Machine Translator

कम्युनिस्ट आंदोलन को दर्शाता मेरठ षड्यंत्र केस

मेरठ

 09-03-2019 09:30 AM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

एक प्राचीन शहर होने के नाते मेरठ को पौराणिक और ऐतिहासिक दोनों रूप में पहचाना जाता है। वहीं मेरठ 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का प्रारंभिक बिंदु भी रहा है। मेरठ में वर्ष 1929-1933 में हुआ एक विवादास्पद मामला, जिसे ‘मेरठ षड्यंत्र केस' (Meerut Conspiracy Case) के नाम से जाना जाता है, काफी प्रसिद्ध है। यह इतना प्रसिद्ध हुआ की ग्रेट ब्रिटेन के लोगों का ध्यान भी इसकी ओर इतना आकर्षित हुआ की मैनचेस्टर स्ट्रीट थियेटर समूह, 'द रेड मेगफॉन्स' ने 1932 में इंग्लैंड में 'मेरठ' नामक एक नाटक को प्रस्तुत किया।

रूस में संचालित हो रहे कम्युनिस्ट इंटरनेशनल संगठन धीरे-धीरे विश्व के अन्य हिस्सों में भी फैलने लगा था। इसका मुख्य उद्देश्य वस्तु सशस्त्र विद्रोह और सामान्य हमलों का आयोजन करके विश्व के सभी देशों की मौजूदा सरकारों का पतन करना था। अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए इसने ट्रेड यूनियन, युवा संघ, श्रमिकों और किसानों के दलों आदि का निर्माण किया। इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ग्रेट ब्रिटेन की साम्यवादी पार्टी का भी गठन किया गया। वहीं 1921 में कुछ कम्युनिस्टों द्वारा ब्रिटिश भारत में इसकी शाखाओं की स्थापना की गयी थी।

कम्युनिस्ट इंटरनेशनल द्वारा भारत में दो ब्रिटिश, फिलिप स्प्रैट और बी.एफ. ब्रैडली को भेजा गया था ताकि वे अपने उद्देश्यों को पूरा कर सकें। उन्होंने कम्युनिस्ट के व्यक्तियों के साथ मिलकर एक कार्यकर्ता और किसान पार्टी का गठन किया और मेरठ में इसका सम्मेलन आयोजित किया। जब इस बारे में ब्रिटिशों को पता चला तो वे चिंतित हो गए और उन्होंने 3 ब्रिटिशों फिलिप स्प्रैट, बी.एफ. ब्रैडली और लेस्टर हचिंसन सहित कार्यकर्ता और किसान पार्टी के कुछ ट्रेड यूनियनों और अखिल भारतीय कांग्रेस से जुड़े व्यक्तियों पर छापा मारकर उन्हें गिरफ्तार किया। और 32 क्रांतिकारियों पर ऐतिहासिक मुकदमा प्रारंभ किया गया।

अभियुक्तियों को 1860 की भारतीय दंड संहिता की धारा 121-ए के तहत जाँच पर रखा गया और उन पर ब्रिटिश राज को हटाने की योजना तयार करने और कम्युनिस्ट इंटरनेशनल द्वारा उल्लिखित अभियान की योजनाओं का उपयोग करने का आरोप लगया गया था। जाँच की शुरुआत 15 मार्च, 1929 को डॉ. आर.ए. हॉर्टन द्वारा शिकायत दर्ज करके शुरू की गई थी। मेरठ में इस केस की मजिस्ट्रेट के सामने प्रारंभिक कार्यवाही को लगभग सात महीने लगे थे और बाद में केस को 4 जनवरी, 1930 को सत्र न्यायालय के लिए प्रतिबद्ध कर दिया। सबूतों को इकट्टा करने में अभियोजन पक्ष को पूरे तेरह महीने लगे थे।

17 जनवरी 1933 को, सत्र अदालत ने अभियुक्तियों को सजा सुनाई, जिसमें अदालत ने पांच अभियुक्तियों को बरी कर दिया, जिनमें से एक की मृत्यु हो गई, और 27 अन्य को कड़ी सजा सुनाई गई, वहीं एक को उम्र केद की सजा सुनाई गई। वहीं बाकी के अन्य अभियुक्तियों को 3 से 12 साल की सजा सुनाई गयी थी। इसके बाद अभियुक्तियों द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील दायर की गयी, जिसमें अंतिम अपील 17 जनवरी, 1933 को दायर की गई थी। सुनवाई की तारिख 10 अप्रैल, 1933 तय की गई, लेकिन गर्मियों की लंबी छुट्टी होने के कारण स्वयं अभियुक्तियों के अनुरोध पर सुनवाई 24 जुलाई, 1933 तक स्थगित कर दी गई। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सुलेमान और न्यायमूर्ति यंग के संचालन में शुरू हुई और यह आठ दिनों तक चली। मुख्य न्यायाधीश द्वारा सुनाए गए निर्णय में सभी को दोषी माना गया, लेकिन उनकी सजाओं को कम कर दिया गया।

भारत में कम्युनिस्ट के विचार को बढ़ने से रोकने के लिए इस केस को दर्ज किया गया था। इसमें आरोपियों को बोल्शेविक बताया गया और यद्यपि जाँच में लगभग सभी अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया था, लेकिन इसके परिणामस्वरूप भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन बहुत व्यापक रूप से फैला था। वहीं कम्युनिस्ट समर्थनों ने अदालत कक्ष को सार्वजनिक मंच में बदल दिया था। वहीं मेरठ षड्यंत्र केस एक मील का पत्थर है जो भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के इतिहास को समेटे हुए है।

संदर्भ :-
1. http://www.allahabadhighcourt.in/event/meerut_conspiracy_pmithal_28-07-14.pdf
2. https://bit.ly/2Tp03Kr
3. https://www.youtube.com/watch?v=lO8lrvxOOxo



RECENT POST

  • आज भी आवश्यकता है एक प्राचीन रोजगार “नालबंद” की
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     29-05-2020 10:20 AM


  • भारत के पश्तून/पठानों का इतिहास
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     28-05-2020 09:40 AM


  • ब्रह्मांड की उत्पत्ति, इसके विकास और अंतिम परिणाम की व्याख्या करता है धार्मिक ब्रह्मांड विज्ञान
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     27-05-2020 01:00 PM


  • भारतीय और एंग्लो इंडियन पाक कला
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     26-05-2020 09:45 AM


  • कहाँ से प्रारम्भ होता है, बाल काटने का इतिहास ?
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     25-05-2020 09:45 AM


  • क्या है, अतिचालकों का मीस्नर प्रभाव ?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     24-05-2020 10:50 AM


  • क्या हैं, दुनिया भर में ईद के विभिन्न रूप ?
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     23-05-2020 11:25 AM


  • कोविड-19 का है कृषि क्षेत्र पर जटिल प्रभाव
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     22-05-2020 10:05 AM


  • जीवन में धैर्य और निरंतरता का मूल्य सिखाता है बोनसाई का पौधा
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     21-05-2020 10:15 AM


  • इतिहास के झरोखे से : इंडिया पेल एल (India Pale Ale) (लोकप्रिय ब्रिटिश बियर)
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     20-05-2020 09:30 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.