Machine Translator

जपजी साहिब के श्लोकों का अर्थ

मेरठ

 12-11-2019 12:31 PM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

"एक ओंकार सतनाम, करता पुरखु निरभऊ, निरबैर, अकाल मूरति, अजूनी, सैभं गुर प्रसादि, जप, आद सच, जुगाद सच, है भी सच, नानक होसे भी सच।"

आज गुरुनानक देव जी की 550वीं जयंती है और इस अवसर पर मेरठ शहर में भी जोर शोर से तैयारियां शुरू की गई है, यहाँ मौजूद गुरुद्वारों में प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में सजावट और लंगर तक की खास तैयारियां की जाती हैं और इस दौरान गुरुद्वारों में विशाल कीर्तन दरबार भी सजाए जाते हैं और इन सब की स्थापना के पीछे संगत का बरसों का संघर्ष और परिश्रम छिपा हुआ है। ज्यादातर सभी गुरुद्वारों की स्थापना वर्ष 1947 यानि आजादी के बाद ही हुई थी। गुरुनानक देव जी का जन्म भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसलिए इस दिन को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है।

सिख धर्म के संस्थापक कहलाने वाले गुरु नानक देव जी दसों गुरुओं में सबसे पहले गुरु हैं। इनके द्वारा ही भक्ति रस के अमृत के बारे में बताया गया और श्री गुरु ग्रंथ साहिब की शुरुआत में मौजूद जपजी साहिब (प्रार्थना) की रचना भी इनके द्वारा ही की गई थी। जाप का पारंपरिक अर्थ सुनाना, दोहराना या जप करना होता है और जप का अर्थ समझना भी होता है। जपजी साहिब की शुरुआत में मूल मंत्र है और उसके बाद 38 पौड़ी (श्लोक) है और यह रचना एक सालोक के साथ समाप्त होती है। यह सिखों द्वारा सबसे महत्वपूर्ण बाणी या छंदों का संग्रह माना जाता है, और यह नितनेम की भी सबसे पहली बाणी है।

जपजी साहिब के पहले श्लोक में कहा गया है कि केवल शरीर की सफाई से मन को साफ नहीं किया जा सकता, केवल मौन से व्यक्ति को शांति नहीं मिल सकती, अकेले भोजन से व्यक्ति किसी की भूख को तृप्त नहीं कर सकता, शुद्ध होने के लिए परमात्मा के प्रेम का पालन करना चाहिए। वहीं दूसरे श्लोक में कहा गया है कि भगवान की आज्ञा से जीवन में उतार-चढ़ाव होता है, वही है जो दुख और सुख का कारण बनते हैं, उनकी आज्ञा से ही पुनर्जन्म से मुक्ति मिलती है, और उनके आदेश से ही कर्म से पुनर्जन्म के सतत चक्र में एक व्यक्ति रहता है।

चौथे श्लोक में कहा गया है कि एक व्यक्ति को उसके पिछले जन्म के अच्छे कर्मों के साथ और भगवान की कृपा से ही मुक्ति का द्वार मिलता है; साथ ही पाँचवे श्लोक में बताया गया है कि उसके पास अनंत गुण हैं, इसलिए हर किसी को उनका नाम गाना, सुनना और उनके प्रति प्रेम भाव रखना चाहिए। गुरु का शब्द वेदों की रक्षा करने वाली ध्वनि और ज्ञान है, गुरु शिव, विष्णु और ब्रह्मा हैं और गुरु मां पार्वती और लक्ष्मी हैं। सभी जीवित प्राणी उसी में निवास करते हैं। श्लोक 6 से 15 शब्द सुनने और विश्वास रखने के मूल्य का वर्णन करते हैं, क्योंकि यह वह विश्वास है जो मुक्ति दिलाता है। श्लोक 16 से 19 तक लिखा गया है कि ईश्वर निराकार और अवर्णनीय है।

श्लोक 21 से 27 तक कहा गया है कि प्रकृति और भगवान के नाम का सम्मान करना चाहिए, साथ ही यह उल्लेख किया गया है कि मनुष्य का जीवन एक नदी की तरह है जो समुद्र की विशालता को नहीं जानता है। हम योगी बोलते हैं, शिव बोलते हैं, मौन ऋषि बोलते हैं, बुद्ध बोलते हैं, कृष्ण बोलते हैं, विनम्र सेवादार बोलते हैं, फिर भी कोई उन्हें दुनिया के सभी शब्दों के साथ पूरी तरह से वर्णन नहीं कर सकता हैं। श्लोक 30 में कहा गया है कि वह सब देखता है, लेकिन कोई भी उसे नहीं देख सकता है। और श्लोक 31 में बताया गया है कि ईश्वर आदिम, शुद्ध प्रकाश, शुरुआत के बिना, अंत के बिना, कभी न बदलने वाला स्थिरांक है।

संदर्भ :-
1.
https://www.artofliving.org/wisdom/wssst/message-on-guru-nanak-birthday
2. https://en.wikipedia.org/wiki/Japji_Sahib
3. https://bit.ly/32u3IGs



RECENT POST

  • क्या 21वीं सदी का शहरीकरण है नियंत्रण से बाहर?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     28-01-2020 12:00 AM


  • आयुर्वेद में भी मिलता है गम्हड़ के गुणों का वर्णन
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     27-01-2020 10:00 AM


  • कहाँ से आया है, रिपब्लिक (Republic, गणतंत्र) शब्द और क्या है इसका अर्थ?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     26-01-2020 10:00 AM


  • जीवन के हर पहलू से जुड़ा है पाई
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     25-01-2020 10:00 AM


  • मानव जीवन में एर्गोनॉमिक्स (Ergonomics) का महत्व
    घर- आन्तरिक साज सज्जा, कुर्सियाँ तथा दरियाँ

     24-01-2020 10:00 AM


  • कैसा है, समुद्र की गहराइयों में रहने वाले जीवों का जीवन?
    निवास स्थान

     23-01-2020 10:00 AM


  • वर्णक के रूप में उपयोग किया जाता है गेरू
    खनिज

     22-01-2020 10:00 AM


  • आलमगीरपुर गाँव से मिले सिंधु सभ्यता से जुड़े साक्ष्य
    सभ्यताः 10000 ईसापूर्व से 2000 ईसापूर्व

     21-01-2020 10:00 AM


  • हमारे देश के मौन रक्षकों के लिए खुला है, मेरठ में पुनर्वास केंद्र
    स्तनधारी

     20-01-2020 10:00 AM


  • क्या है, अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा में इतालवी (Italian) सिनेमा का योगदान?
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     19-01-2020 10:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.