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मेरठ में आवारा कुत्तों(street dogs) से होने वाली परेशानियों का समाधान

मेरठ

 26-04-2019 07:00 AM
व्यवहारिक

स्ट्रीट डॉग्स(Street Dogs), जिन्हें वैज्ञानिक साहित्य में फ्री-रेंज शहरी कुत्तों( free-ranging urban dogs) के नाम से जाना जाता है , वह प्रजाति जो शहरों में रहती है । यह लगभग हर जगह पाए जातें है खासकर स्थानीय मानव आबादी के बीच विशेष रूप से जहां शहर मौजूद हो। स्ट्रीट डॉग्स में आवारा प्योर- ब्रीड (pure-breed), सच्चे मिश्रित नस्ल के कुत्ते या देसी नस्ल के कुत्ते पाए जाते है ।स्ट्रीट डॉग्स की बढ़ती हुई आबादी से समाज में कई समस्याएं पैदा होती है जिन्हे काबू करने के लिए कई अभियान चलाये जाते है । वे अपने कौशल , समाजीकरण और पारिस्थितिक प्रभावों में ग्रामीण मुक्त-कुत्तों से भिन्न होते हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O) के अनुसार, हर साल दुनिया भर में होने वाली कुल रेबीज मौतों का 36 प्रतिशत हिस्सा भारत में है। बंदर या चमगादड़ जैसे जीवों द्वारा किसी भी प्रकार की खरोंच मारे जाने पर या काटे जाने पर व्यक्ति में केवल कुछ बिमारियों का विकास होता है, और रेबीज़ का प्रमुख कारण कुत्ते ही होते हैं। वार्षिक रूप से, 55,000 - 60,000 लोग रेबीज से मरते हैं जिसमे भारत में मरने वालो की संख्या , 20,000 के लगभग हैं जो की एक तिहाई हैं ।

यदि मेरठ की बात की जाये ,तो स्वास्थ्य अधिकारियों तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी (C.M.O) राजकुमार की रिपोर्ट के अनुसार , हर हफ्ते औसतन 500 लोग आवारा कुत्तों के हमलो से घायल होते है। जिसकी वजह से सही समय पर एंटी रैबीज के टीके की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर आ जाता है ,और लोगो को सही समय पर सही इलाज मिलना मुमकिन नहीं हो पाता। नगर निगम द्वारा चलाई गयी योजनाओ में कमी के कारण , शहर के हर कोने में आवारा कुत्तों की आबादी बढ़ रही है। न्यायालय के आदेशों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए जिसे देखते हुए न्यायधीश द्वारा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन(municipal corporation), वाराणसी तथा मेरठ में14 जनवरी को यह आदेश लागु किया गया की एक योजना के तहत 5 फरवरी तक सड़को से सभी आवारा कुत्तो को हटाया जाये तथा उनके पुनर्वास के लिए आश्रय का प्रबंध किया जाये ।परन्तु इस सब के बावजूद भी कुत्ते शहर में खतरा बन रहे है जिसका बार-बार प्रयास करने के बाद भी मेरठ नगर निगम द्वारा कोई ठोस उपाय नहीं निकल पा रहा है।

मेरठ के अलावा और अन्य शहरों की बात करे तो यह स्तिथि चंडीगढ़ तथा बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में भी देखने को मिलती है, जहा आये दिन कुत्तो द्वारा किये गए हमलो से लोग घायल होते है। चंडीगढ़ के नगर निगम की 2012 सेन्सस रिपोर्ट (Census Report) के अनुसार इस शहर में 7847 आवारा कुत्ते तथा 9824 पालतू कुत्तो की आबादी है जो पिछले कुछ वर्षो में बढ़कर 13000 से 14000 हो चुकी है। हालांकि कर्नाटक सरकार के पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवा विभाग द्वारा , हर पांच साल में एक जनगणना होनी चाहिए परन्तु , 2012 के बाद से कोई जनगणना नहीं की गई है। वही पशुपालन और पशु चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ महेश्वर गौड़ा का कहना है कि आवारा कुत्तो की आबादी में वृद्धि का बड़ा कारण अनुचित ठोस प्रबंधन है। "उन क्षेत्रों में कुत्तों का प्रसार होता है जहां कोई ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नहीं होता । प्रिशियस पास फाउंडेशन (Precious Paws Foundation) से देवद्रित जाधव का कहना है कि पालतू कुत्तों का परित्याग भी एक प्रमुख मुद्दा है। कई लोगो को पालतू जानवर की जिम्मेदारी का एहसास नहीं होता है, जिससे वे दो दिनों से एक सप्ताह के अन्दर कुत्तों को छोड़ देते हैं।

