9 अगस्त, 1942 को गांधी जी की गिरफ्तारी के बाद गोवालिया टैंक मैदान में हुई घटनाओं की अनदेखी तस्वीरें

मेरठ

 15-08-2020 01:27 PM
आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक
गांधी जी ने कहा "यह एक छोटा सा मंत्र है, जो मैं आपको देता हूं। आप इसे अपने दिलों पर अंकित कर सकते हैं और अपनी हर सांस को इसकी अभिव्यक्ति दे सकते हैं। यह मंत्र है: 'करो या मरो' या तो स्वतंत्र भारत देखेंगे या उसकी कोशिश में मर जाएंगे, किन्तु हम अपनी गुलामी के अपराध को देखने के लिए जीवित नहीं रहेंगे।" इस बात ने नागरिकों को एक विशाल सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए प्रेरित किया, क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध (1939 से 1945) के अंत तक अंग्रेजों ने स्वतंत्रता देने से इनकार कर दिया था।

जब पुलिस ने फहराए गए झंडे को उतार दिया, तब लोगों पर लाठी चार्ज करना शुरू किया और फिर सड़कों पर जाकर किसी भी व्यक्ति और स्वयंसेवकों का शिकार करना शुरू कर दिया। उन्होंने होटलों से चाय पीने वाले लोगों को भी घसीट कर बाहर निकाला और जहां भी भीड़ देखी लाठियां चलाने लगे। पुलिस से भयभीत न होकर कुछ सेविकाओं ने साहसपूर्वक उनका सामना किया और उन्हें रुकने के लिए कहा। यहां तक कि सेविकाओं को भी पुलिस की मार झेलनी पड़ी।

सड़कों पर पुलिस द्वारा छोड़े गए मलबे की सफाई हो रही थी, किसी को यह याद नहीं है कि पुलिस ने कितनी बार आग लगाई या आंसू गैस का इस्तेमाल किया। सुबह से लाठीचार्ज शुरू होने के बाद, बंद नहीं हुए थे। भले ही कई लोग मारे गए, लेकिन उनकी दृढ़ता अडिग थी और शाम को बैठक की पुनः घोषणा की गई, जिसमें गांधीजी और बा अनुपस्थिति थे।

हजारों लोग शिवाजी पार्क मैदान में एकत्र हुए। लोगों का इतना विशाल समागम इससे पहले बॉम्बे (Bombay) में कभी नहीं देखा गया।

पुलिस द्वारा हमला रोकने से पहले, 3 घंटे तक इस विशाल भीड़ ने लाठी चार्ज और आंसू गैस से लड़ाई की। इन 3 घंटों के दौरान कई छोटी-छोटी बैठकें हुईं और गाँधी जी के संदेश को पढ़कर सुनाया गया कि "हर किसी को अहिंसा के तहत अंत तक लड़ाई लड़नी है।"

चित्र सन्दर्भ:

1942 की ज्वाला (The flames of 1942 book)

RECENT POST

  • भारत में हमें इलेक्ट्रिक ट्रक कब दिखाई देंगे?
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     27-05-2022 09:23 AM


  • हिन्द महासागर के हरे-भरे मॉरीशस द्वीप में हुआ भारतीय व्यंजनों का महत्वपूर्ण प्रभाव
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     26-05-2022 08:28 AM


  • देखते ही देखते विलुप्त हो गए हैं, मेरठ शहर के जल निकाय
    नदियाँ

     25-05-2022 08:12 AM


  • कवक बुद्धि व जागरूकता के साक्ष्य, अल्पकालिक स्मृति, सीखने, निर्णय लेने में हैं सक्षम
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     24-05-2022 07:35 AM


  • मेरे देश की धरती है दुर्लभ पृथ्वी खनिजों का पांचवां सबसे बड़ा भंडार, फिर भी इनका आयात क्यों?
    खनिज

     23-05-2022 08:43 AM


  • जमीन पर सबसे तेजी से दौड़ने वाला जानवर है चीता
    व्यवहारिक

     22-05-2022 03:34 PM


  • महान गणितज्ञों के देश में, गणित में रूचि क्यों कम हो रही है?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-05-2022 11:18 AM


  • आध्यात्मिकता के आधार पर प्रकृति से संबंध बनाने की संभावना देती है, बायोडायनामिक कृषि
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     20-05-2022 10:02 AM


  • हरियाली की कमी और बढ़ते कांक्रीटीकरण से एकदम बढ़ जाता है, शहरों का तापमान
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-05-2022 09:45 AM


  • खेती से भी पुराना है, मिट्टी के बर्तनों का इतिहास, कलात्मक अभिव्यक्ति का भी रहा यह साधन
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     18-05-2022 08:46 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id