मेरठ के बागों व् हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य में पक्षियों को देखने का भाग्यशाली विकल्प

मेरठ

 06-05-2022 09:12 AM
पंछीयाँ

पक्षियों को दुनिया भर के पारिस्थितिक तंत्रों का महत्वपूर्ण घटक माना जाता है, क्योंकि पक्षी इन पारिस्थितिक तंत्रों के सांस्कृतिक, प्रावधानिक, समर्थन और विनियमन सेवाओं में योगदान देते हैं। मनुष्यों को पक्षियों से काफी प्रेरणा मिलती है, पक्षियों द्वारा कई बार मनुष्यों का मनोरंजन भी होता है, इसी के साथ ही पक्षियों द्वारा मनुष्यों को भोजन एवं पहनने के लिए वस्त्रों की आपूर्ति भी होती है। इन सभी योगदानों को ध्यान में रखते हुए ऐसा कहा जाता है कि पक्षियों और मनुष्यों का जीवन हजारों वर्षों से आपस में जुड़ा हुआ है और वे दोनों किसी न किसी रूप से एक दूसरे पर आश्रित भी होते हैं। इसीलिए आधुनिक मनुष्यों के विकास और हमारे समाज के सांस्कृतिक विकास के लिए पक्षी स्पष्ट रूप से मायने रखते हैं। यदि हम पक्षियों द्वारा प्रदान की गई सेवाओं का संक्षिप्त रूप से दौरा करते हैं तो हमें पता चलता है कि सांस्कृतिक और प्रावधानिक सेवाएं हमें प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त होती हैं, क्योंकि ये सेवाएं स्वयं एक उत्पाद होती हैं। उदाहरण के लिए, पक्षी कला और पक्षी के अंडे, ये दोनों ही ऐसी वस्तुएं हैं जिन्हें खरीदकर या वस्तु विनिमय के द्वारा प्रदान किया जा सकता है। इसके विपरीत पक्षियों द्वारा प्राप्त विनियमित और सहायक सेवाएं हमें प्रत्यक्ष रूप से वस्तुएं प्रदान नहीं कराती हैं, बल्कि वे दुनिया के पारिस्थितिक तंत्र के उन अन्य घटकों को बनाए रखने में मदद करती हैं, जिन पर मनुष्य भोजन एवं आश्रय जैसी वस्तुओं और रोग प्रबंधन एवं कीट नियंत्रण जैसी सेवाओं के लिए निर्भर करता है। ये अप्रत्यक्ष सेवाएं अन्य पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं की सुविधा प्रदान करती हैं, और इसलिए ये सुविधाएं जैव विविधता को भी बढ़ावा देती हैं, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण परागण (Pollination) और बीज फैलाव को माना जाता है। यह पक्षियों द्वारा अपने पैरों से एक पौधे से अन्य पौधे तक बीज को पहुंचाने के माध्यम से पूर्ण होता है। इस तरह पौधे प्रजनन करते हैं। परागण और बीज फैलाव, पौधों के प्रजनन चक्र में बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू हैं। पक्षियों के परागण या बीज फैलाव सेवाओं के बिना, कई पौधों की प्रजातियां बहुत कम प्रजनन सफलता का अनुभव करती हैं, जो अंततः पौधों की सामुदायिक संरचना में परिवर्तन ला सकती हैं। परागण और बीज फैलाव में गिरावट प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण के साथ साथ पौधों के कई अन्य मानव उपयोगों और उनके आवासों को प्रभावित कर सकती है। पक्षियों द्वारा प्रदान की जाने वाली अन्य कई पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को नियमित रूप से बनाए रखने के लिए, हमें पक्षियों का संरक्षण करने की आवश्यकता है। पक्षियों द्वारा प्रदान की जाने वाली पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के बीच एक कड़ी ने पक्षी प्रजातियों के विलुप्त होने की संभावना के बढ़ते खतरे के कारण विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया है। एक दशक में पक्षी प्रजातियों के विलुप्त होने का अनुपात 21% से बढ़कर 23% हो गया, विशेष एवियन मैला ढोने वाले गिद्धों के विलुप्त होने का अनुपात 38% से 53% हो गया। इसके साथ ही मछली खाने वाले समुद्री पक्षियों की संख्या में भी गिरावट आई है। शिकार के पक्षियों की स्थिति में भी तेजी से गिरावट आई, और विलुप्त होने की संभावना वाली प्रजातियों का प्रतिशत 2004 और 2013 के बीच 22% से बढ़कर 26% हो गया। ऐसे में पक्षियों द्वारा प्रदान की जाने वाली असंख्य और महत्वपूर्ण सेवाओं को बनाए रखने के लिए उन्हें प्रदान करने वाली प्रजातियों को संरक्षित करने की आवश्यकता होती है। इसलिए पक्षियों की प्रजातियों को संरक्षित करने के लिए संपूर्ण देश भर में वन्यजीव अभयारण्यों और कंपनी बागों का निर्माण किया गया है। जिनकी सहायता से इन सभी प्रजातियां को संरक्षित भी किया जा सके और पक्षियों द्वारा प्राप्त होने वाली असंख्य और महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को भी बचाया जा सके। कंपनी बागों की श्रृंखला में, मेरठ शहर में हर साल शहर के प्रमुख गांधी बाग में बर्ड वाचिंग शो (Bird Watching Show) कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम में शहर वासियों को भिन्न भिन्न प्रजातियों के पक्षियों को देखने का अवसर प्राप्त होता है। हर साल की तरह इस साल भी मेरठ शहर के प्रमुख गांधी बाग में 9 फरवरी को इस शो का आयोजन किया गया था। जिससे एक बार फिर देश विदेश के रंग बिरंगे पक्षियों की चहचहाट से गांधी बाग गूंज