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क्यों बसानी पड़ेगी हमें एक और पृथ्वी?

मेरठ

 18-07-2019 12:13 PM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

पृथ्वी हमारे सौर मंडल के सबसे महत्वपूर्ण ग्रहों में से एक है और इस ग्रह को यदि कुछ महत्वपूर्ण बनाता है तो वह है जीवन। पृथ्वी के अलावा इस सौरमंडल में अन्य कई ग्रह और उपग्रह उपस्थित हैं और इनमें लाखों तारे भी निवास करते हैं। वर्तमान परिपेक्ष्य में बात की जाए तो पृथ्वी आज एक बड़े संकट से गुज़र रही है और उस संकट का नाम है जनसँख्या वृद्धि। जिस प्रकार से जनसँख्या का विस्फोट इस ग्रह पर हुआ है, यहाँ पर स्थित संसाधनों का दोहन बड़े पैमाने पर हो रहा है जिससे यहाँ पर स्थित प्राकृतिक सम्पदाएँ ख़त्म होने की कगार पर हैं। ऐसी स्थिति में पृथ्वी पर पायी जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण जीवन रेखा जल, भूगर्भीय जल आदि भी ख़त्म होने की कगार पर पहुँच गए हैं।

दुनिया भर के तमाम वैज्ञानिक पृथ्वी के अलावा अन्य और भी ग्रहों पर जीवन की तलाश कर रहे हैं जिनमें नासा (NASA), इसरो (ISRO) आदि हैं। ये अंतरिक्ष केंद्र दूसरे ग्रहों पर उपग्रह आदि भेज कर वहां के वातावरण का अध्ययन करते हैं और साथ ही साथ यह जानने की कोशिश करते हैं कि उक्त ग्रह पर जल कितना उपलब्ध है या जल उपलब्ध है भी या नहीं। अभी हाल ही में भारत ने भी मंगलयान को मंगल की कक्षा में प्रविष्ट किया।

हमारे इस तारामंडल में स्थित मंगल एक ऐसा ग्रह है जो कि अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण है और दुनिया भर के वैज्ञानिक इसकी तरफ खिंचे हुए हैं। यह ग्रह कई ऐसे आसार दिखा चुका है जो कि मंगल पर जल होने की आशंका को जागृत करते हैं।
मंगल को निम्नलिखित तथ्यों के अनुसार इतनी तवज्जो दी जाती है-
इसकी मिट्टी में पानी के कणों का पाया जाना।
यह न ही अत्यंत गर्म है और न ही अत्यंत ठंडा।
यहाँ पर सौर उर्जा का प्रयोग करने के लिए बराबर मात्रा में सूर्य की किरणें उपलब्ध हैं।
मंगल ग्रह पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का 38 प्रतिशत है जो कि माना जाता है कि यह अधिकाँश लोगों द्वारा अविभूत कर लिया जा सकता है।
इस ग्रह के चारों ओर एक वातावरण की पतली परत है जो कि सूर्य से निकलने वाली विकिरणों को अपने में समाहित कर सकती है।
यहाँ पर रात और दिन पृथ्वी के समान हैं जो कि 24 घंटे, 39 मिनट और 35 सेकण्ड है।

उपरोक्त दी गयी खूबियों के कारण ही मंगल ग्रह को इतना ख़ास माना जाता है। जिस प्रकार से पृथ्वी की स्थिति बद से बदतर हो रही है उस स्थिति में पृथ्वी के अलावा एक और विकल्प की तलाश अत्यंत ही आवश्यक है।

विगत कई वर्षों से भारतीय फिल्म (Films) ही नहीं बल्कि अंग्रेज़ी आदि फिल्मों में भी मंगल ग्रह को दिखाया जा रहा है। अंग्रेज़ी भाषा की फिल्मों में मार्शियन (Martian), लाइफ (Life), स्पीशीज (Species) आदि हैं। वहीं हिंदी फिल्म में शाहरुख़ खान की ‘ज़ीरो’ (Zero) फिल्म है। ज़ीरो फिल्म और मेरठ का एक अनुपम रिश्ता है। इसका मुख्य कलाकार बौआ सिंह (शाहरुख़ खान) मेरठ शहर का रहने वाला होता है जो अपने छोटे कद काठी की वजह से मंगल ग्रह पर भेजा जाता है। हालाँकि यह मात्र एक फिल्म है परन्तु यह विषय सोचनीय है कि क्या इस तारामंडल में एक और पृथ्वी बसाई जा सकती है?

संदर्भ:
1. https://bit.ly/2LXfch6
2. https://bit.ly/2DxNIKt
3. https://www.space.com/40641-does-humanity-need-backup-earth.html
चित्र सन्दर्भ:-
1.
https://cdn.pixabay.com/photo/2017/08/17/11/50/mars-2651003_960_720.png



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