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भारत में तीव्रता से बढ़ता सहआवास (Co-Living)

मेरठ

 24-05-2019 10:30 AM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

आज लोग बेहतर जीवन, उच्‍च शिक्षा और अच्‍छे रोजगार की तलाश में छोटे शहरों, गांव, कस्‍बों से बड़े शहरों की ओर रूख कर रहे हैं। किंतु शहरों में जगह तो सिमित है,लेकिन आबादी आए दिन बढ़ती जा रही है। जिस कारण आवास की समस्‍या उत्‍पन्‍न हो रही है, इसके निवारण के लिए आज बड़े-बड़े शहरों में कोलिविंग (Co-Living) या सहआवास का प्रचलन प्रारंभ हो गया है। यह एक पुरानी परंपरा का नया स्‍वरूप है, सदियों पहले लोग खुले वातावरण में सामूहिक रूप से रहना पसंद करते थे, जो सामुदायिकता, सहयोग, साझाअर्थव्यवस्था को विशेष महत्‍व देते थे। सहआवास इसी प्रकार की एक व्‍यवस्‍था है।

1933 और 1934 के बीच उत्तरी लंदन में कुछ समय के लिए, साझा रूप से रहने वाली जगह को 'आइसोकॉन' (Isokon) नाम से डिजाइन किया गया। इसमें समान सुविधाएं प्रदान की गयी, जैसे साझा सार्वनजिक स्थान, कार्य क्षेत्र, और कपड़े धोने का स्‍थान आदि। धीरे-धीरे यह परंपरा अन्‍य देशों में भी प्रचलित होने लगी, आज पाश्‍चात्‍य देशों में इसका काफी प्रचलन है, विशेषकर अमेरिका और ब्रिटेन में।

सहआवास वास्‍तव में एक ऐसा स्‍थान है, जहां भिन्‍न-भिन्‍न स्‍थानों से आए लोग एक साथ सामुदायिक रूप से रहते हैं। ये मुख्‍यतः रोजगार की तलाश में शहर आए लोग या छोटे उद्यमी, विद्यार्थी और घुमन्‍तु लोग होते हैं। सहआवास इमारत(ओं) में होता है, जहां लोग रसोई, भोजन कक्ष, अतिथि कक्ष, शयन कक्ष इत्‍यादि जैसे व्‍यक्तिगत स्‍थानों को एक दुसरे से साझा करके रहते हैं। सहआवास में रहने वाले लोग आवासीय प्रबंधन संबंधी सभी निर्णय सामूहिक रूप से लेते हैं। सहआवास अब एक व्‍यवसाय के रूप में लिया जा रहा है, जिसमें आप निम्‍न प्रकार की सुविधाओं को जोड़कर अपने सहआवासन के व्‍यवसाय को बेहतर बना सकते हैं:
1. आमतौर से सहआवास वाले घर बड़े और सुसज्जित होने चाहिए, क्‍योंकि इसमें व्‍यक्तिगत सुविधाओं के स्‍थान पर सार्वजनिक सुविधाओं को ज्‍यादा महत्‍व दिया जाता है।
2. सुव्‍यवस्थित भोजन की सुविधा प्रदान की जानी चाहिए।
3.समय समय पर विभिन्‍न स्‍थानों जैसे अभयारण्य, ऐतिहासिक स्‍थल, धार्मिक स्‍थल इत्‍यादि में भ्रमण कराने की सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए।
4. साझेदारों के मध्‍य संबंध बढ़ाने के लिए विभिन्‍न प्रकार के सामूहिक कार्यक्रम, खेल, टीम निर्माण, कौशल कार्यशालाएं इत्‍यादि का आयोजन कराया जाना चाहिए।
5. सामाजिक गतिविधियाँ और विश्राम स्थान जैसे योगकक्षाएं, स्पा (Spa), गेमकक्ष आदि सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए।

