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जब तोड़ दी गयी 140 कि.मी लम्बी बर्लिन की दीवार

मेरठ

 20-01-2019 10:00 AM
ध्वनि 2- भाषायें

रोनाल्ड रीगन का यह भाषण जर्मनी के उस युग के हर व्यक्ति को याद होगा जिसने जर्मनी की 140 किलोमीटर लम्बी दीवार को टूटते देख। इस दीवार को बर्लिन वाल कहा जाता है क्यूंकि इस दीवार के बनने से बर्लिन जोकि वर्तमान म जर्मनी की राजधानी है , वह दो हिस्सों में बंट गया था। यु तो इस दीवार का निर्माण 13 अगस्त 1961 को ही शुरू हो गया था परन्तु इस दीवार के बनने का मुख्य कारण दूसरा विश्व युद्ध था।

विश्व युद्ध 2 के समाप्ति के बाद जर्मनी को चार हिस्सों में बांटा गया और इसका एक हिस्सा सोवियत संघ के पास था जोकि एक साम्यवादी देश था। पूर्व बर्लिन सोवियत संघ के अन्दर आता था और लोगो ने पूर्व बर्लिन से पश्चिम बर्लिन की तरफ पलायन करना शुरू कर दिया। पलायन का मुख्य कारण पश्चिम जर्मनी में लोकतंत्र का होना था।जब भारी मात्रा में पलायन शुरू हो गया तो इसपे रोक लगाने के पश्चिम बर्लिन के बॉर्डर पर तारबंदी कर दी, जो कुछ दिन में एक बड़ी दीवार में तब्दील कर दी गई।

1987 में अमेरिकी राष्ट्रपति बर्लिन आए और उन्होंने अपने भाषण में कहा कि 'मिस्टर गोर्बाोचेव टेअर डाउन दिस वॉल' अगर आप यूरोप में शांति चाहते हैं तो इस दीवार को तोड़ दीजिए. इसके बाद यूरोप के हर देश में इसको लेकर क्रांति शुरू हो गई. पूर्व जर्मनी में भी प्रदर्शन हुए. उनकी मांग थी कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाया जाए और इधर से उधर यानी पूर्व से पश्चिम बर्लिन जाने की आज़ादी दी जाए।

सन्दर्भ:

1.https://www.youtube.com/watch?v=Ei1HnWwzmNk
2.https://en.wikipedia.org/wiki/Berlin_Wall
3.https://en.wikipedia.org/wiki/Tear_down_this_wall!



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