उठा। इस कार्यक्रम का आयोजन सुबह 6 बजे से 10 बजे तक किया गया था, जिसमें संपूर्ण शहर के विभिन्न स्कूलों के बच्चों के साथ आम जनता को भी आमंत्रित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वन्य जीवों की सुरक्षा और संरक्षण के विषय पर जनता के अंदर जागरूकता फैलाना था। इस दौरान गांधी बाग में वन्य जीवों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए एक फोटो प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। इस फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को हमारे जीवन में वन्य जीवों की आवश्यकताओं और पक्षियों द्वारा प्रदान की जाने वाली पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के बारे में बताया गया तथा साथ ही वन्य जीवों की सुरक्षा और संरक्षण के बारे में जागरूक किया गया। इस अवसर पर विभिन्न वन अधिकारी और पक्षी विशेषज्ञों द्वारा आम जनता तथा विद्यालयों के बच्चों को विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के बारे में रोचक जानकारियां दी गई और पक्षियों के संबंध में लोगों की जिज्ञासा व सवालों के जवाब भी दिए गए। मेरठ शहर में, महानगरों के भीतर के पक्षियों तथा अभयारण्यों के भीतर के पक्षियों, दोनों को ही देख पाने का भाग्यशाली विकल्प है। हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य (Hastinapur Wildlife Sanctuary) उत्तर प्रदेश, भारत में गंगा नदी के मैदानी इलाकों में स्थित एक संरक्षित क्षेत्र है। 2,073 किलोमीटर के दायरे में विस्तृत इस अभ्यारण्य की स्थापना 1986 में की गई थी। इस अभयारण्य का नाम प्राचीन शहर हस्तिनापुर के नाम पर रखा गया है। इस अभयारण्य का एक बड़ा हिस्सा खेती के अधीन है, जहां गन्ना, चावल, गेहूं, मक्का और खीरा प्रमुख खेती वाली फसलें हैं। हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य में पाए जाने वाली स्तनपायी प्रजातियों में दलदली हिरण (swamp deer), स्मूथ कोटेड ऑटर (smooth-coated otter), गंगा नदी डॉल्फिन (Ganges river dolphin), घड़ियाल (Gharial) और भारतीय तेंदुआ, चीतल, सम्बर हिरण (sambar deer), नीलगाय (Nilgai) शामिल हैं। 2009 और 2012 के बीच, अभयारण्य में 494 घड़ियाल छोड़े गए थे। हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य में दर्ज की गई अन्य 117 पक्षी प्रजातियों में छोटे पैर वाले स्नेक ईगल (snake eagle), मिस्र के सफेद आंखों वाले बजा़र्ड (Egyptian white eyed buzzard), ब्लैक शोल्डर्ड काइट (black shouldered kite), ब्लैक काइट (black kite), शिकरा (shikra), पश्चिमी मार्श हैरियर (Western marsh harrier), स्पॉटेड ऑवलेट (spotted owlet), भारतीय ग्रे हॉर्नबिल (Indian grey hornbill) पेंटेड स्टार्क (painted stork), एशियाई ओपन बिल्ड स्टार्क (Asian open billed stork), व्हाइट नेक्ड स्टार्क (white necked stork), ब्लैक आइबिस (black ibis), इंडियन पिफाॅल (Indian peafowl), सारस क्रेन (Sarus crane), डेमोइसेल क्रेन (Demoiselle crane), यूरेशियन स्पूनबिल (Eurasian spoonbill), पर्पल हेरॉन (purple heron), पोंड हेरॉन (pond heron), ब्लैक क्राउन नाइट हेरॉन (black crowned night heron), कैटल एग्रेट (cattle egret), लार्ज एग्रेट (large egret), मीडियन एग्रेट (median egret), लिटिल एग्रेट (little egret), लिटिल ग्रीब (little grebe), बार हेडेड गूज़ (bar headed goose), लेसर विसलिंग डक (lesser whistling duck), कॉम्ब डक (comb duck), कॉटन टील (cotton teal), गडवाल (gadwall), मल्लार्ड (mallard), इंडियन स्पॉट बिल्ड डक (Indian spot billed duck), नॉर्दर्न शॉवेलर (Northern shoveller), रूडी शेल्डक (ruddy shelduck), नॉर्दर्न पिंटेल (Northern pintail), गार्गनी (garganey), कॉमन पोचार्ड (common pochard), ग्रे फ्रेंकोलिन (grey francolin), पर्पल मूरहेन (purple moorhen), कॉमन मूरहेन (common moorhen), व्हाइट ब्रेस्टेड वॉटरहेन (white breasted waterhen), कॉमन कूट (common coot),ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट कर्लव सैंडपाइपर (black winged stilt curlew sandpiper), पाइड एवोकेट (pied avocet), फीसेंट टेल्ड जाकाना (pheasant tailed jacana), ब्रॉन्ज विंग्ड जकाना (bronze winged jacana), रोज रिंग्ड पैराकीट (rose ringed parakeet), इंडियन रोलर (Indian roller), पाइड किंगफिशर (pied kingfisher), व्हाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर (white breasted kingfisher), एशियन ग्रीन बी ईटर (Asian green bee eater), ब्लू टेल्ड बी ईटर (blue tailed bee eater), कॉपरस्मिथ बारबेट (coppersmith barbet), हूपो (hoopoe), रूफस बैक्ड श्राइक (rufous backed shrike), रेड वेंटेड बुलबुल (red vented bulbul), स्माल प्रिटिनकोल (small pratincole) इत्यादि इसी तरह अन्य कई प्रजातियां शामिल हैं।

