिक सागर इत्यादि का जन्म हुआ। इस काल मे सबसे दक्षिण पूर्वी भारत सबसे ज्यादा प्रभावित रहा था जिसका मुख्य कारण टेथिस का क्षेत्र था जो की कई ज्वालामुखियों और भुकम्पों के प्रभाव मे था। वेस्ट इंडीज़ व कैरेबियन क्षेत्र भी ज्वालामुखी आदि से प्रभावित था। उपरोक्त उतार-चढाओं के चलते ही ऊँचे हिमालयी पहाडियों का निर्माण हुआ। युरोप की ऐल्प्स की पहाड़ियाँ इसी काल मे प्रकाश मे आयी तथा इनका और हिमालय का विकास तृतियक काल मे तीव्र गति से हुआ। हिमालय व शिवालिक प्राचीन काल के टेथिस नामक सागर पर विकसित हुये हैं जिस कारण से यहाँ पर समुद्र में पायी जाने वाली सीपियाँ व जीवाश्म मिलते हैं। वर्तमान काल में यदि देखा जाये तो हिमालय की शुरुआत मेरठ से मात्र 102 किलो मीटर दूरी पर स्थित नज़ीबाबाद से हो जाती है। नज़ीबाबाद अपने पत्थरकिले के लिये जाना जाता है। यह किला सुल्ताना डाकू के नाम से जाना जाता है। प्रस्तुत चित्र नज़ीबाबाद किले का है जो की 18वीं शताब्दी में सीताराम द्वारा बनाया गया था। सीताराम वॉरेन हेस्टिंग्स के साथ ईस्ट इंडिया कम्पनी के कार्य पर चित्रकारी करते थें। सीताराम के अलावा दो चाचा, भतीजा डैनियल ने भी यहाँ व भारत के अन्य स्थानों का चित्र बनाये थें। चित्र में शुरुआती हिमालय भी दिखाई दे रहा है, दूसरा चित्र वर्तमान काल का है जिसमें नज़ीबाबाद किले की चहारदिवारी दिखाई दे रही है। मेरठ अब मौसम के दृष्टिकोण से बहुत बदल गया है जिसका प्रमुख कारण है यहाँ पर होने वाला अथाह प्रदूषण। वहीं दूसरी तरफ नज़ीबाबाद व कोह मेरठ की प्राचीन मौसम प्रणाली को अभी भी प्रस्तुत कर रहे हैं। 1. जियोलॉजी एण्ड मिनरल रिसोर्सेस ऑफ़ इंडिया, जियोलॉजी सर्वे ऑफ़ 3. इवोल्यूशन ऑफ़ लाईफ, एम. एस. रन्धावा, जगजीत सिंह, ए.के. डे, विश्नू मित्तरे। 4. द इवोल्युशन ऑफ़ मॉमल्स, एल. बी. हॉल्सटीड।



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