उच्च रक्तचाप के लिये लाभकारी है योग

मेरठ

 19-02-2019 10:59 AM
य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में तनाव जीवन का हिस्सा बन गया है। ऐसे में तनाव से बचे रहना मुश्किल होता है। ऐसे माहौल में उच्च रक्तचाप की समस्या आम होती जा रही है। उच्च रक्तचाप 40 वर्ष से ऊपर की आयु के लोगों में आम है। इसके उपचार के लिए डॉक्टर अक्सर आपको ढ़ेर सारी दवाइयां पकड़ा देते हैं। लेकिन ज्यादा समय तक दवाओं के प्रयोग से इनके साइड इफेक्टस (Side Effects) भी देखने को मिलते हैं, इसलिए इसके उपचार के लिए योग का रास्ता अपनाएं। योग में कुछ ऐसे उपाय हैं, जिन्हें अपनाकर उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता हैं। उच्च रक्तचाप एक सामान्य स्थिति है जिसमें आपकी धमनी की दीवारों के खिलाफ रक्त प्रवाह द्वारा लगाए गए दबाव की मात्रा काफी अधिक होता है। जो अंततः स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं जैसे हृदय रोग का कारण बन सकता है। रक्तचाप हृदय द्वारा पंप (Pump) किये गये रक्त की मात्रा और धमनियों में रक्त प्रवाह में उत्पन्न अवरोध की मात्रा दोनों द्वारा निर्धारित किया जाता है। रक्तचाप को विभिन्न कारकों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। उच्च रक्तचाप न केवल रक्त वाहिकाओं और हृदय को नुकसान पहुंचाता है, ये व्यक्ति में कोरोनरी धमनी रोग का कारण भी बन सकता है; जिसमें यदि कोरोनरी धमनी पूरी तरह से ब्लॉक हो जाती है तो व्यक्ति को हार्ट अटैक आ सकता है।

इसके आलावा अनियंत्रित उच्च रक्तचाप से हाइपरटेंशन स्ट्रोक, धमनियों की धमनी विस्फार, जैसे रोग भी हो सकते है। उच्च रक्तचाप के कारण दो श्रेणियों में विभाजित हैं:
• प्राथमिक (आवश्यक) उच्च रक्तचाप- जहां उच्च रक्तचाप का कारण अनिश्चित है, यह कई वर्षों में धीरे-धीरे विकसित होता है।
• माध्यमिक उच्च रक्तचाप- जहां अंतर्निहित कारण के लिए उच्च रक्तचाप होता है।

रक्तचाप को सिस्टोलिक और डायस्टोलिक माप के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है। सिस्टोलिक माप धमनियों में उच्च दाब है, और डायस्टोलिक माप धमनियों में न्यूनतम दाब है। सामान्य रक्तचाप 120/80 से नीचे होने के रूप में परिभाषित किया गया है, जहां 120 सिस्टोलिक (अधिकतम) माप का प्रतिनिधित्व करता है और 80 डायस्टोलिक (न्यूनतम) माप का प्रतिनिधित्व करता है और 120/80 तथा 139/89 के बीच का रक्त का दबाव पूर्व उच्च रक्तचाप कहलाता है और 140/90 या उससे अधिक का रक्तचाप उच्च रक्तचाप समझा जाता है। अब आप ये तो जान ही गये होंगे की उच्च रक्त चाप क्या होता है, तो अब चलिये जानते हैं किस प्रकार योग से बढ़े हुए रक्त चाप को नियंत्रित किया जा सकता है।

वर्तमान में कई लोगों ने अपने जीवन शैली में सकारात्मक और प्रभावी बदलाव के रूप में योग को चुना है। शोध बताते है कि जो लोग योग का लगातार अभ्यास करते हैं उनमें हृदय स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण बदलावों को देखा जा सकता है। हालंकि योग उच्च रक्तचाप के लिये रामबाण इलाज नहीं है परंतु ये काफी हद तक उच्च रक्तचाप को नियंत्रित कर सकता है, और इसके दवाईयों की भांति दुष्प्रभाव भी नही होते है।

