फ़ोटोग्राफ़ी में आया एक नया चलन ड्रोन का

मेरठ

 30-12-2019 12:01 PM
द्रिश्य 1 लेंस/तस्वीर उतारना

एक समय ऐसा भी था जब फ़ोटोग्राफ़ी सम्पन्न वर्ग तक सीमित रहती थी, क्योंकि यह महँगी और इसके उपकरणों का उपयोग करने के लिए काफी तकनीक तथा कौशल की जरूरत होती थी। एक ठीक-ठाक कैमरा भी उस समय बहुत महँगा हुआ करता था। वहीं वर्तमान समय में कई कैमरे काफी किफायती दामों में मिल जाते हैं, जिसके चलते सभी द्वारा फ़ोटोग्राफ़ी लेना काफी सरल हो गया है। लेकिन आम कैमरों से दुर्गम क्षेत्रों की और हवाई फ़ोटोग्राफ़ी करना काफी मुश्किल साबित हो रहा था। जिसे देखते हुए वैज्ञानिकों द्वारा ड्रोन का आविष्कार किया गया, जो एक छोटा रिमोट द्वारा नियंत्रित करने वाला विमान है, जो किसी भी कैमरे को ले जाने में सक्षम होता है। दरसल यह कोई एक नया विचार नहीं है, आरसी एयरक्राफ्ट के समर्थक लोग वर्षों से ही छोटे विमानों के मॉडल को तैयार करने में लगे हुए थे।

गैस्पर फ़ेलिक्स टूरनाचॉन, जिसे आमतौर पर "नादर" के रूप में जाना जाता है द्वारा 1858 में एक गर्म हवा के गुब्बारे से पहली सफल हवाई तस्वीर ली गई थी, जिसे उन्होंने पेरिस के बाहर पेटिट-बिसेटर (अब पेटिट-क्लैमार्ट) के ऊपर 262 फीट पर लिया गया था, हालांकि उसकी मूल तस्वीरें खो गई। जेम्स वालेस ब्लैक की 1860 की हवाई तस्वीर, जो बोस्टन से 2,000 फीट ऊपर के बंधे हुए हॉट एयर बैलून (hot air balloon) से ली गई थी, जो सबसे पुरानी मौजूद हवाई तस्वीर है। जॉर्ज लॉरेंस द्वारा बाद में घुमावदार फिल्म प्लेट (plates) के साथ बड़े प्रारूप वाले कैमरों को पतंग की मदद से चित्रमाला लेने की एक विधि को पूरा किया था। उनकी सबसे प्रसिद्ध तस्वीर 1906 के सैन फ्रांसिस्को भूकंप और आग से हुए नुकसान की छवि है, जिसे 17 पतंगों का इस्तेमाल करके हवा में एक कैमरे को भेज 2,000 फीट की ऊंचाई से लिया गया था। 1903 में, जर्मन इंजीनियर अल्फ्रेड मौल ने एक बारूद रॉकेट का आविष्कार किया, जो केवल आठ सेकंड में 2,600 फीट तक पहुंच सकता था और पहुँचने के बाद, यह पैराशूट से बंधे कैमरे को छोड़ देता था, जिससे कई तस्वीरे भी ली गई थी।