भारत में कोलिविंग मुख्‍यतः बेंगलुरु, मुंबई, गुरुग्राम और पुणे जैसे शहरों में लोकप्रिय हो रही है, जयपुर और लखनऊ जैसे टियर-2वाले शहरों में भी इसकी मांग बढ़ रही है।युवा पेशेवरों के लिए आज मुख्य चिंता का विषय सही आवास ढूंढना है। उनके लिए, सह-आवास एक आदर्श समाधान है: पारंपरिक पेइंगगेस्ट सुविधाएं भी उपलब्‍ध हैं, साथ ही हॉस्‍टल के समान प्रतिबंधात्मक वातावरण नहीं है। 20-30 वर्ष के मध्‍य के पेशेवर और विद्यार्थी इसे एक विकल्‍प के रूप में चुनने का विचार कर रहे हैं।

कोलिविंग में रहने के फायदे
1. भिन्‍न भिन्‍न लोगों के साथ नए नए विचार, व्यापारिक साझेदारी, विभिन्न योजनाओं और लक्ष्यों को साझा करने की प्रेरणा मिलती है।
2.सहआवास में आपको एक सामुदायिक समर्थन प्राप्‍त होता है, यहां आप अपने समान विचाराधारा वाले लोगों से अपने दुख दर्द बांट सकते हैं। जो आपको मानसिक रूप से तनाव को कम करने में सहायक होगा।
3.बुनियादी आवश्‍यकताओं और अन्‍य कई सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है, जिससे आप अपना कार्य पूरा करने में ध्यान केंद्रित कर सकें।
4. अंजान शहर में अकेले रहने वाले लोगों के लिए सहआवास सुरक्षा की दृष्टि से लाभदायक है।
कोलिविंग में रहने की कुछ समस्याएं
1. खराब इंटरनेट कनेक्शन का जोखिम।
2. अपेक्षा और वास्तविकता में असंतुलन।
3. समय की पाबं‍दी।
4. निजता का हनन।

भारत में साझा आवास का व्‍यवसाय तीव्रता से बढ़ रहा है। संस्थागत निवेशकों और उद्यम पूंजी फर्मों ने देश के लिए अपना रास्ता खोज लिया है, उद्धमी गोल्डमैन (Goldman Sachs) और वारबर्ग पिंकस ( Warburg Pincus) के साथ इस क्षेत्र में निवेश करना पसंद कर रहे हैं। वारबर्ग ने लेमनट्री (Lemon Tree Hotels) के साथ एक संयुक्त उद्यम स्थापित किया है और यह छात्रों और युवा कामकाजी पेशेवरों के लिए पूर्ण-सेवा आवास विकसित करने हेतु 3,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। अगस्त 2018 में, HDFC ने गुड होस्ट स्पेस प्राइवेट लिमिटेड (Good Host Space Private Limited (Goldman Sachs Subsidiary)) के साथ 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी खरीदी, जो 69.5 करोड़ रुपये में ब्रांड नाम न्यू डोर (New Door) (कंपनी का पुराना नाम योहो था) के तहत छात्र आवास की सुविधा प्रदान करता है।

हम सभी जानते हैं सभ्‍यता की शुरूआत में मानव सामुदायिक रूप में रहता था तथा अपने दुख-सुख समान रूप से साझा करता था, किंतु धीरे-धीरे सभ्‍यताओं का विकास हुआ और मानव स्‍वकेंद्रित होता चला गया तथा उससे सामुदायिकता की भावना कहीं खोने लगी। कोलिविंग इस भावना को पुनः जागृत करने का एक अच्‍छा कदम कहा जा सहता है।

संदर्भ:
1. https://en.wikipedia.org/wiki/Coliving
2. http://opendoor.io/so-what-exactly-is-coliving/
3. https://bit.ly/2KGeWE7
4. https://remoters.net/colivings-concept-types-services/
5. https://bit.ly/2JySifn
6. https://www.dnaindia.com/personal-finance/report-should-you-rent-or-co-live-2694955



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