इंदौर में कुत्तों के काटने के 2,000 से अधिक मामले हर महीने सामने आते हैं, हालांकि इंदौर नगर निगम और कई गैर सरकारी संगठन , शहर में आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए काम कर रहे हैं। शहर में 80,000 से अधिक आवारा कुत्ते हैं जिनकी नसबंदी एक चुनौती है क्योंकि इसके लिए उचित योजना और जनशक्ति की आवश्यकता होती है।

द एनिमल बर्थ कंट्रोल (डॉग्स) रूल्स(The animal birth control (dogs) rules), 2001
सभी कुत्तों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है : पालतू कुत्ते और स्ट्रीट डॉग।

• पालतू कुत्तों का मालिक नियंत्रित प्रजनन, टीकाकरण, बंध्याकरण और लाइसेंसिंग के नियमों के अनुसार जिम्मेदार होगा ।
• स्ट्रीट डॉग्स को पशु कल्याण संगठनों, व्यक्तियों और स्थानीय प्राधिकरण की मदद से निष्फल और प्रतिरक्षित किया जाएगा।
• निष्कासित कुत्तों को छोड़े जाने से पहले टीका लगाया जाएगा और इन कुत्तों के कानों को या तो क्लिप किया जाना चाहिए और पहचान के लिए / या टैटू (Tattoo) किया जाना चाहिए। उन्हें पहचान के लिए टोकन या नायलॉन कॉलर भी दिया जा सकता है जिससे विस्तृत रिकॉर्ड बनाए रखा जाए।
• योग्य पशुचिकित्सा द्वारा निदान किए जाने वाले गंभीर रूप से बीमार और घातक घायल कुत्तों को मानवीय तरीके से प्रतिध्वनित किया जाएगा।
• किसी भी कुत्ते को दूसरे कुत्ते की उपस्थिति में इच्छामृत्यु नहीं दी जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जानवर निपटान से पहले मर चुका हो ।एक ब्रीडर को भारत के पशु कल्याण बोर्ड के साथ पंजीकृत होना चाहिए और अलग-अलग कुतिया से जन्म / मृत्यु होने वाले पिल्ले की संख्या का पूरा रिकॉर्ड बनाए रखना चाहिए। उससे यह सुनिश्चित होगा कि खरीदार को पिल्ले के रखरखाव से सम्बंधित आवश्यक ज्ञान हो।

इंदौर नगर निगम(IMC) द्वारा उठाए गए कदम
• शहर में 80,000 आवारा कुत्तों की नसबंदी करने की योजना के साथ, IMC प्रति दिन 25 से 35 कुत्तों को बाँझ बनाने की योजना बना रहा है।
• IMC के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ उत्तम यादव का कहना है कि आईएमसी नसबंदी अभियान को आगे बढ़ाने के लिए अधिक डॉक्टरों को नियुक्त करने की योजना बना रहा है। स्टाफ सदस्यों को 8 से बढ़ाकर 25 किया जाएगा।
• भले ही प्रति दिन 200 कुत्तों को नसबंदी करने का एक महत्वाकांक्षी आंकड़ा लक्ष्य के रूप में निर्धारित किया गया हो,परन्तु IMC दिसंबर तक शहर के 80,000 कुत्तों की नसबंदी के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता , जैसा कि अगस्त की समीक्षा बैठक में IMC आयुक्त आशीष सिंह ने निर्देश दिया था।
• सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, शहर में चार साल पहले 25,000 कुत्ते थे।
• इंदौर नगर निगम के अनुसार दो और स्टरलाइज़(Sterilize) केंद्र बनाने की योजना है, जहा प्रतिदिन 120 कुत्तों की नसबंदी के लक्ष्य को पूरा किया जायेगा ।
• नगरपालिका में कुत्तो की नसबंदी के लिए 1 से 5 तक के ज़ोन को कवर किया जायेगा तथा जहाँ कुछ आबादी रह गयी है आईएमसी फिर से उन क्षेत्रों में प्रवेश करेगा ।

कुत्ते के काटने से कैसे निपटें?
• रक्तस्राव को रोकने के लिए चोट पर एक साफ तौलिया रखें।
• घायल जगह को ऊंचा रखें।
• काटने वाले स्थान को साबुन और पानी से धोएं।
• घाव के लिए एक साफ पट्टी लागू करें।
• संक्रमण से बचाव के लिए हर दिन एंटीबायोटिक मरहम लगाएं।
• एंटी रैबीज (Anti Rabies)और टेटनस का टीका (Tetanus vaccine) के लिए जल्द से जल्द अस्पताल जाएँ।

संदर्भ:-
1. https://en.wikipedia.org/wiki/Street_dog
2. https://bit.ly/2DzMEW3
3. https://bit.ly/2GrgpbT
4. https://bit.ly/2ZjVTCZ
5. https://bit.ly/2veYJv4

चित्र सन्दर्भ:-
1. https://in.pinterest.com/pin/392728030005433619/?lp=true



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