विश्व में सर्पदंश से होने वाली मौतों की लगभग आधी होती हैं भारत में

मेरठ

 27-07-2021 10:04 AM
रेंगने वाले जीव

कोरोना महामारी के बढ़ते विस्तार ने, और एक के बाद एक आती लहर ने पूरी दुनिया में वैश्विक संकट खड़ा कर दिया है। ताज़ा आंकड़ों पर नज़र डालें तो, महामारी से दुनियाभर में आधिकारिक तौर पर लगभग 41.4 लाख लोगों की मृत्यु दर्ज की जा चुकी है। परंतु क्या हम जानते थे, की कोरोना के अलावा भी कई ऐसे कारण है, जिनसे लाखों की संख्या में लोगों को अपनी जान गवानी पड़ती है? उन्ही कारणों में से सर्पदंश अथवा सांप के काटे जाने से आकस्मिक मृत्यु का होना भी है।
सर्पदंश से दुनिया भर में हर साल लगभग 81,000 से 1,38,000 लोगों की मौत होती है। इसके बावजूद, यह स्वास्थ्य नीति के एजेंडे शीर्ष पर नहीं आता है, और दुनिया भर की सरकारों में इसके प्रति उदासीनता नज़र आती है। 'मिलियन डेथ स्टडी' (Million Death Study) के अंतर्गत किये गए राष्ट्रीय मृत्यु सर्वेक्षण से यह अनुमान लगाया गया की, अकेले हमारे देश भारत में प्रतिवर्ष लगभग 50,000 मौतें सांपों के काटे जाने से होती हैं, जो पूरे विश्व में सर्पदंश से होने वाली मौतों का लगभग आधा है। किंतु देशभर के अस्पतालों से प्राप्त सरकारी आंकड़ों पर नज़र डालें, तो सर्पदंश से भारत में प्रतिवर्ष, केवल एक हज़ार मौतें ही होती हैं। वर्ष 2000 से 2019 तक राष्ट्रीय स्तर पर किए गए मृत्यु दर अध्ययन में यह पाया गया की, प्रति 611,483 शवों में से 2,833 मौतें सांपों के काटे जाने से हुई हैं। साथ ही यह भी अनुमान लगाया गया की बीते नौ वर्षों में लगभग 1.2 मिलियन लोगों को सर्पदंश से मृत्यु प्राप्त हुई, जिनमे से अधिकांश मृतक 30-69 वर्ष की आयु के थे ,और एक चौथाई से अधिक 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे थे।
सांप द्वारा काटे जाने से लगभग 70 प्रतिशत मौतें घनी आबादी और कृषि प्रधान राज्यों जैसे बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश (जिसमें तेलंगाना, हाल ही में परिभाषित राज्य शामिल है), राजस्थान और गुजरात में हुई हैं। प्रायः इंसानों और साँपों की भेंट बरसात के मौसम के दौरान होती है. यह किसानों के खेतों और कई बार घरों में ही घुस जाते हैं। भारत में आमतौर पर काटने वाले सापों की प्रजाति अज्ञात ही रहती है, परंतु अधिकांश ज्ञात प्रजातियों में रसेल वाइपर (Russell's Viper) , क्रेट (बंगारस प्रजाति) और कोबरा सबसे अधिक हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने वर्ष 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों की संख्या को आधा करने का लक्ष्य रखा है, और यह भी माना है कि भारत में किए जाने वाले प्रयास काफी हद तक वैश्विक लक्ष्य को प्रभावित करेंगे। हालांकि इस लक्ष्य को निर्धारित करने के कुछ ही महीनों बाद शुरू हुई कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी के दौरान, लागू किये गए प्रतिबंधों ने सर्पदंश से बचाव की सभी पूर्वनिर्धारित योजनाओं को बाधित कर दिया। दुख की बात है कि COVID-19 की पृष्ठभूमि में भी सांप के काटे जाने का ग्राफ निरंतर बढ़ रहा है। महामारी के इस दौर में लोगों को यह डर भी है कि कहीं सांप के इलाज के चक्कर में वे कोरोना वायरस से ग्रस्त न हो जाएं, इसलिए अस्पतालों के बजाय, वे स्थानीय रूप से उपलब्ध हर्बल उपचार पसंद कर रहे हैं।
चूँकि साँपों के डसने से अधिकांशतः बारिश के मौसम में काम करने वाले कृषकों की मृत्यु होती है, अतः यह जानकारी इस खतरे से निपटने में मददगार साबित हो सकती है। कुछ आसान उपाय अपनाकर कई बहुमूल्य ज़िंदगियाँ बचाई जा सकती हैं। विशेषतौर पर अधिक प्रभावित क्षेत्रों में सर्पदंश से बचाव के प्रति जागरूकता फैलाना जैसे-ऊँचे रबर के जूते पहनना, दस्ताने पहना, रात के समय में अपने साथ टॉर्च इत्यादि होने से सांप के काटे जाने के जोखिम को कम किया जा सकता है।सर्पदंश को हमारे देश में गरीबों की बीमारी के रूप में पहचाना जाता है, लगभग 97% प्रतिशत मौतें देश के उन ग्रामीण क्षेत्रों में होती हैं, जहां लोग बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं से भी वंचित हैं।
चूँकि किसी भी सांप का जहर धीरे-धीरे शरीर में फैलता है, इसलिए यदि सांप के काटे जाने के बाद शीघ्र इलाज मिल जाए, तो सर्पदंश से होने वाली मौतों को पूरी तरह रोका जा सकता है। अधिकांश सर्पदंशों में से लगभग 70% प्रतिशत सांप ज़हरीले नहीं होते और जिनको केवल अस्पताल में थोड़ी देखरेख और मूल्यांकन की आवश्यकता होती है।
जहरीले सांपों द्वारा काटे गए लोगों को समय पर एंटीवेनम दिए जाने की आवश्यकता होती है, क्योंकि ऐसा न होने पर श्वसन विफलता, गुर्दे की विफलता, आंतरिक रक्तस्राव या पक्षाघात जैसे जटिल आघात पहुँच सकते हैं, और मृत्यु भी हो सकती है। WHO के द्वारा सर्पदंश के बचाव के परिपेक्ष्य में बनाई गई योजना में प्रभावी और किफायती उपचार शामिल हैं, जैसे कि एंटी-वेनम और सहायक चिकित्सा देखभाल तक पहुंच सुनिश्चित करना, सर्पदंश के उपचार के लिए आवश्यक जीवन रक्षक विषाणुओं और अन्य वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण में सुधार करने को प्राथमिकता देना इत्यादि। हालाँकि कोरोना महामारी के दोहरे संकट में सर्पदंश के नए उपचारों और निदानों को लागू करना भी डब्ल्यूएचओ WHO के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

संदर्भ
https://bit.ly/2Vb5vSU
https://bit.ly/3eRmr7E
https://bit.ly/3x5EDRk
https://haiweb.org/covid-19-snake/

चित्र संदर्भ
1. ज़हरीले सांप कोबरा का एक चित्रण (sciencenews)
2. मक्का के खेत में सांप का एक चित्रण (flickr)
3. सांप द्वारा काटे जाने का एक चित्रण (outsider)(wikimedia)

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