Machine Translator

मेरठवासियों के लिए सिर्फ 170 किमी दूर हिल स्टेशन

मेरठ

 18-12-2018 11:58 AM
पर्वत, चोटी व पठार

आजकल हर कोई शहर की भीड़-भाड़ से दूर एक ऐसी जगह पर जाना चाहता है जहाँ वह जिंदगी के दो पल अपने परिवार के साथ हँसी-खुशी बिता सके। खासकर इस व्यस्त भरी जिंदगी में अगर कोई ऐसी जगह मिल जाए जहाँ आपको पल भर के लिए सुकून मिले तो वो जगह किसी स्वर्ग से कम नही कहलाएगी। मेरठवासियों के लिए ऐसी एक जगह जो मेरठ से सिर्फ 170 किमी दूर है, काफी शांती और सुकून प्रदान करेगी। उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित लैंसडाउन एक सुन्दर हिल स्टेशन है।

लैंसडाउन एक शांत और अनूठा हिल स्टेशन (hill station) है और ब्रिटिश शासन से ही यह एक लोकप्रिय गंतव्य रहा है, जो गर्मियों और सर्दी दोनों में शहर की भीड़ भार से दूर एक शांतिपूर्ण और कम लागत वाली यात्रा प्रदान करता है। यह अन्य हिल स्टेशनों से भिन्न है, क्योंकि यह सड़को से जुड़ी हुई है। बलूत और नीले देवदार के जंगलों से घिरा यह हिल स्टेशन समुद्री तट से 1700 मीटर की ऊँचाई पर स्थित, सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

इस शहर का नाम उस समय के भारत के वाइसराय लॉर्ड लैंसडाउन के नाम पर रखा गया था, इन्होंने 1887 में इस हिल स्टेशन की खोज की थी। आज यहाँ भारतीय सेना का गढ़वाल राइफल्स कमांड आफिस स्थित है। इस शहर में स्वतंत्रता से पूर्व के दो चर्च हैं, हालांकी वर्तमान में केवल सेंट जेम्स कार्यात्मक है। साथ ही शहर में एक बड़ा हिंदू मंदिर भी है।

लैंसडाउन की कुछ विशेषताएं :-

• शांत, कम भीड़, ज्यादा विकसित नहीं और अज्ञात हिल स्टेशन है।
• गढ़वाल राइफल्स के छावनी क्षेत्र में होने की वजह से काफी साफ और अच्छी तरह से संरक्षित रखा हुआ क्षेत्र है।
• ब्रिटिश औपनिवेशिक वास्तुकला और सैन्य इतिहास की कई पुरानी इमारतें भी यहां देखने के लिए मिलती हैं।
• दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के सबसे नज़दीकी हिल स्टेशनों में से एक और एक सुंदर सप्ताहांत पर्यटक स्थल है।

लैंसडाउन में होने वाली गतिविधियां :-

• एडवेंचर गतिविधियां :- लैंसडाउन में आप काफी सुंदर पक्षियों को देख सकते हैं, ट्रेकिंग, रॉक क्लाइंबिंग आदि कुछ एडवेंचर गतिविधियां कर सकते हैं।

• प्रकृति के दृश्य :- लांसडाउन में स्वास्थ्यप्रद और शांत वातावरण वाली पहाड़ी में आप एक लंबी पैदल यात्रा कर सकते हैं।

• नौकायन :- आप भुल्ला ताल (यहाँ की बहुत प्रसिद्ध छोटी-सी झील है) में नौकायन, पैडलिंग (paddling) का आनंद ले सकते हैं। कोटद्वार-लांसडाउन रोड पर स्थित दुर्गा देवी मंदिर के पास खो नदी में भी आप पानी से संबंधित गतिविधियों का भी आनंद ले सकते हैं।

• हिमपात :- सर्दियों में आप यहां बर्फ का भी आनंद ले सकते हैं। बर्फ के दृश्य के लिए आप एक साफ दिन में चौखंबा जैसे महान हिमालयी चोटियों को देख सकते हैं।

लैंसडाउन पहुचने के तरीके:

आप लैंसडाउन गाड़ी से या ट्रेन से भी जा सकते है। गाड़ी से आप मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग से 4 से 5 घंटे में 170 किमी की यह दूरी तय कर सकते हैं। अगर आप ट्रेन से लैंसडाउन जाते है तो मेरठ से बस 2-3 घंटे में कोटद्वार पहुच सकते है। कोटद्वार स्टेशन लैंसडाउन का सबसे करीबी रेलवे स्टेशन है और वहां से आप किसी भी स्थानीय परिवहन के मदद से लैंसडाउन तक जा सकते हैं।

सन्दर्भ :-

1. https://www.euttaranchal.com/tourism/lansdowne.php
2. https://en.wikivoyage.org/wiki/Lansdowne_(India)
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Lansdowne,_India



RECENT POST

  • जापान में श्री कृष्ण के प्रभाव का महत्वपूर्ण उदाहरण है टोडायजी
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     24-08-2019 12:13 PM


  • क्या है बियर का इतिहास और कैसे है मेरठ और बियर में पुराना सम्बंध
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     23-08-2019 01:06 PM


  • कौमी एकता की मिसाल है बाले मियां की दरगाह
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     22-08-2019 02:20 PM


  • मेरठ में बदलता उपभोक्‍तावाद का स्‍वरूप
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     21-08-2019 03:35 PM


  • मेरठ में मिलता है कत्थे का स्त्रोत – खैर का वृक्ष
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     20-08-2019 01:50 PM


  • आयुर्वेद का हमारे जीवन में महत्‍व
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     19-08-2019 02:00 PM


  • कैसे तय होती है, रुपये और डॉलर की कीमत?
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     18-08-2019 10:30 AM


  • आखिर किसके पास है महासागरों का स्‍वामित्‍व?
    समुद्र

     17-08-2019 02:52 PM


  • विभाजन के बाद पाकिस्तान में विलय होने वाली रियासतें
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     16-08-2019 03:26 PM


  • महात्मा गांधी जी की गिरफ्तारी के बाद गोवालिया टैंक मैदान में हुई घटनाओं की अनदेखी तस्वीरें
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     15-08-2019 08:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.