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सेवानिवृत्त लोगों के लिए सेवानिवृत्ति घर एक नया प्रचलन

मेरठ

 24-01-2019 01:21 PM
घर- आन्तरिक साज सज्जा, कुर्सियाँ तथा दरियाँ

भारत में अधिक से अधिक वरिष्ठ नागरिक सेवानिवृत्ति के बाद अपने बच्चों के साथ या अकेले रहने के बजाय सेवानिवृत्ति घर में रहना पसंद कर रहे हैं। यह प्रचलन दक्षिण भारतीय शहरों में शुरू हुआ था और फिर उत्तरी राज्यों में भी इसका प्रचलन बढ़ गया है।

सेवानिवृत्ति घर सहायता प्रदान करने वाले घर होते हैं, जिन्हें विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाया जाता है, जो कम से कम 55 वर्ष के हैं। खाना, सफाई, या नर्सिंग (Nursing) सहायता जैसी सभी सुविधाएं यहाँ उपलब्ध होती हैं। इसके अलावा, यह बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं और फिज़ियोथेरेपी (Physiotherapy) जैसी अन्य संबंधित सेवाएं भी प्रदान करता है। इसमें मनोरंजन की सुविधाएं जैसे थिएटर (Theatre), क्लब (Club), पुस्तकालय आदि भी होते हैं। विकासक एक सेवानिवृत्ति घर खरीदने के लिए विभिन्न विकल्प प्रदान करते हैं, किश्त से लेकर एक साथ भुगतान तक, आपको अपनी सुविधा के अनुसार भुगतान करने की अनुमति देते हैं। इन्हें बाद में किराए पर भी दे सकते हैं और अपने बच्चों को विरासत में भी दे सकते हैं। लेकिन बच्चे 55 वर्ष की उम्र से पहले यहाँ नहीं रह सकते हैं।

ध्यान रखियेगा, इन सेवानिवृत्ति घर और वृद्धाश्रम में काफी भिन्नता होती है। वृद्धाश्रम के विपरीत सेवानिवृत्ति घरों में अधिक सुविधाएं मिलती हैं, साथ ही यहाँ पर वृद्ध लोगों को सामाजिक परिवेश बनाने में मदद मिलती है। सेवानिवृत्ति घरों के दो प्रारुप उपलब्ध हैं। पहली स्वतंत्र जीविका में आपको अपनी दैनिक आवश्यकताओं और अपने कार्यों को स्वयं करना होता है। दूसरी सहायक जीविका में स्वास्थ्य-सम्बन्धी या अन्य कार्यों में आपकी सहायता करने के लिए अन्य व्यक्ति की सहायता प्रदान की जाती है, जो सबसे सामान्य है।

विश्व भर में वरिष्ठ जीवन उद्योग 16,410 करोड़ रुपये का है, लेकिन भारत में यह अपने नवजात चरणों में है। हालाँकि, 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों की आबादी 2025 तक लगभग 17.3 करोड़ हो जाने का अनुमान है। वर्तमान में ही ऐसे वरिष्ठ उद्योगों की मांग 3,00,000 से अधिक की है। वहीं एक सेवानिवृत्ति घर की कीमत आमतौर पर घर बनाने से कुछ अधिक होती है। उदाहरण के लिए यदि सामान्य आवासीय परियोजना की लागत रु 5,000 प्रति वर्ग फुट है, तो सेवानिवृत्ति परियोजना की लागत रु 6,500-7,000 प्रति वर्ग फुट होती है, क्योंकि इस तरह की परियोजनाएं हाल में बहुत कम हैं। वहीं किराये पर इन घरों में रहने का मासिक खर्च करीब रु 18,000-20,000 तक हो सकता है।

घर लेने के बाद आमतौर पर विकासक रखरखाव, खाद्य और सुरक्षा सेवाओं के लिए निवासियों से एक वार्षिक अनुबंध पर हस्ताक्षर करवाते हैं। वार्षिक रखरखाव की लागत आमतौर पर रु 15,000 और रु 60,000 के बीच होती है। यहाँ, समस्या यह है कि यदि आपको विशिष्ट सेवाओं की आवश्यकता नहीं है, तो भी आपको वार्षिक रखरखाव का भुगतान करना होगा क्योंकि इस अनुबंध में शुल्क निश्चित होता है। बिजली, भोजन, पानी और अन्य सेवाओं को वास्तविक खपत के आधार पर लिया जाता है।

संदर्भ:
1.https://www.tomorrowmakers.com/retirement-planning/living-home-versus-living-retirement-home-india-article
2.https://www.livemint.com/Money/ApoKwqu9CBJ4aZxX0gmh3M/Retirememt-homes-India-Senior-living-societies-a-home-away.html
3.https://www.livemint.com/Money/dvN4ue8SccGtAB0vRXLthI/Whats-the-real-cost-of-retirement-homes.html
4.https://www.thehindu.com/opinion/open-page/old-age-homes-as-a-fact-of-life/article19523768.ece



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