मकर संक्रांति पर खेला जाने वाला एक दुर्लभ खेल, पिट्ठू

मेरठ

 14-01-2019 11:15 AM
हथियार व खिलौने

मकर संक्रांति का त्यौहार भारत के प्रमुख त्यौहारों में शामिल है, जिसमें सूर्य का दक्षिणायन से उत्तरायण में आने का स्वागत किया जाता है तथा इसे अग्रणी फसल के कट कर घर में आने के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन तिल और गुड़ के लड्डू तथा तिल से बनी तरह-तरह की मिठाइयाँ खायी और वितरित की जाती हैं, ये न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होती हैं बल्कि यह कई गुणों से भी भरपूर होती हैं। इस दिन तरह-तरह के खेल भी खेले जाते हैं और उत्सव के साथ सेहत का भी लाभ मिलता है। इन्हीं खेलों में से एक है ‘पिट्ठू’ जो दो गुटों के बीच खेला जाने वाला खेल है। परंतु इसके बारे में आज बहुत कम लोग जानते हैं।

वर्तमान में खेलों का नाम सुनते ही सभी के मन में क्रिकेट (Cricket), हॉकी (Hockey), टेबल टेनिस (Table Tennis) या फिर मोबाइल गेम्स (Mobile Games) की छवि आ जाती होगी। लेकिन क्या आपने कभी पिट्ठू जैसे पारम्परिक खेल खेले हैं? दरअसल, ये परंपरागत देसी खेल हैं, जो बदलते समय के साथ खत्म होने की कगार पर हैं। ये खेल आज सिर्फ गांवों तक सिमट कर रह गए हैं। सच तो यह है कि शहरों में खुले मैदानों और समय के अभाव के कारण शहरी बच्चों के मध्य यह खेल कहीं विलुप्त सा हो गया है। जबकि यह खेल हमारे दिलो-दिमाग को चुस्त-दुरुस्त रखने के साथ-साथ हमें कई बातें सिखाते हैं। तो चलिये इसे पुनः जीवित करने के प्रयास में जानते हैं यह खेल कैसे खेला जाता है और इसके क्या-क्या नियम होते हैं।

यह मैदानों में एक गेंद से खेले जाने वाला खेल है और इसे लागोरी, सितोलिया, बम पिट्ठू, सतोदियू, लिंगोचा, एज़हू कल्लु, डब्बा कली, गिट्टी फोड़ जैसे नामों से भी जाना जाता है। यह दो दलों के बीच खेला जाता है और दोनों दलों में खिलाड़ियों की संख्या भी समान होती है (इस खेल में खिलाड़ियों की संख्या निश्चित नहीं होती है)। इसमें सात चपटे पत्थर होते हैं जिन्हें एक के ऊपर एक जमाया जाता है। नीचे सबसे बड़ा पत्थर और फिर ऊपर की तरफ बढ़ते हुए छोटे पत्थर होते हैं, यह एक टावर (Tower) के समान दिखता है। एक टीम का खिलाड़ी गेंद (कपड़े या रबर की बॉल) से पत्थरों को गिराता है और फिर उसकी पूरी टीम को उसे फिर से जमाना पड़ता है। इस बीच दूसरी टीम के खिलाड़ी गेंद से पहली टीम के सदस्यों को एक-एक करके आउट (Out) करने का प्रयास करते हैं।

इन नियमों का रखें ध्यान:

1. खेलते हुए यदि कोई खिलाड़ी मैदान की बाउंड्री (Boundary) से बाहर जाता है तो वह खिलाड़ी टीम (Team) से बाहर हो जाएगा।
2. पिट्ठू टावर मैदान के बीच बनाया जाता है और इससे कुछ फीट की दूरी पर एक रेखा होती है जहां से एक टीम का खिलाड़ी खड़े होकर पिट्ठू को फोड़ता है।
3. जब पहली टीम का एक खिलाड़ी खड़े होकर पिट्ठू फोड़ता है तो दूसरी तरफ दूसरी टीम का खिलाड़ी गेंद पकड़ने करने के लिए पिट्ठू टावर के पीछे खड़ा रहता है।
4. पिट्ठू टावर फोड़ने के लिए टीम के हर खिलाड़ी को तीन मौके दिए जाते हैं। अगर वह टीम एक बार भी पिट्ठू तोड़ने में कामयाब नहीं होती तो दूसरी टीम की बारी आ जाती है। और यदि पहली टीम पिट्ठू फ़ोड़ने में कामयाब हो जाती है तो असली खेल शुरू हो जाता है। पहली टीम सभी पत्थरों को फिर से जमाने की कोशिश करती है और वहीं दूसरी टीम के खिलाड़ियों का उद्देश्य उन्हे गेंद से आउट करने का होता है ताकि वे पत्थरों के टावर को फिर से व्यवस्थित करने में सफल न हों।
5. टावर तोड़ते वक्त यदि दूसरी टीम के खिलाड़ी द्वारा गेंद एक टिप्पे के बाद सीधी पकड़ ली जाती है तो फोड़ने वाली टीम एक बार में आउट हो जाती है।
6. दूसरी टीम के खिलाड़ियों को आउट करने के लिए गेंद अपनी टीम के दूसरे खिलाड़ी को देनी पड़ती है, वे गेंद लेकर भाग नहीं सकते हैं।

तो यह हैं इस खेल के कुछ बुनियादी नियम, जिनका पालन इस खेल के दौरान किया जाता है। यह बिना खर्च वाला एक मज़ेदार देशी खेल है। इसे हर बच्चा खेल सकता है। इसमें दौड़-भाग होती है, जिससे बच्चों का स्वास्थ्य भी बना रहता है।

संदर्भ:
1.https://en.wikipedia.org/wiki/Lagori
2.https://bit.ly/2AJPyFU
3.https://bit.ly/2AL2sDQ



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