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ठंड के मौसम में घरों को गर्म करने के लिए बेहतर और अधिक लागत प्रभावी विकल्प

मेरठ

 22-12-2021 11:07 AM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

क्या आप जानते हैं कि ठंड के मौसम में घरों को गर्म करने के लिए "हीट पंप टेक्नोलॉजी (Heat Pump Technology)" में एकमुश्त निवेश वास्तव में उत्तर भारत के घरों में उपयोग के लिए "इलेक्ट्रिक-रॉड (Electric-Rod) और तेल-आधारित इलेक्ट्रिक हीटर (Oil-based Electric Heaters)" की तुलना में बहुत बेहतर और अधिक लागत प्रभावी विकल्प है।मध्यम ताप और शीतलन आवश्यकताओं वाले जलवायु के लिए, हीट पंप भट्टियों और एयर-कंडीशनर (Air-conditioner) के वैकल्पिक एक ऊर्जा-कुशल विकल्प प्रदान करते हैं।दरसल एक हीट पंप गर्म या ठंडी हवा उत्पन्न नहीं करता है, इसके बजाए यह ठंडे स्थान से ठंडी हवा को एक गर्म स्थान पर छोड़ने का कार्य करता है। यह ठंडी जगह कोगर्म और गर्म जगह को ठंडा करने की क्षमता रखता है।इसलिए, एक हीट पंप कोई गर्म या ठंडी हवा नहीं बनाता है, लेकिन यह केवल हवा को स्थानांतरित करता है।उदाहरण के लिए, यदि किसी कमरे को ठंडा करने के लिए एक हीट पंप का उपयोग किया जा रहा है, तो यह कमरे में गर्मी को अवशोषित कर लेगा और इसे एक बाहरी संपीडक (Compressor) की मदद से बाहर छोड़ देगा।इसके विपरीत कमरे को गर्म करने के लिए, हीट पंप बाहर से गर्मी को अवशोषित करेगा और इसे घर के अंदर छोड़ देगा। मुख्य रूप से दो प्रकार के हीट पंप होते हैं जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि वे किस माध्यम से गर्मी को निकालतेहैं। जिसमें एक भूतल से गर्मी कोनिकालते है और दूसरा हवा से गर्मी को निकालता है।जैसा कि हम जान गए हैं कि एक हीट पंप गर्म और ठंडी हवा का उत्पादन नहीं करता है,इसलिए इसे चलाने में ईंधन का उपयोग नहीं किया जाता है। साथ ही जैसे ये रेफ्रिजरेटर की तरह काम करता है और इसे चलाने के लिए कुछ मात्रा में बिजली का उपयोग किया जाता है।इसलिए, एक ताप पंप को नवीकरणीय तकनीक नहीं कहा जा सकता है। लेकिन जब पर्यावरण को प्रभावित करने की बात आती है तो एसी (AC’s) की तुलना में वे काफी बेहतर हैं। ऐसे ही बात करते हैं हीट पंप वाटर हीटर कि हीट पंप वाले वॉटर हीटर (Water Heater) बिजली बचाने और बिजली के बिलों पर खर्च होने वाले पैसे को कम करने का एक अद्भुत विकल्प हैं। जैसे फ्रिज, उसमें रखी हुई चीजों की गर्मी को लेकर और बाहर छोड़कर उन्हें ठंडा करता है, वैसे ही हीट पंप इसके ठीक विपरीत काम करता है। यानी यह अपने आसपास से गर्मी लेता है और पानी को गर्म करने के लिए इसका इस्तेमाल करता है। इसमें एयर कंडीशनर (Air conditioner) की तरह एक रेफ्रिजरेंट (Refrigerant) गैस भी होती है, जो हीट पंप वॉटर हीटर के विभिन्न आंतरिक घटकों को जोड़ने वाले पाइपों में बहती है।ये वॉटर हीटर हवा में गर्मी को अवशोषित करते हैं और इसे भंडारण में पानी में स्थानांतरित करते हैं, इस प्रकार पानी का तापमान बढ़ाते हैं और बाहर की ठंडी हवा कोछोड़ते हैं। इसलिए इस प्रकार के वॉटर हीटर के आसपास ठंडक का अनुभव होता है। वास्तव में, इसका उपयोग हवा को ठंडा करने के लिए भी किया जा सकता है। हीट पंप वाले वॉटर हीटर न केवल पानी को गर्म करते हैं, बल्कि वे बहुत कुशलता से और काफी जल्दी पानी को गर्म करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे बिजली की खपत के अलावा, पानी को गर्म करने के लिए हवा से गर्मी का भी उपयोग करते हैं।अगर कोई बिजली बचाना चाहता है तो हीट पंप वॉटर हीटर सबसे अच्छा विकल्प है। इसका कारण यह है कि इसकी दक्षता बढ़ जाती है क्योंकि बिजली की खपत के अलावा, यह पानी को गर्म करने के लिए आसपास से गर्मी भी लेता है। उदाहरण के लिए, एक हीट पंप वॉटर हीटर (एओ स्मिथ (AO Smith), रैकोल्ड (Racold), बजाज (Bajaj) जैसे ब्रांड, जो आजकल बाजार में आसानी से उपलब्ध है) की न्यूनतम क्षमता 50 लीटर है। तो आइए मान लें कि आप जिस पानी को गर्म करना चाहते हैं वह 50 लीटर है। यहां हम दो वॉटर हीटर, एक नियमित वॉटर हीटर और एक हीट पंप वॉटर हीटर पर विचार करते हैं। Ideal Units for heating = Volume of Water x Temperature Difference x 0.0012 यहाँ पानी का आयतन 50 लीटरहै। मान लीजिए कि नल के पानी का तापमान 20 o Cहै और आप इसे 60 o Cपर उपयोग करना चाहते हैं। तो तापमान का अंतर 40 o C (60-20) है।