संदर्भ:
https://bit.ly/3yajXfj
https://bit.ly/37glPbf
https://bit.ly/3KECpiB
https://bit.ly/3kDph2L
https://bit.ly/3KLnKT1
https://bit.ly/3MSvgNa

चित्र संदर्भ
1  हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य में पक्षियों को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
2. हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3. शिकारी पक्षी गिद्ध को दर्शाता एक चित्रण (Pixabay)
4. मेरठ गाँधी पार्क को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
5. विविध प्रकार की चिड़ियों को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)

RECENT POST

  • विदेशी फलों से किसानों को मिल रही है मीठी सफलता
    साग-सब्जियाँ

     04-07-2022 10:11 AM


  • प्रागैतिहासिक काल का एक मात्र भूमिगतमंदिर माना जाता है,अल सफ़्लिएनी हाइपोगियम
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     03-07-2022 10:58 AM


  • तनावग्रस्त लोगों के लिए संजीवनी बूटी साबित हो रही है, संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     02-07-2022 10:02 AM


  • जगन्नाथ रथ यात्रा विशेष: दुनिया के सबसे बड़े रथ उत्सव से जुडी शानदार किवदंतियाँ
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     01-07-2022 10:22 AM


  • भारत के सबसे बड़े आदिवासी समूहों में से एक, गोंड जनजाति की संस्कृति व् परम्परा, उनके सरल व् गूढ़ रहस्य
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     30-06-2022 08:35 AM


  • सिंथेटिक कोशिकाओं में छिपी हैं, क्रांतिकारी संभावनाएं
    कोशिका के आधार पर

     29-06-2022 09:19 AM


  • मेरठ का 300 साल पुराना शानदार अबू का मकबरा आज बकरियों का तबेला बनकर रह गया है
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     28-06-2022 08:15 AM


  • ब्लास्ट फिशिंग से होता न सिर्फ मछुआरे की जान को जोखिम, बल्कि जल जीवों को भी भारी नुकसान
    मछलियाँ व उभयचर

     27-06-2022 09:25 AM


  • एक पौराणिक जानवर के रूप में प्रसिद्ध थे जिराफ
    शारीरिक

     26-06-2022 10:08 AM


  • अन्य शिकारी जानवरों पर भारी पड़ रही हैं, बाघ केंद्रित संरक्षण नीतियां
    निवास स्थान

     25-06-2022 09:49 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id