हवाई तस्वीरे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान युद्ध की ली गई हवाई तस्वीरों के बाद काफी लोकप्रिय हूँ गई थी। युद्ध के दौरान ही अमेरिका ने TDR-1 (हालांकि यह एक इमेजिंग प्लेटफॉर्म के बजाय एक आक्रमण विमान था) की तरह अल्पविकसित ड्रोन विमानों के साथ प्रयोग करना शुरू कर दिया था। 1980 के दशक में पहली बार आधुनिक शैली के ड्रोन दिखाई देने लगे थे, क्योंकि इजरायल के इंजीनियरों द्वारा लोगों पर निगरानी रखने के लिए वीडियो कैमरों से सुसज्जित मॉडल विकसित किए थे। जिसे देखते ही अमेरिका ने जल्द ही इसी तरह की तकनीक को अपनाया और एक रिमोट-नियंत्रित अग्रणी ड्रोन को बनाया, जिसके द्वारा खाड़ी युद्ध के दौरान आत्मसमर्पण करने वाले इराकी सैनिकों को फिल्माया था। कुछ साल पहले तक, हवाई फोटोग्राफी का उपयोग ज्यादातर सैन्य, समर्पित शौकीनों, और पूर्ण आकार के विमानों का उपयोग करने वाले लोगों तक सीमित था। लेकिन आज इसके मूल्य में गिरावट और आसानी से इस्तेमाल किए जाने की सुविधा से इसे हम एक व्यवसाय के रूप में भी देख सकते हैं। हालांकि ड्रोन तेजस्वी हवाई फोटो को लेने और पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने में मदद करता है, लेकिन इसे पहली बार उपयोग करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इसीलिए यदि कोई भी व्यक्ति अपना ड्रोन फ़ोटोग्राफ़ी व्यवसाय शुरू करना चाहता हैं और इसमें सफल बनना चाहते हैं तो निम्न चरणों का अनुसरण करना होगा :-
1.
व्यवसाय शुरू करने से पहले एक उपयुक्त ड्रोन का चीन करें, हालांकि प्रत्येक ड्रोन अलग होते हैं, इसलिए एक अच्छे ड्रोन में कैमरा गिंबल्स; जीपीएस (GPS); एफपीवी (FPV); उड़ान नियंत्रक; टक्कर से बचाव करने वाले फ़ंक्शन (function) होने चाहिए।
2. इसके बाद यह तय करने की आवश्यकता है कि एक अंतर्निर्मित या ऑन-बोर्ड कैमरा लेना सही रहेगा। अंतर्निहित कैमरों वाले ड्रोन बड़े होते हैं और आमतौर पर कम गुणवत्ता वाले चित्र लेते हैं। ऑन-बोर्ड कैमरे वाले ड्रोन में स्वयं कैमरा संलग्न किया जा सकता है, हालाँकि, ड्रोन उड़ाने का तरीका सीखने के बाद उच्च गुणवत्ता वाली छवियों को प्रबंधित करना और लेना आसान होता है।
3. ड्रोन का उपयोग करने से पहले एक महत्वपूर्ण बात को हमेशा ध्यान रखें कि इसे उड़ाने से पहले उस स्थान के नियमों को जान लें। यह विशेष रूप से सच है यदि आप किसी निजी संपत्ति, संघीय भवनों, स्कूलों या हवाई अड्डों के पास हैं, तो वहाँ तस्वीर लेने के लिए आवश्यक अनुमति जरूर लें।
4. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा ड्रोन को उड़ाने के लिए कुछ नियमों को जारी किया है और भारत में किसी भी प्रकार के ड्रोन को उड़ाने के लिए खासकर शादी की फोटोग्राफी सहित उन सभी के लिए करने और ना करने के कुछ निर्देश दिए हैं। यदि ड्रोन एक नियंत्रित हवाई क्षेत्र में उड़ान है, तो आपको यूआईएन और यूएओपी दोनों के लिए आवेदन करना होगा। इसके अलावा आपके ड्रोन में NPNT (नो परमिशन - नो टेकऑफ़) शिकायत दर्ज हो सकती है। इसलिए अनियंत्रित हवाई क्षेत्र और संलग्न परिसर में ही उड़ान भरें।

हालांकि भारत में ड्रोन के उड़ान पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन इसके लिए ऐसा कोई नियम या नीतियां नहीं लाई गई हैं जिससे इन्हें सुरक्षित रूप से संचालित किया जा सके। 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति, जिसने इसका प्रशिक्षण भी न लिया हो इसे खरीद सकता है और इसका असुरक्षित रूप से उपयोग कर सकता है।

संदर्भ :-
1.
https://time.com/5281295/aerial-photography-history-drones/
2. https://www.lightstalking.com/rise-of-the-drones/
3. https://wp-modula.com/how-to-start-a-drone-photography-business/
4. https://www.livemint.com/Companies/Yd7dtjnFKZSIbbjhIQT4UI/drones-rules-wedding-photography-list-of-new-regulations.html
5. https://www.indiatoday.in/mail-today/story/flying-drones-india-aerial-photography-quadcopters-gizmos-957295-2017-01-27



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