नियमित वाटर हीटर
हीट पंप वाटर हीटर
खपत की गई बिजली इकाइयों की संख्या = 50 x 40 x 0.0012 = 2.4 यूनिटखपत की गई बिजली इकाइयों की संख्या = (50 x 40 x 0.0012) / 3.5 = 0.69 यूनिट

तो इसका मतलब यह है कि जहां एक नियमित वॉटर हीटर 2.4 यूनिट बिजली का उपयोग करता है, वहीं एक हीट पंप वॉटर हीटर 0.69 यूनिट का उपयोग करता है। लेकिन यह आपके खर्चों को कैसे प्रभावित करता है? तो मान लीजिए कि प्रशुल्क 5 रुपये प्रति यूनिट है।
1 इकाई पर व्यय = रु 5
1 इकाई पर व्यय = रु 5
2.4 इकाइयों पर व्यय = 5 x 2.4 = रु 12
0.69 इकाई पर व्यय = 5 x 0.69 = रु 3.45
अब मान लीजिए वॉटर हीटर का उपयोग 30 दिनों के लिए किया जाता है।

नियमित वाटर हीटर
हीट पंप वाटर हीटर
30 दिनों में इकाइयों की कुल संख्या = 2.4 x 30 = 72
30 दिनों में इकाइयों की कुल संख्या = 0.69 x 30 = 20.7
72 इकाइयों पर व्यय = 5 x 72 = 360 रुपये
20.7 इकाइयों पर व्यय = 5 x 20.7 = 103.5 रुपये
वहीं एक नियमित वॉटर हीटर और एक हीट पंप वॉटर हीटर की कीमतें अलग-अलग होती हैं। आम तौर पर एक नियमित वॉटर हीटर की कीमत 10,000 रुपये से 15,000 रुपये के बीच होती है और हीट पंप वॉटर हीटर की कीमत 17,000 रुपये से 25,000 रुपये के बीच होती है।तो चलिए मान लेते हैं कि एक नियमित वॉटर हीटर की कीमत 13,000 रुपये है और हीट पंप वॉटर हीटर की कीमत 20,000 रुपये है।तो खरीद की लागत में अंतर 20,000 – 13,000 = 7000 रुपये है। एक महीने (30 दिन) में आप हीट पंप वॉटर हीटर का उपयोग करने पर 103.5 रुपये और नियमित वॉटर हीटर का उपयोग करने पर 360 रुपये खर्च कर रहे हैं। तो बचत“360 रुपये – 103.5 रुपये = 256.5 रुपये” है। तो 7000 रुपये की वसूली में कितना समय लगेगा?(7000/256.5) = 27 महीने = 2.25 साल (लगभग)। इसका मतलब है कि यदि आप एक हीट पंप वॉटर हीटर (जो समान क्षमता के एक नियमित वॉटर हीटर से महंगा है) खरीदते हैं तो लगभग 2 साल में आप हीट पंप में लगाए गए अतिरिक्त पैसों की वसूली करने में सक्षम होते हैं। और इसके बाद अप बिजली में बचत का आनंद उठा सकते हैं। जैसा कि हम सभी यह जान चुके हैं कि हीट पंप वॉटर हीटर नियमित वॉटर हीटर का एक बहुत ही उपयुक्त और कुशल विकल्प प्रदान करताहै। हीट पंप वॉटर हीटर का उपयोग करने के कुछ लाभ निम्नलिखित हैं-
 यह एक बार में बड़ी मात्रा में पानी गर्म कर सकता है। वे विभिन्न किस्मों में आते हैं जिनकी क्षमता 200 लीटर (या कभी-कभी अधिक) तक होती है।
 ये अत्यधिक लागत प्रभावी हैं क्योंकि ये नियमित वॉटर हीटर की तुलना में पानी की समान मात्रा को गर्म करने के लिए कम बिजली की खपत करते हैं।
 वे लंबे समय तक सेवा प्रदान करते हैं।
 वे कूलर के रूप में कार्य करते हैं, क्योंकि वे साथ ही साथ उस स्थान को ठंडा कर देते हैं जहां वे स्थापित हैं।
 हीट पंप वॉटर हीटर बिल्कुल सुरक्षित हैं।
 स्थापना के लिए थोड़े प्रयास की आवश्यकता होती है। साथ ही इन्हें संभालना भी आसान होता है।
