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सजावटी मछली उद्योगों में वृद्धि कर सकती हैं मछलियों की विभिन्न प्रजातियां

मेरठ

 05-03-2020 01:00 PM
मछलियाँ व उभयचर

वर्तमान में मछलियों को जहां भोजन के रूप में उपयोग किया जा रहा है वहीं सजावटी मछली के तौर पर भी इन्हें उपयोग में लाया जा रहा है। यह न सिर्फ मछलियों के व्यापार को बढ़ावा दे रही है बल्कि कई लोगों की जीविका का आधार भी बन गयी है। मेरठ में भी मछली को अब मुख्य रूप से घरेलू मछली या सजावटी मछली क रूप में पाला जाने लगा है, जो मुख्यतः पानी से भरे एक टैंक के अंदर निवास करती है। इन सजावटी मछलियों की ख़ास बात यह है की ये मछलियाँ देशी नहीं बल्कि विदेशी हैं। भारत में सजावटी मछली उद्योग लगभग 10 मिलियन लोगों की आजीविका से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। वर्तमान में सजावटी मछलियाँ कुल मछली व्यापार में लगभग 1.25% का ही योगदान दे रही हैं। मछलियों का निर्यात लगभग 69.26 टन तक किया जाता है, तथा 2014 - 15 में इसका मूल्य 566.66 करोड़ रुपये था। 1995 से 2014 की अवधि के दौरान इस मूल्य में औसतन लगभग 11 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की गई। प्रजातियों की समृद्ध जैव विविधता, अनुकूल जलवायु परिस्थितियों और सस्ते श्रम की उपलब्धता के कारण भारत में सजावटी मछली उत्पादन में काफी संभावनाएं हैं। केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य हैं जो भारत में मुख्य रूप से सजावटी मछली पालन का अभ्यास कर रहे हैं।

सजावटी प्रजातियों को देशी और विदेशी प्रजातियों में वर्गीकृत किया जा सकता है। भारत में बड़ी संख्या में देशी प्रजातियों की उपलब्धता ने देश में सजावटी मछली उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उत्तर-पूर्वी राज्य, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में ऐसी कई देशी प्रजातियां पायी जाती हैं, जो मछली उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

निर्यात मांग को पूरा करने के लिए लगभग 90% देशी प्रजातियों (85% उत्तर पूर्व भारत से) को एकत्रित कर उनका पालन किया जाता है। वर्तमान में, लगभग 100 देशी प्रजातियों को मछलीघर में सजावटी मछली के रूप में पाला जा रहा है। इसके अलावा रंग, आकार और रूप के कारण विदेशी प्रजातियों की भी मांग काफी अधिक है तथा 300 से अधिक विदेशी प्रजातियों को सजावटी मछली व्यापार में शामिल किया जाता है।

भारत में मछलियों का 90% निर्यात कोलकाता से जबकि 8% और 2% क्रमशः मुंबई और चेन्नई से होता है। इन मछलियों को पालने फ़ायदा यह है कि ये मछलियां युवा और बूढ़े हर उम्र के लोगों को प्रसन्न करती हैं, मन को शांति देती हैं और एक स्वस्थ जीवन में अपना योगदान देती हैं।

मत्स्य पालन से इनकी प्रकृति के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती हैं। इसके अलावा यह स्वरोजगार के अवसर भी पैदा करती हैं। एक्वेरीकल्चर (Aquariculture) के तहत विभिन्न विशेषताओं की आकर्षक, रंगीन मछलियों को एक सीमित जलीय प्रणाली में पाला जाता है।

दुनिया भर में करीब 30,000 से अधिक मछली प्रजातियां हैं, जिनमें से लगभग 800 प्रजातियां सजावटी मछलियों की हैं। सजावटी मछलियों की मांग बढ़ने के साथ सजावटी मछली उद्योग में करीब 8% की वृद्धि होने की उम्मीद है। क्योंकि भारत के ताजे और समुद्री दोनों प्रकार के जल में सजावटी मछलियों की बहुल्यता है इसलिए भविष्य में सजावटी मछली उद्योगों के विकास की जबरदस्त गुंजाइश है। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भले ही भारतीय स्वदेशी सजावटी मछली की मांग अच्छी है, किन्तु कई कारकों की वजह से इनका सीमित संख्या में ही निर्यात किया जाता है। इन कारकों में स्थिरता, घरेलू बाजार में स्वदेशी मछलियों के प्रजनन में अरूचि आदि शामिल हैं। यद्यपि देश में चयनित स्वदेशी सजावटी मछलियों के लिए प्रजनन तकनीक वैज्ञानिक रूप से पूर्ण की गई है, किन्तु बड़े पैमाने पर उनका उत्पादन अभी भी शुरू होना बाकी है।

यदि सरकारी संस्थानों द्वारा बड़े पैमाने पर सुविधाएं स्थापित की जाएँ और प्रजनकों को विशेष प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाए तो देश से निर्यात बढ़ाने के लिए अधिक स्वदेशी सजावटी मछली का उत्पादन किया जा सकता है। सजावटी मछली उद्योग लगभग 50,000 लोगों को रोजगार प्रदान करता है तथा विशेषज्ञों के अनुसार, अगले 10 वर्षों में घरेलू मछलीघर बाजार के 300 करोड़ से बढ़कर 1,200 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। हाल ही में सजावटी मछली व्यापार के संदर्भ में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा घोषित किये गये नियम इस उम्मीद की पूर्ति में बाधा बन सकते हैं। मंत्रालय ने 158 प्रजातियों के प्रदर्शन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है तथा टैंक आकार, पानी की मात्रा और स्टॉकिंग घनत्व पर नियम लाने के अलावा टैंक में मछलियों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए पूर्णकालिक मत्स्य विशेषज्ञ की नियुक्ति को भी अनिवार्य कर दिया है। ये नियम छोटे प्रजनकों, व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, निर्यातकों और शौकियों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। एक छोटे प्रजनक या खुदरा दुकान मालिक के लिए मत्स्य विशेषज्ञ को नियुक्त करना या मछलीघर के पंजीकरण के लिए भारी राशि का भुगतान करना मुश्किल होगा। इससे छोटे व्यापारियों की बजाय अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों को भारतीय बाजार में प्रवेश करने के अवसर प्राप्त होंगे तथा 10 मिलियन लोगों का रोजगार नकारात्मक रूप से प्रभावित होगा।

सन्दर्भ:
1. https://bit.ly/39q4Wqn
2. http://www.fisheriesjournal.com/archives/2019/vol7issue2/PartA/7-1-48-550.pdf
3. https://bit.ly/3asLklB
4. https://economictimes.indiatimes.com/industry/cons-products/food/ornamental-fish-industry-hit-by-new-regulations/articleshow/59174671.cms
चित्र सन्दर्भ:-
1.
https://bit.ly/2IlHkY5
2. https://bit.ly/2IlHkY5
3. https://economictimes.indiatimes.com/industry/cons-products/food/ornamental-fish-industry-hit-by-new-regulations/articleshow/59174671.cms



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