मेरठ की वास्तुकला और उसके चित्र पोस्टकार्ड

मेरठ

 13-01-2018 03:20 PM
द्रिश्य 1 लेंस/तस्वीर उतारना

सन 1803 में मराठा दौलत राव सिंदिया ने मेरठ का इलाका ब्रिटिशों के हवाले कर दिया। उसी साल ब्रिटिश सरकार ने यहाँ भारत की सबसे बड़ी छावनियों में से एक मेरठ की छावनी बनाई। मेरठ की आबोहवा आस पास के शहरों से बेहतर होने की वजह से बहुत से ब्रिटिश नागरिक तथा सैनिक और उनके परिवार यहाँ आकर बसे। उनके उपयोग हेतु मेरठ में ऐसे कई स्थल और इमारतें बनाई गयीं जैसे चर्च, क़ब्रिस्तान, टाउन हॉल इत्यादि। प्रस्तुत किये गए चित्र उन वास्तुओं के व्हाइट बॉर्डर – सफ़ेद किनारों वाले पोस्टकार्ड हैं। इन पोस्टकार्ड्स का इतिहास बड़ा रोचक है। ऐसी मान्यता है की दुनिया का सबसे पहला चित्रवाला पोस्टकार्ड फुलहम, लंदन के एक लेखक थिओडोर हुक ने खुदको ही 1840 में भिजवाया था। ये उसने डाक सेवा का मजाक उड़ाने के लिए किया था और इसी लिए उस पोस्टकार्ड पर डाक कर्मियों का व्यंग चित्र था। भारत में चित्र पोस्टकार्ड की शुरुवात जुलाई 1879 में ब्रिटिश सरकार के पोस्ट ऑफिस ऑफ़ इंडिया ने की थी। 1. प्रथम चित्र: मेरठ का ब्रिटिश क़ब्रिस्तान। 2. द्वितीय चित्र: व्हीलर क्लब जो 03 फेब्रुअरी 1863 में शुरू किया गया था तथा जिसका नाम मेजर जनरल फ्रांसिस व्हीलर की याद में रक्खा गया था। उन्होंने 1861 में बंगाल सैन्य के मेरठ डिवीज़न का नेतृत्व किया था। 3. मेरठ कैथोलिक चर्च। 4. मेरठ न्यू टाउन हॉल जिसका उद्घाटन ड्यूक ऑफ़ कनॉट ने किया था।



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