विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में प्रत्येक रथों का विशिष्ट नाम और आयाम

मेरठ

 12-07-2021 08:49 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

भारतीय हिन्दू धर्म में जगन्नाथ यात्रा का एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण स्थान है, यह यात्रा पूरे विश्व भर में देखी जाती है तथा विश्वभर से लोग इस यात्रा में शामिल होने के लिए भारत का रुख करते हैं। भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा वास्तव में भगवान जगन्नाथ के प्रति वास्तविक भक्ति, प्रेम, करुणा, श्रद्धा, विश्वास तथा आत्म अहंकार के त्याग आदि का दिव्य जीवन मूल्यों का एक अनूठा सांस्कृतिक महोत्सव है जिसके दर्शन मात्र से मानव-जीवन सफल हो जाता है। प्रत्येक वर्ष आज के दिन, श्री जगन्नाथ भगवान की यात्रा उड़ीसा के पुरी में स्थित अति प्राचीन श्री भगवान जगन्नाथ मंदिर के प्रांगण से शुरू होकर श्री गुंडिचा मंदिर तक जाती है। भगवान जगन्नाथ यात्रा के तर्ज पर ही सम्पूर्ण भारत में अलग-अलग स्थानों पर इस तरह के यात्राओं का आयोजन किया जाता है। पिछले वर्ष 100 वीं शताब्दी का जगन्नाथ रथ उत्सव समारोह मनाया गया था, वह सदर, मेरठ के बिल्वेश्वर मंदिर में हुआ था।

रथ यात्रा हर साल आषाढ़ मास (ओडिया कैलेंडर का तीसरा महीना) के शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन, ओडिशा के मंदिर शहर पुरी में मनाई जाती है। रथ यात्रा के हिस्से के रूप में, भगवान जगन्नाथ, भगवान बालभद्र और देवी सुभद्रा को रथ में आरूढ़ किया जाता है और इस प्रक्रिया को 'पहांडी' कहा जाता है।विशाल, रंगीन सजाए गए रथ उत्तर में दो मील दूर गुंडिचा मंदिर (गुंडिचा-राजा इंद्रद्युम्न की रानी थी) के लिए भव्य मार्ग बड़ा डंडा पर भक्तों की भीड़ द्वारा खींचे जाते हैं।रास्ते में भगवान जगन्नाथ के रथ, नंदीघोष भक्त सालबेगा (एक मुस्लिम श्रद्धालु) के श्मशान के पास उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए ठहरते हैं।
गुंडिचा मंदिर से वापस जाते समय, तीनों देवता मौसी मां मंदिर के पास थोड़ी देर के लिए रुकते हैं और पोडापीठा (PodaPitha) चढ़ाते हैं, जो एक विशेष प्रकार का पैनकेक (Pancake) है जिसे भगवान का पसंदीदा माना जाता है। सात दिनों के प्रवास के बाद, देवी देवता अपने निवास पर लौट आते हैं। ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण, स्कंद पुराण और कपिला संहिता में पाए गए विवरणों के आधार पर प्रत्येक रथ का विशिष्ट नाम और आयाम होता है:
1. भगवान जगन्नाथ जी के रथ को नंदिघोष रथ कहा जाता है।
2. वहीं दूसरा भगवान बलभद्र जी के रथ को तालध्वज रथ कहा जाता है,
3. तथा, भगवान जगन्नाथ की बहन देवी सुभद्रा के रथ को लाल और काले रंग के कपड़ों से सजाया जाता है, और इनके रथ को देवदलन रथ कहा जाता है।
इन रथों के आयामों और इनके भिन्न अंतर को आप निम्न तालिका में देख सकते हैं:









प्रत्येक वर्ष आज के दिन, मेरठ शहर में यह यात्रा सदर के विल्वेश्वर नाथ मंदिर के प्रांगण से प्रारम्भ होती है जो मेरठ छावनी होते हुए पूरे शहर में चक्कर लगाती है। मेरठ में यह रथयात्रा बड़े धूमधाम से मनायी जाती है, 2019 में एक चांदी के 600 किलो के रथ पर इस यात्रा का आयोजन किया गया था।

संदर्भ :-
https://bit.ly/3AZEdPV
https://bit.ly/2TX7n1g
https://bit.ly/3wvLlzR
https://bit.ly/3k9h1bI

चित्र संदर्भ

1. ओडिशा, भारत में रथयात्रा के भव्य रथों का एक चित्रण (wikimedia)
2. पुकांचीपुरम में आगामी उत्सव के लिए रथ के अनावरण का एक चित्रण (wikimedia)

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