Machine Translator

विश्व के सबसे पुराने पेड़ एवं वन

मेरठ

 20-11-2019 12:06 PM
जंगल

इस विश्व में पेड़ों का अस्तित्व मानव सभ्यता के अस्तित्व से भी पहले का है। वर्तमान में भी पेड़ों के बिना मानव सभ्यता के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इन पेड़ों ने कई सभ्यताओं की उत्पत्ति और विनाश को देखा है। वाहिकीय पौधे लगभग 40 करोड़ साल पहले उभरे और सिलुरियन भूगर्भिक काल (Silurian Geologic Period) में पृथ्वी के वन-निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। वाहिकीय आंतरिक प्लंबिंग (Plumbing) प्रणाली के समर्थन के साथ वाहिकीय पौधों ने बड़े और लंबे बढ़ने की क्षमता को विकसित कर लिया था।

पृथ्वी का पहला वास्तविक वृक्ष डेवोनियन (Devonian) काल के दौरान विकसित हुआ था और वैज्ञानिकों को लगता है कि यह पेड़ संभवत: विलुप्त आर्कियोप्टेरिस (Archaeopteris) था। इस पेड़ की प्रजाति बाद में अन्य प्रकार के वृक्षों के साथ डेवियन काल के अंत में जंगल में विकसित हो गई। आर्कियोप्टेरिस मुक्त-घूमने वाले वृक्षसंकुल के एक समूह का एक सदस्य है जिसे प्रोजिमनोस्पर्म (Progymnosperm) कहा जाता है जिन्हें जिमनोस्पर्म के दूर के पूर्वजों के रूप में जाना गया था।

बीजों का उत्पादन करने के बजाए बीजाणुओं को छोड़ कर आर्कियोप्टेरिस प्रजनन करते थे, लेकिन कुछ प्रजातियां, जैसे कि आर्कियोप्टेरिस हालियाना (Archaeopteris halliana) विषमलैंगिक थे। इस जीनस के पेड़ आमतौर पर पत्तेदार पर्णसमूह के साथ 24 मीटर ऊंचाई तक बढ़ जाते हैं जो कुछ कोनिफ़र (Conifer) की याद दिलाते हैं। इसमें पंखे के आकार के पत्तों के साथ बड़े पर्णांग मौजूद थे। कुछ प्रजातियों के तने का व्यास 1.5 मीटर से अधिक था।

वहीं लगभग 36 करोड़ साल पहले कार्बोनिफेरस (Carboniferous) की अवधि में प्रवेश करते हुए, पेड़ और पौधों की अधिकांश प्रजाति जीवन समुदाय का एक प्रमुख हिस्सा थी, जो ज्यादातर कोयला का उत्पादन करने वाले दलदलों में पाए जाते थे। समय के साथ-साथ पेड़ उन हिस्सों को विकसित करने में सक्षम होने लगे जिन्हें वर्तमान समय में हम तुरंत पहचान लेते हैं। दिलचस्प बात तो यह है कि भूगर्भिक काल के दौरान बहुत ही परिचित जिन्कगो (Gingco) पेड़ के पूर्वज दिखाई दिए और इसके जीवाश्म अभिलेख पुराने और नए के समरूप होने को दर्शाता है। साथ ही एरिज़ोना का "पेट्रिफ़ाइड फ़ॉरेस्ट" पहले शंकुधर या जिमनोस्पर्म (Gymnosperm) के उदय का एक उत्पाद था।

डेवोनियन और कार्बोनिफेरस के दौरान मौजूद सभी पेड़ों में से केवल फ़र्न (Fern) अभी भी पाया जा सकता है, जो अब आस्ट्रेलियाई उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में रह रहा है। उसी भूगर्भिक काल के दौरान, क्लबमॉस (Clubmoss) और विशाल हॉर्सटेल (Horsetail) सहित कई अन्य विलुप्त पेड़ भी बढ़ रहे थे। लगभग 25 करोड़ साल पहले प्राचीन जंगलों में दिखाई देने वाली अगली तीन प्रजातियां :- साइकैड्स (Cycads) और मंकी-पज़ल (Monkey-Puzzle) पेड़ सहित कई पेड़, विश्व भर में पाए जा सकते हैं और आसानी से पहचाने जाते हैं।

