सर्दियों के लिये प्रभावी उपकरण बन गया है गीज़र

मेरठ

 05-07-2019 11:41 AM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

सर्दियों में जैसे-जैसे पारा गिरता है और सूरज धुंध और कोहरे के पीछे छिपता जाता है, वैसे-वैसे ठंडे पानी से नहाना मुश्किल होता जाता है। यद्यपि ठंडा पानी त्वचा के लिए उत्कृष्ट होता है, पर ठण्ड के दिनों में ये हानिकारक भी हो सकता है। आधुनिक युग में हमें गर्म जल के लिये गर्म जल स्रोतों की खोज में जाने की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि गीज़र (Geyser) या वाटर हीटर (Water heater) के आविष्कार के बाद केवल एक स्विच (Switch) दबाकर ही गरम पानी का आनंद लिया जा रहा है।

गीज़र शब्द आइसलैंड के शब्द ‘गीसा’ (geysa) से लिया गया है जिसका अर्थ है तेज़ धार में बहना। असल में गीज़र का अर्थ होता है गर्म पानी का प्राकृतिक स्रोत। यह प्रकृति के किसी अद्भुत चमत्कार से कम नहीं क्योंकि इसने ठंडे स्थानों में मानव के अस्तित्व को बनाये रखा। प्राकृतिक गीज़र एक ऐसा जल स्रोत है जिसमें भाप के साथ गरम पानी ज़मीन की सतह से प्रस्फुटित होता है। ऐसा कुछ विशेष जल विज्ञान स्थितियों के कारण होता है जो पृथ्वी पर केवल कुछ ही स्थानों पर पाई जाती हैं। अधिकांश प्राकृतिक गीज़र क्षेत्र सक्रिय ज्वालामुखी क्षेत्रों के पास पाए जाते हैं।

ये प्राकृतिक गीज़र हर जगह उपलब्ध नहीं होते थे और इसलिये शुरूआत में गर्म पानी के लिये आग का इस्तेमाल किया गया। किंतु बदलती दुनिया ने एक ऐसे आविष्कार की मांग की जो पानी को बिना आग के ही गर्म कर दे। और इस प्रकार मानव निर्मित गीज़र या वाटर हीटर का आविष्कार किया गया। मानव निर्मित वॉटर हीटर का आविष्कार पहली बार रोमन सभ्यता में देखा गया था। आधुनिक काल में वॉटर हीटर जैसे उपकरण का आविष्कार एक बेंजामिन वैडी मौगन ने 1868 में किया। तकनीकी रूप से, इसमें पानी को गरम नहीं किया जाता था बल्कि पानी जिन नलकियों के पास होता था उनको गरम किया जाता था। मौगन ने अपने इस आविष्कार का नाम गीज़र रखा।

इसके इक्कीस साल बाद 1889 में, नॉर्वे के मैकेनिकल इंजीनियर (Mechanical Engineer) एडविन रूड ने आधुनिक विद्युतीय वॉटर हीटर का निर्माण किया। उन्होंने गीज़र-शैली के हीटर में सुधार किया और थर्मोस्टेटिक (Thermostatic) रूप से नियंत्रित हीटरों के साथ एक टैंक (Tank) विकसित किया जिसमें स्वचालित रूप से गर्म पानी उपलब्ध रहता था। रुड के डिज़ाइन में पानी को एक बड़े टैंक में संग्रहित किया जाता था और इसमें पानी को गर्म करने के लिए एक ऊष्मा स्रोत भी था। रुड ने इस तकनीक को 1898 में पेटेंट (Patent) करा लिया। रुड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (Ruud Manufacturing Company) ने वाणिज्यिक और आवासीय दोनों ही क्षेत्रों में इसे खूब फैलाया। ये कंपनी अभी भी काम कर रही है और वॉटर हीटर बनाती और बेचती है।

