शुष्क रेगिस्तान में भी उगती हैं पौष्टिक फल सब्ज़ी

मेरठ

 07-10-2021 07:38 PM
मरुस्थल

मानव अपनी कई पुश्तों से अनाज को भोजन के रूप में प्रयोग करता आया है। दुनिया के किसी भी क्षेत्र में जहां पर भी जीवन संभव है, वहां निश्चित रूप से खेती भी संभव है। कृषि के लिए बेहद दुर्गम क्षेत्रों में से एक रेगिस्तान में की जाने वाली खेती भी "जहाँ चाह वहां राह की" कहावत को सार्थक करती हैं।
हालाँकि खेती-बाड़ी पूरी तरह से सिंचाई और पानी की आपूर्ति पर निर्भर करती है, और पानी की कमी वाले शुष्क क्षेत्रों में खेती करना एक बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद सराहनीय रूप से मनुष्य हजारों वर्षों पूर्व से रेगिस्तानी खेती करता आ रहा है। इस बात के प्रमाण नेगेव मरुस्थल (Negev desert) से प्राप्त हुए हैं, जहाँ लगभग 5000 ईसा पूर्व खेती की जाती थी।
वही वर्तमान में दक्षिणी कैलिफोर्निया, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, इज़राइल और फिलिस्तीन में इंपीरियल घाटी आधुनिक रेगिस्तानी कृषि के प्रमुख उदाहरण हैं। चूँकि रेगिस्तान में जल का आभाव रहता है, इसलिए मरुस्थलों में खेती करने के जल अथवा सिंचाई में दक्षता एक महत्वपूर्ण विषय रही है। रेगिस्तान में खेती के परिपेक्ष्य में आज जल के पुन: उपयोग, अलवणीकरण और ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) जैसे कई आधुनिक तरीके उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से कई क्षेत्रों और देशों ने शुष्क जलवायु में होने के बावजूद अपनी कृषि का विस्तार किया है।
मनुष्य सहस्राब्दियों से कृषि करके फसल का उद्पादन करता आया है। प्राचीन असीरिया, इज़राइल, मिस्र और सिंधु नदी घाटी सभ्यता जैसी कई प्रारंभिक सभ्यताएं रेगिस्तान से घिरे सिंचित क्षेत्रों में स्थापित की गई थीं। गुजरते समय के साथ इन सभ्यताओं का विकास हुआ, और रेगिस्तान में फसलों के उद्पादन का महत्व बढ़ता गया। विभिन्न पश्चिमी अमेरिकी भारतीय जनजातियाँ मुख्य रूप से रेगिस्तान में बेहद कम सिंचाई या वर्षा के साथ भी निर्वाह करने में सक्षम थी। यह कला इन सभ्यताओं की दक्षता को प्रदर्शित करती है। मरुस्थल के शुष्क वातावरण में भी पनप सकने वाली पेड़-पोंधों और वनस्पतियों की प्रजाति को ज़ीरोफाइट (xerophyte) से संदर्भित किया जाता है। यह पौंधा शुष्क वातावरण में जीवित रहने के अनुकूल होता है, और बेहद कम मात्रा में पानी का उपभोग करता है। रेगिस्तान के साथ ही बर्फ से ढके हुए वातावरण में भी ज़ीरोफाइट फल फूल सकता है। इसके प्रमुख उदारहण कैक्टि (cacti), अनानास (pineapple) और कुछ जिम्नोस्पर्म (gymnosperms) पौधे हैं। जेरोफाइट्स की संरचनात्मक विशेषता (आकृति विज्ञान) और मौलिक रासायनिक प्रक्रियाओं (फिजियोलॉजी) के अनुरूप इसे पानी के संरक्षण के लिए विभिन्न रूप से अनुकूलित माना जाता है। जो शुष्क अवधि के दौरान भी बड़ी मात्रा में पानी को स्टोर करने की क्षमता रखते हैं। कई पोंधों की प्रजातियां अपने