Machine Translator

जानवरों के उपयोग पर लगे प्रतिबंध से बदल गए सर्कस

मेरठ

 10-12-2019 12:49 PM
द्रिश्य 2- अभिनय कला

सर्कस (Circus) का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में शेर-चीते-भालू के खेल से सजे शानदार टैंट (Tent) में चल रहे खेल-तमाशा का ध्यान आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब भारतीय सर्कस में जानवरों को रखना और उनके खेल दिखाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है? मेरठ में भी प्रति वर्ष नौचंदी के मेले में बड़े पैमाने पर सर्कस का आयोजन किया जाता है जिसे देखने पूरे शहर के लोग आते हैं। 2001 में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा सर्कस में भालू, बंदर और बड़ी बिल्लियों के उपयोग पर सरकारी प्रतिबंध लगाने के पहले से नौचंदी मेले का सर्कस एक बड़ा आकर्षण हुआ करता था।

नौचंदी मेले में होने वाले सर्कस में पहले जानवर ही मुख्य आकर्षण का केंद्र थे, ये काफी भीड़ को अपनी ओर इकठ्ठा करते थे और अब सरकार द्वारा सर्कस में जानवरों के खेल पर प्रतिबंध लगाने से सर्कसों में कई मानवीय करतबों की ओर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सर्कस में मानव द्वारा किए जाने वाले करतब जैसे कि रस्सी पर साइकल (Cycle) चलाना, नट कला, जोकर (Joker), ट्रेपीज़ (Trapeze), ट्रम्पोलिन (Trampoline) और छोटा सा मौत का कुंआ शामिल हैं। रेम्बो सर्कस भारत की उन कुछ सर्कस कंपनियों में से है जो प्रतिबंध के बाद इस चुनौती में खड़ा रह सका है। हालांकि पहले जैसे इस सर्कस को देखने के लिए लोग नहीं आते हैं, लेकिन फिर भी चमकीले कपड़े पहने उत्साही कलाकार, जोकर, जिमनास्ट (Gymnast), और निशानेबाज, प्रदर्शन करने के लिए बारी-बारी से, अपने दिन के प्रदर्शन के हिस्से के रूप में उच्च परिशुद्धता संतुलन और साहसी कौशल प्रदर्शित करते हैं।

वहीं भारत में, सर्कस को न तो मान्यता प्राप्त है और न ही कलाकारों को उचित सम्मान दिया जाता है। अन्य देशों के विपरीत, जहां संस्कृति मंत्रालय के तहत सर्कस को मान्यता प्राप्त है, वहीं भारत में, इसे मनोरंजन के साधन के रूप में देखा जाता है। केरल सरकार ने 1901 में थालास्सेरी में देश में पहली सर्कस अकादमी शुरू की। इसके बाद 1950 के दशक में, एशिया के सबसे बड़े कमला थ्री रिंग सर्कस द्वारा सर्कस के लिए कॉलेज और छात्रों के छात्रावास का निर्माण किया गया था। जबकि अधिकांश मनोरंजन शो लगातार खुद को सुदृढ़ करते हैं, सर्कस अब कई वर्षों से एक समान रह गए हैं। साथ ही कुछ कंपनियों ने नए दर्शकों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए नए तरीकों की तलाश शुरू कर दी है।

कुणिकानन के प्रशिक्षण केंद्र ने कलारीपयट्टू जैसे भारतीय मार्शल आर्ट (Martial Art) के साथ थिएटर को जोड़कर सर्कस को एक साथ लाया। पशु अधिकार कार्यकर्ता बहुत लंबे समय से सर्कस में जानवरों के उपयोग पर प्रतिबंध की और इस संबंध में नियमों को जारी करने की प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। प्रस्तावित प्रतिबंध से उन जानवरों के उत्पीड़न को समाप्त करने की संभावना है, जो सीमित स्थानों पर रहने और दर्दनाक कार्य करने के लिए मजबूर किए जाते हैं। यह उन जानवरों के लिए भी राहत प्रदान करता है जो प्रशिक्षण की प्रक्रिया से गुजरते हैं और अक्सर उनके साथ ज़बरदस्ती की जाती है। वहीं नए प्रारूप के नियमों में कहा गया है कि "कोई भी जानवर किसी भी सर्कस या मनोरंजन सुगमता में किसी भी प्रदर्शन या प्रदर्शनी के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा"।

संदर्भ:
1.
https://bit.ly/2YID2BH
2. https://bit.ly/2s7M5jb
3. https://bit.ly/357x3Zh
4. https://bit.ly/2E191mV
5. https://bit.ly/2LEhBvX
चित्र सन्दर्भ:-
1.
https://pixabay.com/no/photos/akrobater-sirkus-contortion-tihany-412011/
2. https://pixabay.com/no/photos/akrobater-sirkus-acrobat-balanse-4497739/
3. https://www.needpix.com/photo/693860/circus-tent-circus



RECENT POST

  • भारत के अलावा इंडोनेशिया में भी मनाया जाता है, सरस्वती पूजनोत्सव
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     29-01-2020 12:30 PM


  • क्या 21वीं सदी का शहरीकरण है नियंत्रण से बाहर?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     28-01-2020 12:00 AM


  • आयुर्वेद में भी मिलता है गम्हड़ के गुणों का वर्णन
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     27-01-2020 10:00 AM


  • कहाँ से आया है, रिपब्लिक (Republic, गणतंत्र) शब्द और क्या है इसका अर्थ?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     26-01-2020 10:00 AM


  • जीवन के हर पहलू से जुड़ा है पाई
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     25-01-2020 10:00 AM


  • मानव जीवन में एर्गोनॉमिक्स (Ergonomics) का महत्व
    घर- आन्तरिक साज सज्जा, कुर्सियाँ तथा दरियाँ

     24-01-2020 10:00 AM


  • कैसा है, समुद्र की गहराइयों में रहने वाले जीवों का जीवन?
    निवास स्थान

     23-01-2020 10:00 AM


  • वर्णक के रूप में उपयोग किया जाता है गेरू
    खनिज

     22-01-2020 10:00 AM


  • आलमगीरपुर गाँव से मिले सिंधु सभ्यता से जुड़े साक्ष्य
    सभ्यताः 10000 ईसापूर्व से 2000 ईसापूर्व

     21-01-2020 10:00 AM


  • हमारे देश के मौन रक्षकों के लिए खुला है, मेरठ में पुनर्वास केंद्र
    स्तनधारी

     20-01-2020 10:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.