इसमें कुछ खामियाँ भी मौजूद हैं, जैसे हीट पंप वॉटर हीटर में रेफ्रिजरेंट गैस होती है, इसलिए यह सुनिश्चित रखना जरूरी है कि हीटिंग कॉइल में जंग न लगें।इसके अलावा, चूंकि रेफ्रिजरेंट गैस पर्यावरण के अनुकूल नहीं होती है, इसलिए यह सलाह दी जाती है कि पर्यावरण पर इसके दुष्प्रभावों के लिए इसकी ठीक से जाँच की जानी चाहिए। अब तकभारत में बहुत सारे प्रयासों ने स्थायी शीतलन समाधान विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया है, भारत के उत्तरी भाग में रहने वाले करोड़ों लोग हर सर्दियों में गर्मी संबंधी असुविधा का अनुभव करते हैं।भारतीय "पक्के" (बिना तापावरोधन के ईंटों और बजरी से बने) घरों के पारंपरिक डिजाइन ने इस अत्यधिक थर्मल असुविधा में योगदान दिया है और इसे तत्काल संबोधित किया जाना चाहिए।उत्तरी भारतीय घरों में अंदरूनी स्थितियों को बढ़ावा देने में तीन मुख्य कारक का योगदान हैं:
1. विशेष रूप से आवरण निर्माण के लिए निर्माण सामग्री का चयन क्षेत्रों की जलवायु आवश्यकताओं के अनुकूल नहीं है।क्योंकि उत्तर भारत में अधिक गर्मी होती है, इसलिएवे संभवतः गर्मियों से बचाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।अधिकांश भारतीय वास्तुकारों को तापीय द्रव्यमान का महत्व सिखाया जाता है, जो अच्छी तरह से काम कर सकता है यदि दैनिक सीमा अधिक हो और तापीय द्रव्यमान की मात्रा काफी अभिप्रायपूर्णहो।दूसरी ओर, यदि भारतीय गर्मी और सर्दियां के चरम स्तर पर कुछ हफ्तों या यहां तक कि एक महीने के उच्च या निम्न तापमान की विशेषता को देखा जाएं तो, यहां दैनिक तापमान सीमा काफी संकीर्ण होती है और प्रत्येक भारतीय घर में अंतर्निहिततापीय द्रव्यमान गर्मी या ठंड को अवशोषित करता है।
2. पारंपरिक भारतीय निर्माण में दीवारों और छतों में तापावरोधन के उपयोग की अनुपस्थिति की भी विशेषता है। साथ ही गर्मी-संबंधी द्रव्यमान, जो ईंट और कंक्रीट के उपयोग और तापावरोधनका अनुपस्थिति का परिणाम है, एक दोहरी मार का कारण बनता है जिसके परिणामस्वरूप दीवारों और घरों की सतह का तापमान कम हो जाता है, जिससे घरों में ठंड से निजात पाना काफी मुश्किल हो जाता है।वास्तव में, यह काफी विडंबना है कि जिस तरह से उत्तर भारतीय घरों को डिजाइन और निर्माण किया जा रहा है, उसके कारण अंदर का तापमान बाहरी तापमान की तुलना में कम है।
3. सर्दियों की गंभीर असुविधा को दूर करने के लिए, भारतीय मध्यम वर्ग के निवासी बिजली या तेल आधारित रूम हीटर का उपयोग करते हैं जो ऊर्जा कुशल नहीं हैं।वास्तव में, क्योंकि ये तापीय उपकरण दक्षता में बहुत खराब हैं, कई भारतीय मध्यम वर्ग के घरों को ठंड से बचने के लिए बिजली के उच्च बिलों का भुगतान करना पड़ता है।जैसे-जैसे अधिक से अधिक भारतीय जीवन की बेहतर गुणवत्ता की आकांक्षा रखते हैं और मांग करते हैं, आवासीय ऊर्जा कोड (codes) के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वे एक महत्वपूर्ण ऊर्जा-कुशल तकनीक के रूप में हीट पंप को अपनाना शुरू करें।

संदर्भ :-
https://bit.ly/32mpvFr
https://bit.ly/3GWf0YH
https://bit.ly/3J7Ujej
https://bit.ly/325wEul
https://bit.ly/3FeTjCJ

चित्र संदर्भ
1. हीट पंप टेक्नोलॉजी (Heat Pump Technology) को दर्शाता एक चित्रण (Flickr)
2. घरेलु हीट पंप प्रणाली को दर्शाता एक चित्रण (Flickr)
3. हीट पंप वाले वॉटर हीटर को दर्शाता एक चित्रण (Flickr)
4. हीट पंप वॉटर हीटर (AC स्मिथ) को दर्शाता एक चित्रण (Flickr)
5. बिजली आधारित रूम हीटर को दर्शाता एक चित्रण (Flickr)

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