Machine Translator

बौद्ध धर्म ग्रंथों से मिलता है परलोक सिद्धांत का वर्णन

मेरठ

 11-02-2020 01:45 PM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

अधिकांश धर्मों में पुनर्जन्म एवं परलोक की मान्यता देखी जा सकती है, हममें से सभी ने अक्सर यह सुना ही है कि मनुष्य जीवन में जैसा कर्म करता है, वैसा ही उसको परिणाम मिलता है। विभिन्न धर्मों में मृत्यु और उसके बाद के जीवन के यानि परलोक सिद्धांत के संदर्भ में अलग अलग मान्यताएं हैं। बौद्ध परलोक सिद्धांत के दो प्रमुख बिंदु हैं: मैत्रेय की उपस्थिति और सात सूर्यों का उपदेश।

बौद्ध परंपरा के अनुसार, बुद्ध द्वारा उनकी शिक्षाओं को उनके निधन के पाँच हज़ार वर्ष बाद (लगभग 4600 ई.पू.) में गायब होने का वर्णन किया था। उनका मानना था कि इस समय, धर्म का ज्ञान भी खो जाएगा और उनके अवशेषों के अंतिम भाग को बोधगया में इकट्ठा करके अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा। तभी एक नया युग आएगा जिसमें एक बोधिसत्व मैत्रेय पृथ्वी पर मानव समाज के पतन से पहले दिखाई देंगे। यह लालच, वासना, गरीबी, बीमार इच्छा, हिंसा, हत्या, अशुद्धता, शारीरिक कमजोरी, लैंगिक दुर्बलता और सामाजिक पतन की अवधि होगी और यहां तक कि स्वयं बुद्ध को भी लोग भूल जाएंगे।

मैत्रेय का सबसे पहला उल्लेख पाली कैनन के दीघा निकया 26 के काकवत्ती (सिहानदा) सुत्त से मिलता है। वहीं मैत्रेय बुद्ध के जन्म की पहले से ही भविष्यवाणी की गई है, जिसके मुताबिक मैत्रेय बुद्ध का जन्म केतुमती शहर में (तत्कालीन बनारस) होना कहा गया है, जिसका राजा कक्कवत्ति संक होगा। संक राजा महजपनद के पूर्व महल में रहेंगे, लेकिन बाद में मैत्रेय का अनुयायी बनने के लिए महल से दूर चले जाएंगे।

महायान बौद्ध धर्म में, मैत्रेयी सात दिनों में बोधि प्राप्त कर लेंगे और बुद्ध बनने के बाद वह केतुमती की शुद्ध भूमि पर शासन करेंगे। वहीं इस अवधि में वे दस गैर-पुण्य कार्यों (हत्या, चोरी, लैंगिक दुराचार, झूठ, विभाजनकारी भाषण, अपमानजनक भाषण, निष्क्रिय भाषण, लोभ, हानिकारक इरादे और गलत विचारों) और दस पुण्य कार्यों (हत्या, चोरी, यौन दुराचार, झूठ बोलना, विभाजनकारी भाषण, अपमानजनक भाषण, बेकार भाषण, लोभ, हानिकारक इरादे और गलत विचार आदि सभी का परित्याग) की मानवता के बारे में सीखेंगे।

वहीं दूसरी ओर पाली कैनन के अगुत्तारा निकैया में सत्तसुरिया सुत्त ("सात सूर्य" का उपदेश) में, बुद्ध एक सर्वनाश (जो आकाश में सात सूर्यों के फलस्वरूप प्रकट होगा) में दुनिया के अंतिम भाग्य का वर्णन करते हैं, जिसमें पृथ्वी के नष्ट होने तक प्रगतिशील बर्बादी का संदर्भ दिया गया है। कैनन प्रत्येक सूरज के प्रगतिशील विनाश का वर्णन करते हुए बताता है कि तीसरा सूर्य शक्तिशाली गंगा और अन्य महान नदियों को सुखा देगा। जबकि चौथा महान झीलों को लुप्त कर देगा, और पांचवा सूरज महासागरों को सुखा देगा।

मुख्य रूप से चीन और जापान में, पूर्व एशियाई बौद्ध संरचनाओं ने, सद्द धर्म की प्रतिरूपिका के आधार पर अपने स्वयं के परलोक सिद्धांत को विकसित कर लिया गया। वहीं चीन में विद्वानों ने आमतौर पर अंतिम धर्म की शुरुआत 552 ईसवीं में होने की बात को स्वीकार किया है, जबकि जापानी लेखकों का मानना है कि यह चरण 1052 ईसवीं पर आधारित है। हालांकि सापेक्ष परलोक सिद्धांत को अक्सर बौद्ध उपदेश में कालक्रम से जोड़ा जाता है।

यद्यपि दोनों चीनी और जापानी बौद्ध संस्कृतियों ने बौद्ध धर्मग्रंथों की अपनी समझ के सापेक्ष अंतिम धर्म परलोक सिद्धांत की इस भावना को साझा किया, लेकिन इस तरह के पतनशील ब्रह्मांड संबंधी परिस्थितियों में बौद्ध धर्म का अभ्यास कैसे किया जाए, इसकी प्रतिक्रिया काफी अलग है। वहीं बुद्ध द्वारा अपने पूरे इतिहास में सूत्रबद्ध परलोक सिद्धांत पर आधारित धर्मग्रंथों को बौद्ध समुदाय द्वारा आयातित, अनुवादित और उपयोग किए गए बौद्ध धर्मग्रंथों में पाया जा सकता है।

संदर्भ :-
1.
https://www.academia.edu/2243893/Eschatology_and_World_Order_in_Buddhist_Formations
2. https://en.wikipedia.org/wiki/Buddhist_eschatology



RECENT POST

  • रेलवे की बिजली खपत को कम करने में सहायक है हेड ऑन जनरेशन तकनीक
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     25-02-2020 03:30 PM


  • गौरवशाली इतिहास वाला मेरठ और एक कड़वे सच का सामना
    स्तनधारी

     24-02-2020 03:00 PM


  • ज़िन्दगी की जद्दोजहद को दिखाती एक टिटहरी की कहानी - पाइपर (Piper)
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     23-02-2020 03:30 PM


  • एक लचीला और घातक अस्त्र: उरुमी
    हथियार व खिलौने

     22-02-2020 01:30 PM


  • सात समंदर पार भी फैली है बाबा औघड़नाथ की महिमा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     21-02-2020 03:33 AM


  • ब्रिटिश संग्रहालय (British Museum) में मौजूद है अशोक स्तंभ का एक टुकड़ा
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     20-02-2020 12:40 PM


  • कोरोना वायरस से संबंधित भ्रमक जानकारियों से बचें
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     19-02-2020 11:00 AM


  • अप्रतिम वास्तुकला का नमूना है मेरठ का मुस्तफा महल
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     18-02-2020 01:30 PM


  • मेरठ को काफी प्रभावी लागत प्रदान करता है पुष्पकृषि(floriculture)
    बागवानी के पौधे (बागान)

     17-02-2020 01:40 PM


  • कैसे बना सकते है, घर में ही गुड़हल की बोन्साई
    बागवानी के पौधे (बागान)

     16-02-2020 10:04 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.