ऊतकों की अत्यधिक और लम्बे समय तक शुष्कता के बावजूद जीवित रहने में सक्षम हैं, यहाँ तक की इस दौरान उनकी चयापचय गतिविधि प्रभावी रूप से बंद हो जाती है। इस प्रकार के रूपात्मक और शारीरिक अनुकूलन वाले पौधे को ज़ेरोमोर्फिक (xeromorphic) कहा जाता है। जेरोफाइट्स के बेहतर उदाहरण के रूप में कैक्टि लंबे समय तक शुष्क परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम होते हैं, क्योंकि इनकी जड़ें गहरी होती हैं, और जिनमे पानी को जमा करे रखने की क्षमता होती है। उनके कांटेदार पत्ते नमी के ह्रास को बेहद कम कर देते हैं, यहाँ तक की उनके तने भी पानी जमा कर सकते हैं।
गर्म रेगिस्तान के जैविक या जीवित घटक और अजैविक या निर्जीव घटक पूरी तरह दूसरे पर निर्भर होते हैं, अर्थात किसी एक में परिवर्तन से दूसरे में भी परिवर्तन होगा। रेगिस्तानी मिट्टी पतली, रेतीली, चट्टानी और आमतौर पर भूरे रंग की होती है। रेगिस्तानी मिट्टी बहुत शुष्क होती है,और बारिश के दौरान वह पानी को बहुत जल्दी सोख लेती हैं। बारिश की कमी के कारण मिट्टी की सतह खुरदरी दिखाई दे सकती है। गर्म रेगिस्तानों में विशिष्ट विशेषताएं होती हैं, जो कुछ प्रजातियों को ऐसे चरम वातावरण में पनपने देती हैं। प्राचीन समय में रेगिस्तान में खेती करना आज की तुलना में अधिक मुश्किल था, वहीँ आज आधुनिक शोधों और तौर तरीकों ने खेती के तरीकों को आसान बना दिया है।
उदारहण के तौर पर तुर्की के एक स्टार्टअप सोयल-जेल (Soil-Gel) ने शुष्क रेगिस्तानी परिस्थितियों में फसलों की सिंचाई के लिए एक बहु-कार्यात्मक हाइड्रोजेल विकसित किया है, जो लंबे समय तक पानी को प्रभावी ढंग से छोड़ने के लिए नैनो एडिटिव्स (Nano-Additives) का उपयोग करता है। यह मिट्टी के पोषण, पानी की बचत और पौधों की सुरक्षा सहित कई उद्देश्यों को पूरा करता है।
एक अन्य डच (Dutch) स्टार्टअप सॉलिडवाटर (Solidwater) ने रेगिस्तानी क्षेत्रों में सिंचाई के लिए एक विकल्प विकसित किया है। सॉलिडवाटर, पोटेशियम पॉली-एक्रिलेट (potassium poly- acrylate), पौधों को पानी की एक रिफिलिंग सुविधा प्रदान करता है, जिससे जड़ों तक पानी को आसानी से स्थानांतरित किया जा सकता है।

संदर्भ
https://bit.ly/3Alq7Xa
https://bbc.in/3llVGMC
https://bit.ly/3iCBwMA
https://bit.ly/2YqHMQH
https://en.wikipedia.org/wiki/Xerophyte
https://en.wikipedia.org/wiki/Desert_farming

चित्र संदर्भ
1. आधुनिक इज़राइल में ड्रिप सिंचाई का उपयोग करने वाले खेत का चित्रण (wikimedia)
2. मिस्र में कृषि 5500 ईसा पूर्व से अस्तित्व में है, मिस्र के लक्सर में कृषि का समर्थन करने वाली नील नदी से सिंचाई का एक हवाई दृश्य (wikimedia)
3. एगेव अमेरीकाना एक बहुमुखी जेरोफाइट है, जिसका एक चित्रण (wikimedia)
4. काँटेदार कैक्टस को शुष्क परिस्थितियों में उगाया जा सकता है जिसको दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)

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