पेड़ों का पृथ्वी पर काफी प्राचीन इतिहास रहा है और मानव जीवन में भी काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्तमान समय में हममें से अधिकांश लोगों ने गर्मी की तीव्रता का अनुभव किया है और यह विश्वास करना मुश्किल नहीं है कि हमारा ग्रह गर्म हो रहा है। पिछले चार वर्षों में गर्मी की लहरों के कारण होने वाली मौतें 4,700 के आसपास होना, भारत के लिए चौंकने वाली बात नहीं है। इस बदलते वैश्विक मौसम के लिए मानव निर्मित गैसों (Gases) का उत्सर्जन ज़िम्मेदार है, जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon dioxide), नाइट्रस ऑक्साइड (Nitrous Oxide), सल्फर डाइऑक्साइड (Sulphur Dioxide) और पार्टिकुलेट मैटर (Particulate Matter) शामिल हैं।

तेज़ी से शहरीकरण के कारण मोटर वाहनों की संख्या में ज़बरदस्त वृद्धि हुई है। भारत में, मोटर वाहनों की संख्या 1950-51 में 3 लाख से बढ़कर 2000-01 में लगभग 5 करोड़ हो गई है। पिछले 50 वर्षों में सड़क आधारित यात्री गतिशीलता में प्रति वर्ष 9.20% की वृद्धि हुई है। मानव निर्मित कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का 16.5% से अधिक अब सड़क परिवहन के कारण होता है। 2000-01 में 1.98 करोड़ मेट्रिक टन कार्बन समतुल्य उत्सर्जन दर्ज किया गया, जो 2020-21 में 9.35 करोड़ मेट्रिक टन तक बढ़ने की उम्मीद है।

इस बढ़े हुए मानव निर्मित उत्सर्जन के हानिकारक प्रभाव काफी गहरे हैं। विस्तारित सूखे के साथ वर्षा के स्तर और उष्णकटिबंधीय तूफानों का उतार-चढ़ाव वैश्विक वातावरण में इस अशुद्धता का मुख्य परिणाम है। वहीं बर्फ की मात्रा में कमी, समुद्र का जल स्तर बढ़ना, समुद्र के पीएच (pH) में परिवर्तन और लंबे समय तक मौसम की स्थिति, पर्यावरण संतुलन को बदल रही है, जिस कारण से ही अस्पष्ट तापमान बढ़ रहा है।

संदर्भ:
1.
https://www.nature.com/scitable/blog/accumulating-glitches/the_first_forests/
2. https://www.thoughtco.com/evolution-of-forests-and-trees-1342664
3. https://www.bbc.co.uk/programmes/b01qgr5m
4. https://en.wikipedia.org/wiki/Archaeopteris
5. https://yourstory.com/2018/06/india-balance-conservation-mobility



RECENT POST

  • रेलवे की बिजली खपत को कम करने में सहायक है हेड ऑन जनरेशन तकनीक
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     25-02-2020 03:30 PM


  • गौरवशाली इतिहास वाला मेरठ और एक कड़वे सच का सामना
    स्तनधारी

     24-02-2020 03:00 PM


  • ज़िन्दगी की जद्दोजहद को दिखाती एक टिटहरी की कहानी - पाइपर (Piper)
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     23-02-2020 03:30 PM


  • एक लचीला और घातक अस्त्र: उरुमी
    हथियार व खिलौने

     22-02-2020 01:30 PM


  • सात समंदर पार भी फैली है बाबा औघड़नाथ की महिमा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     21-02-2020 03:33 AM


  • ब्रिटिश संग्रहालय (British Museum) में मौजूद है अशोक स्तंभ का एक टुकड़ा
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     20-02-2020 12:40 PM


  • कोरोना वायरस से संबंधित भ्रमक जानकारियों से बचें
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     19-02-2020 11:00 AM


  • अप्रतिम वास्तुकला का नमूना है मेरठ का मुस्तफा महल
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     18-02-2020 01:30 PM


  • मेरठ को काफी प्रभावी लागत प्रदान करता है पुष्पकृषि(floriculture)
    बागवानी के पौधे (बागान)

     17-02-2020 01:40 PM


  • कैसे बना सकते है, घर में ही गुड़हल की बोन्साई
    बागवानी के पौधे (बागान)

     16-02-2020 10:04 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.