मानवता के लिए चुनौती हैं, लीथल ऑटोनॉमस वेपन्स सिस्टम (LAWS)

मेरठ

 17-09-2020 06:19 AM
हथियार व खिलौने

तकनीकी विकास के साथ-साथ युद्ध में इस्तेमाल होने वाले अन्य शस्त्रों में भी काफी बदलाव आए हैं। इस क्षेत्र में प्रयोग किए जाने वाली लीथल स्वचालित शस्त्र प्रणाली (लीथल ऑटोनॉमस वेपन्स सिस्टम (Lethal Autonomous Weapons System) में प्रयुक्त बे-आवाज सेंसर (Sensors), पहले से प्रयोग की गई कंप्यूटरीकृत व्यू-रचना जोकि अपने आप खोजने, लक्ष्य तय करने, ढूंढने और शत्रु के ठिकानों को नष्ट करने में समर्थ तो होती ही है साथ ही बहुत परिकृष्ट भी होती है। यह सत्र प्रणालियां जब एक बार इस्तेमाल होनी शुरू हो जाती हैं, तो इन पर कोई मानवीय नियंत्रण नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में कई नैतिक सवाल खड़े हो जाते हैं। इस कार्रवाई में कई मौतों का जिम्मेदार कौन होगा? भारत में भी इस प्रकार की तकनीक के प्रयोग की तैयारी चल रही है। एक और सवाल भारतीय परिदृश्य में ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से यह उठता है कि साइबर (Cyber) सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को किस तरह हल किया जाएगा?

क्या है लीथल ऑटोनॉमस वेपन्स सिस्टम (LAWS)?
तकनीकी विकास के साथ-साथ युद्ध में इस्तेमाल होने वाले अन्य शस्त्रों में भी काफी बदलाव आए हैं। इस क्षेत्र में प्रयोग किए जाने वाली लीथल स्वचालित शस्त्र प्रणाली (लीथल ऑटोनॉमस वेपन्स सिस्टम (Lethal Autonomous Weapons System) में प्रयुक्त बे-आवाज सेंसर (Sensors), पहले से प्रयोग की गई कंप्यूटरीकृत व्यू-रचना जोकि अपने आप खोजने, लक्ष्य तय करने, ढूंढने और शत्रु के ठिकानों को नष्ट करने में समर्थ तो होती ही है साथ ही बहुत परिकृष्ट भी होती है। यह सत्र प्रणालियां जब एक बार इस्तेमाल होनी शुरू हो जाती हैं, तो इन पर कोई मानवीय नियंत्रण नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में कई नैतिक सवाल खड़े हो जाते हैं। इस कार्रवाई में कई मौतों का जिम्मेदार कौन होगा? भारत में भी इस प्रकार की तकनीक के प्रयोग की तैयारी चल रही है। एक और सवाल भारतीय परिदृश्य में ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से यह उठता है कि साइबर (Cyber) सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को किस तरह हल किया जाएगा?

दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीक जैसे कृत्रिम बौद्धिकता (Artificial Intelligence) और मशीन के बारे में जानकारी के साथ बड़े डेटा (Big Data) के विश्लेषण मिलकर दुनिया को बदल देने की फिराक में है। इनके कारण लीथल स्वचालित शस्त्र प्रणालियों की संभावनाएं कई गुना बढ़ गई हैं। इन प्रणालियों पर कोई मानवीय नियंत्रण ना होना चिंता की बात है।

न्यूयॉर्क में नवंबर 2017 में हुई सीसीडब्ल्यू (CCW) सरकारी विशेषज्ञों के समूह की बैठक की अध्यक्षता भारत ने की थी। उसमें इस प्रणाली से जुड़े सवाल पर विचार करने का सुझाव दिया गया। हालांकि इन सारे मुद्दों का हल होना मुश्किल है, क्योंकि स्वचालित प्रणाली का कोई अनुबंध नहीं होता। इतिहास गवाह है कि जब एक बार तकनीक चल पड़ती है, तो उसको रोकना बहुत मुश्किल होता है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने हत्या करने वाले स्वचालित हथियारों को प्रतिबंधित करने की अपील की है। एक तीसरा मत इस बारे में यह है कि प्रतिबंध के बजाय इन स्वचालित हथियारों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने की जरूरत है अन्यथा हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे होंगे, जहां यह मशीनें अपने-अपने मालिकों के लिए लड़ेंगे और यह मालिक यदा-कदा उन्हें नियंत्रित करेंगे।

भारत में लॉस (LAWS)
लॉस पर प्रतिबंध लगाने के बाद आवरण में भारत अपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित प्रणाली को मजबूती देने पर विचार कर रहा है। क्योंकि भारत अभी विकसित हो रही श्रेणी में है, इसलिए भारत में LAWS की संभावनाओं पर कुछ कहना उपयुक्त नहीं होगा।

सन्दर्भ :
http://www.indiandefencereview.com/news/lethal-autonomous-weapon-systems-a-challenge-to-humanity/
https://en.wikipedia.org/wiki/Lethal_autonomous_weapon
https://news.un.org/en/story/2019/03/1035381
https://bit.ly/2Wa1db6

चित्र सन्दर्भ :
मुख्य चित्र में घातक स्वायत्त हथियार (Lethal Autonomous Weapon, LAW) को दिखाया गया है। (Freepik)
दूसरे चित्र में एक रोबोटिक घातक स्वायत्त हथियार के मॉडल (प्रोटोटाइप, prototype) को दिखाया गया है, जो जापान में बनाया गया है। (Pickist)
तीसरे चित्र में एक अन्य रोबोटिक हथियार को दिखाया गया है। (Pinterest)

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