भारतीय सैन्य दल में सैन्य बैंड का विशेष महत्व

मेरठ

 21-03-2020 01:25 PM
द्रिश्य 2- अभिनय कला

भारतीय सैनिक बंदूक का ट्रिगर (Trigger) दबाकर दुश्मनों के नापाक इरादों को ध्वस्त करने में ही महारत नहीं रखते बल्कि अपनी उन्हीं अंगुलियों से वाद्ययंत्रों से धुन निकालकर कई अंतर्राष्ट्रीय समारोहों में भाग लेते हैं और विभिन्न राष्ट्रीय आयोजनों को समर्पित समारोहों में भी भाग लेते हैं। भारतीय सैन्य बैंड (Band) में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के संगीतकार शामिल हैं। ये बैंड राजपथ पर दिल्ली गणतंत्र दिवस की परेड (Parade) में स्थायी प्रतिभागी हैं। आज, भारतीय सशस्त्र बलों के पास 50 से अधिक सैन्य पीतल के बैंड और 400 पाइप बैंड (Pipe Band) और ढोल के सैन्य दल शामिल हैं। भारत में मेरठ पीतल और पीतल से बने वाद्य यंत्रों का सबसे बड़ा निर्माता है। भारतीय सशस्त्र बलों में सैन्य बैंडों में काष्ठ वाद्य श्रेणी, पीतल श्रेणी और आघात श्रेणी के उपकरणों का मिश्रण होता है और कभी-कभी सिर्फ पीतल बैंड या वायु बैंड होते हैं। एक सामान्य सैन्य बैंड में एक बैंड मास्टर (Band Master) और 33 संगीतकार होते हैं जबकि एक पाइप बैंड में बैंड मास्टर और 17 संगीतकार होते हैं।

17वीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य के काल से मार्शियल (Martial) संगीत भारतीय संस्कृति का हिस्सा बना रहा है। संगठित सैन्य बैंड 1700 के दशक की शुरूआत में सैन्य बैंड के रूप में ब्रिटिश (British) सेना द्वारा भारत में लाए गए थे। वहीं प्रथम विश्व युद्ध से पहले भारतीय सेना में बटालियन (Battalion) के बराबर के प्रत्येक रेजिमेंट (Regiment) का अपना सैन्य बैंड था। भारतीय सैन्य दल में पाइप बैंड के आने का कोई सटीक वर्ष ज्ञात नहीं है, लेकिन जब इसे पेश किया गया तो यह 19वीं शताब्दी के अंत में सिखों, गोरखाओं और पठान रेजिमेंट में उपयोग किए गए। वहीं सबसे पहला संपूर्ण सिख पाइप बैंड 1856 में स्थापित किया गया था जब पंजाब में 45वीं रैटट्रे रेजिमेंट (Rattray Regiment) की स्थापना की गई थी। तब से, ब्रिटिश शासन के तहत स्थापित किए गए सिख पाइप बैंड सिख रेजिमेंट का एक हिस्सा रहे हैं। पाइप बैंड वाले ब्रिटिश भारतीय रेजिमेंटों में बॉम्बे वालंटियर राइफल्स (Bombay Volunteer Rifles) और कलकत्ता स्कॉटिश (Calcutta Scottish) शामिल थे।

भारतीय सेना के प्राथमिक बैंड निम्नलिखित हैं:
1) भारतीय सेना के प्रमुख का बैंड :- भारतीय सेना के प्रमुख के बैंड की स्थापना 1990 में भारतीय सेना के आधिकारिक बैंड और सशस्त्र बलों में सबसे अग्रणी के रूप में की गई थी। यह बैंड भारत की राजधानी में आयोजित सबसे महत्वपूर्ण राज्य कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिधित्व करता है।
2) इंडियन नेवल सिम्फोनिक बैंड (Indian Naval Symphonic Band) :- 1945 में स्थापित किया गया इंडियन नेवल सिम्फोनिक बैंड एशिया के सबसे अच्छे सैन्य बैंडों में से एक माना जाता है। संगीतकार अधिकारी के रूप में वे भारत और विदेश में समारोहों और सिम्फोनिक बैंड संगीत समारोहों में नौसेना बैंड के संचालन के लिए अधिकृत हैं।
3) नंबर 1 वायु सेना बैंड :- नंबर 1 वायु सेना बैंड भारतीय वायु सेना की प्राथमिक संगीत इकाई है। इसका गठन 10 जून 1944 को आर.आई.ए.एफ. सेंट्रल बैंड (RIAF Central Band) के रूप में किया गया था और वर्तमान में जलाहल्ली में तैनात है।

भारत में इन सैन्य बैंडों के अलावा और भी कई बैंड मौजूद हैं। वहीं संगीत के शौकीन जो भारतीय सैन्य बैंड का हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें कुछ प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, जैसे:
प्रशिक्षण में सिखाए जाने वाली विद्या निम्न है:
1. मार्चिंग बैंड (Marching Band) के मूल सिद्धांत - (1) बैगपाइप बैंड (2) बांसुरी बैंड।
2. मार्चिंग बैंड में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों का विवरण।
3. मार्चिंग बैंड की वर्दी और सहायक उपकरणों का विवरण।

प्रशिक्षण में सिखाए जाने वाले अभ्यास निम्न हैं:
1. बैगपाइप (Bagpipe), बांसुरी, साइड ड्रम (Side Drum), टेनर ड्रम (Tenor Drum), बेस ड्रम (Bass Drum) और लीडर स्टिक (Leader Stick) का प्रदर्शन।
2. मार्चिंग बैंड उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव का शिक्षण।
3. मार्चिंग बैंड उपकरणों के बीच समन्वय बनाए रखने का अभ्यास।
4. मार्चिंग बैंड की वर्दी पहनने के तरीके का अभ्यास।
5. मार्चिंग प्रशिक्षण और गठन का अभ्यास।
6. स्कूली बच्चों के समक्ष मार्चिंग बैंड उपकरणों का वितरण और साथ ही स्कूल बैंड जागरूकता कार्यक्रम करवाना।

संदर्भ:
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Indian_military_bands
2. http://www.mmtcsln.com/traning2.html



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