वॉटर हीटर को निम्नलिखित रूप से वर्गीकृत किया जा सकता है:
भंडारण जल हीटर:
बचपन में हम सभी ने इस तरह के एक भट्टी के साथ सफेद टैंक वाले वाटर हीटर देखे होंगे। ये हीटर विभिन्न ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल करते हैं जैसे‌-गैस (Gas), तेल और बिजली। विभिन्न प्रकार के बर्नर (Burner) की ऊर्जा क्षमता काफी भिन्न होती है। इसमें टैंक को ठंडे पानी से भरा जाता है और फिर गर्म करने के लिए ऊपर और नीचे दोनों तरफ एक तापीय तत्व का उपयोग किया जाता है। पानी को गर्म रखने के लिए अंदर की टंकी और बाहरी आवरण के बीच एक इंसुलेशन (Insulation) परत होती है। इस तकनीक से पानी गर्म होने में थोड़ा समय लगता है।

तात्कालिक जल हीटर:
तात्कालिक जल हीटर को टैंक-लैस (Tankless) या इन-लाइन (In-line) हीटर भी कहा जाता है। यह ज़रूरत के आधार पर केवल उपयोग किये जा रहे पानी को गर्म करता है। ये हीटर तेज़ी से लोकप्रिय होते जा रहे हैं। इससे पानी के साथ-साथ ऊर्जा और जगह भी बचती है, परन्तु इन हीटरों में आसानी से उपलब्ध गर्म पानी का दुरुपयोग भी संभव है, जो कि भंडारण जल हीटर में संभव नहीं है।

सौर जल हीटर:
जिन स्थानों पर वर्ष भर धूप रहती है, वहां सौर ऊर्जा संचालित वॉटर हीटर एक अच्छा विकल्प है। सौर संग्रहक को भवन के बाहरी हिस्से में छत पर या आस-पास स्थापित किया जाता है। इन हीटरों में एक स्वचालित संवेदक होता है जो कम धूप में या रात के समय शेष पानी को ठंडा होने से बचाता है। यह प्रणाली बिजली की आपूर्ति से जुड़ी नहीं होती है, इसलिए इसमें चालू-बंद स्विच की ज़रूरत भी नहीं होती। यह पानी को गर्म करने और भंडारण टैंक में संचित करने के लिए मात्र दिनभर की सूरज की रोशनी का ही उपयोग करता है और उसको आगे ज़रुरत के अनुसार किसी भी कार्य के लिए इस्तेमाल करता रहता है।

एक समय में वॉटर हीटर को विलास साधन का प्रतीक माना जाता था, परन्तु अब यह दृश्टिकोण बदल रहा है। आज वॉटर हीटर उद्योग की बड़ी कंपनियों ने दूरदराज़ के शहरों में भी खुदरा दुकानों और सेवा केंद्रों की स्थापना करके भारतीय बाज़ारों में गहरी पैठ बना ली है। वर्तमान में वॉटर हीटर का बाजार लगभग 1,500 करोड़ रुपये का है और पिछले कुछ वर्षों से इसमें तेज़ वृद्धि देखी जा रही है। निर्माता भी सौर हीटर, पंप हीटर (Pump Heater), गैस हीटर आदि के रूप में विभिन्न कुशल विकल्प बाज़ार में ला रहे हैं।

वॉटर हीटर में निवेश अवश्य करें किंतु जैसे ही पानी गर्म हो, अपने गीज़र का स्विच ऑफ कर दें और जहाँ तक सम्भव हो सके बालटी के गर्म पानी का ही उपयोग करें क्योंकि ऐसा करने से यह पानी के साथ-साथ ऊर्जा का भी संरक्षण करेगा।

संदर्भ:
1. https://en.wikipedia.org/wiki/Geyser
2. https://bit.ly/2Jq5gts
3. https://ezinearticles.com/?Who-Invented-the-Electric-Water-Heater?&id=1765082
4. https://www.quora.com/How-was-the-hot-water-heater-invented
चित्र सन्दर्भ:-
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/History_of_radio#/media/File:Post_Office_Engineers.jpg
2. https://www.pexels.com/photo/freestyler-black-radio-stereo-221573/



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