कैसे एक शादी ने बनाया सरधना के डायस सोम्ब्रे को राजा से रंक?

मेरठ

 01-08-2019 10:07 AM
मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

विश्‍व के इतिहास में कई ऐसे व्‍यक्ति हुए हैं जिन्‍होंने अपनी सकारात्‍मक या नकारात्‍मक गतिविधियों के माध्‍यम से एक विशेष भूमिका निभाई है। किंतु इनके किरदार को आज विश्‍व द्वारा भुला दिया गया है। ऐसे ही व्‍यक्तियों में से एक थे, डेविड ओक्टर्लोनी डायस सोम्ब्रे। इनका जन्‍म 1808 में दिल्ली के पास सरधना राज्य में हुआ था। सोम्ब्रे फ्रांसिसी, जर्मन, स्कॉटिश और भारतीय वंश के मिश्रित एंग्लो-इंडियन (Anglo-Indian) थे। सोम्ब्रे असल में वाल्टर रेनहार्ड सोम्ब्रे (1725 - 1778) के पर-पोते थे, जो कि एक भाड़े के सैनिक थे। वाल्टर की दोनों पत्नियाँ (बड़ी बीबी और बेगम सुमरू) भारतीय मुस्लिम महिलाएँ थीं। बेगम सुमरू एक कश्मीरी मुस्लिम थीं, जिन्‍होंने 1781 में कैथोलिक (Catholic) धर्म स्‍वीकार कर लिया।

वाल्‍टर ने अपनी संपत्ति का कुछ हिस्‍सा जागीर के रूप में बेगम सुमरू को दे दिया। बेगम सुमरू ने गिरजाघरों और महलों का निर्माण कराया तथा अपने नियंत्रण क्षेत्र पर शासन करने हेतु एक निजी सेना खड़ी की। इन्‍होंने अपने दरबार में प्रचलित इस्‍लाम धर्म को कैथोलिक धर्म में परिवर्तित करवा दिया तथा उत्तरी भारत में सबसे बड़े गिरजाघर का निर्माण शुरू करवाया। इन्होंने अपने उत्‍तराधिकारी के रूप में डेविड ओक्टर्लोनी डायस को चुना। डायस ने सुमरू के नाम पर ही अपने नाम के आगे सोम्‍ब्रे जोड़ा। सोम्‍ब्रे कम उम्र में ही दिल्ली के पास एक छोटे से राज्य सरधना के शासक बन गए थे। डायस वास्‍तव में वाल्टर की पहली पत्‍नी बड़ी बीबी के बेटे का पोता था। डायस ने भारत में एक वैभवशाली जीवन गुज़ारा। डेविड ने विभिन्‍न भाषाओं फ़ारसी, उर्दू, अंग्रेज़ी, लैटिन, इतालवी का ज्ञान प्राप्‍त किया। 1836 में बेगम की मृत्यु हो गयी, तथा ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) ने डायस सोम्ब्रे को वैध उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता देने से इंकार कर दिया और उनकी सरधना की संपत्ति को ज़ब्‍त कर लिया, जिसके बाद वे इंग्‍लैण्‍ड चले गए।

यह एशिया से पहले एंग्लो-इंडियन थे जिन्‍हें ब्रिटिश संसद के लिए चुने जाने वाले व्‍यक्तियों की सूची में शामिल किया गया था, किंतु भ्रष्‍टाचार के आरोप के कारण इनका चुनाव रद्द कर दिया गया। इनका विवाह ब्रिटेन के विस्‍काउंट (Viscount) की बेटी से हुआ था। इस शादी का प्रमुख उद्देश्‍य डायस की संपत्ति को हड़पना था। डायस के चुनावी दौड़ से बाहर होते ही उनकी शादी टूट गयी तथा उनकी पत्‍नी के परिवार वालों ने इन्‍हें पागल घोषित कर, इनकी संपूर्ण संपत्ति को हड़प लिया। सोम्‍ब्रे ने अपनी संपत्ति वापस पाने के लिए आठ वर्षों तक संघर्ष किया, जिसमें इन्‍हें अनेक प्रताड़नाओं का सामना करना पड़ा। डायस ने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए फ्रांसिसी और यूरोपीय डॉक्टरों से सबूत इकट्ठा किए; उन्होंने चांसरी कोर्ट (Chancery Court) में कम से कम छह मुक़दमे लड़े लेकिन इन सभी का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। अंततः लंदन के एक सस्‍ते से होटल में इनकी मृत्‍यु हो गयी। इनकी मृत्यु के समय भी इन्हें ‘पागल’ माना गया तथा ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ इनकी कानूनी लड़ाई जारी रही।

इनकी संपत्ति के मामले को सुलझाने में कई दशक लग गए, अंततः इनकी अधिकांश संपत्ति उनके बहनोई के पास चली गयी। डायस सोम्ब्रे को केंसाल राइज़ (Kensal Rise) कब्रिस्तान में दफनाया गया था, हालांकि उन्होंने अनुरोध किया था कि उन्हें दफनाने के लिए सरधना में ले जाया जाए। किंतु इनकी यह ख्‍वाहिश भी अधुरी ही रह गयी।

संदर्भ:
1.https://en।wikipedia।org/wiki/David_Ochterlony_Dyce_Sombre
2.https://www।theguardian।com/books/2010/aug/01/inordinately-strange-life-dyce-sombre-review
3.https://networks।h-net।org/node/22055/reviews/22209/basu-fisher-inordinately-strange-life-dyce-sombre-victorian-anglo



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