चिकित्सा के रूप में योग
हमारी आधुनिक संस्कृति में, योग को अक्सर शारीरिक व्यायाम के रूप देखा जाता है, किंतु योग के अंतर्गत श्वास अभ्यास, ध्यान, विश्राम, आहार, पोषण और अन्य कई कारक शामिल हैं। उच्च रक्तचाप के लिये रिस्टोरेटिव आसन (Restorative asana) सबसे अधिक फायदेमंद होते हैं, हालाँकि इसके फायदे तभी नजर आते है जब इसे लंबे समय तक किया जाये। इसके आलावा योग में आसन, प्राणायाम और विश्राम तकनीक उच्च रक्तचाप के लिये फायदेमंद होती है। 2004 में प्रकाशित यूरोपियन जर्नल ऑफ कार्डियोवस्कुलर प्रिवेंशन एंड रिहैबिलिटेशन (European Journal of Cardiovascular Prevention and Rehabilitation) के अनुसार, नियमित रूप से योग का अभ्यास करने वाले रोगियों में उच्च रक्तचाप की कमी देखी गई थी।

रेस्टोरेटिव योग से आप शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संतुष्टि और आराम प्राप्त कर सकते हैं। इस योगभ्यास से शरीर की शक्ति और लचीलेपन को हम बढ़ा सकते हैं। साथ ही यह योग पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र नियंत्रण को बढ़ाता है और रक्तचाप और द्रव संतुलन को नियंत्रित करता है।

विश्राम-स्थिति व तकनीक
शोध से पता चलता है की योग के विश्राम आसनों को करने से हृदय गति धीमी हो जाती है, उच्च रक्त चाप में कमी, तेज श्वसन में कमी, मांसपेशियों के तनाव में कमी, मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह बढ़ाना, नींद में वृद्धि, प्रतिरक्षा में वृद्धि, चिंता और दर्द प्रबंधन आदि लाभ प्राप्त होते हैं। योग निद्रा, एक शक्तिशाली विश्राम आसन है। इसे स्वप्न और जागरण के बीच ही स्थिति मान सकते हैं या कहें कि अर्धचेतना जैसा है।

प्राणायाम
प्राणायाम उच्च रक्त चाप को कम करने के लिये काफी फायदेमंद माना जाता है। यह तंत्रिका और अंतःस्रावी तंत्र को आराम देकर उच्च रक्त चाप को कम करता है। 2011 के एक शोध के अनुसार 15 दिनों के प्राणायाम अभ्यास से हृदय संबंधी कार्यों में लाभकारी प्रभाव उत्पन्न होते है। प्राणायाम से सिस्टोलिक दबाव में उल्लेखनीय कमी आती है। जिसका अर्थ है कि उच्च रक्त चाप कम हो जाता है।

ध्यान करने से भी उच्च रक्त चाप में कमी आती है
ध्यान करने से तंत्रिका तंत्र में कुछ परिवर्तनों उत्तेजित हो जाते है जिसमें हृदय प्रणाली तनाव मुक्त हो जाती है और बाद में यह उच्च रक्त चाप को कम कर देती है। वास्तव में, तनाव का स्तर अंतःस्रावी तंत्र के मास्टर ग्रंथि (जोकि हाइपोथैलेमस के नियंत्रण के अधीन होती) से हार्मोन का उत्पादन के द्वारा नियंत्रित होता है। ध्यान करने से सीधे तौर पर हाइपोथैलेमस पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है और तनाव से मुक्ति मिलती है। इसके अतिरिक्त ध्यान हाइपरटेंशन स्ट्रोक, धमनियों की धमनी विस्फार, धमनी रोग जैसी बीमारियों के लिए फायदेमंद है।

इसके आलावा श्वास लेने का अभ्यास जैसे की कपालभाति और भस्त्रिका भी हृदय प्रणाली और श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है। योग न केवल हृदय प्रणाली और उच्च रक्तचाप में लाभ पहुंचाता है बल्कि मनुष्य के संपूर्ण स्वास्थ्य और अंगों के लिये लाभकारी है। योग से स्वास्थ्य और दीर्घायु के बढ़ने के साथ साथ खुशी और प्रसन्नता का भी अहसास होता है।

संदर्भ:
1. https://goo.gl/B8mfmh
2. https://goo.gl/ojzyjw
3. https://goo.gl/qYNm1F



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