Machine Translator

मेरठ के औघड़नाथ मंदिर का स्वयंभू शिवलिंग एवं अन्य प्रकार के शिवलिंग

मेरठ

 20-11-2018 01:14 PM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

देवों के देव महादेव का नाम सुनते ही मन में शिवलिंग की छवि उभरकर आने लगती है। जब भी हम मंदिर में पूजा करने जाते हैं तो हमारे द्वारा शिवलिंग पर जलाभिषेक करके भगवान शिव की आराधना की जाती है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया कि जिस मंदिर में आप जा रहे हैं, वहां स्थित शिवलिंग कौन से प्रकार का है? जी हाँ, शिवलिंग के भी प्रकार होते हैं। जैसे मेरठ में स्थित औघड़नाथ शिव मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू शिवलिंग हैं, और ऐसा माना जाता है कि इस शिवलिंग के दर्शन करके लोगों की मनोकामनाएं जल्द पूरी हो जाती हैं।

मुख्यतः शिवलिंग के छः प्रकार बताए गये हैं, जो इस प्रकार हैं:
स्वयंभू लिंग: ऐसा माना जाता है कि स्वयंभू लिंग स्वयं प्रकट होते हैं।
देव लिंग: ऐसा माना जाता है कि देव शिवलिंग की स्थापना और पूजा देवी पार्वती और अन्य दिव्य देवताओं द्वारा की गयी थी। वर्तमान समय में भी ये धरती पर मौजूद हैं लेकिन इनका मूल देवों से जोड़ा जाता है।
मनुष्य लिंग: प्राचीनकाल या मध्यकाल में मानव (महापुरुषों, अमीरों, राजा-महाराजाओं) द्वारा स्थापित किए गए लिंग को मनुष्य शिवलिंग के नाम से जाना जाता है।
अर्श लिंग: प्राचीनकाल में मुनियों (जैसे: अगस्त्य मुनि) द्वारा स्थापित और पूजन किए जाने वाले लिंग को अर्श लिंग कहा जाता है।
असुर लिंग: असुरों द्वारा स्थापित और पूजा किये जाने वाले लिंग को असुर लिंग कहा जाता है। उदाहरण के लिए - रावण द्वारा स्थापित शिवलिंग असुर लिंग था।
बाना लिंग: बाना लिंग अधिकतर नदियों के तट पर पाए जाते हैं। "बाना" के दो अर्थ हैं - पानी और राक्षस (असुर)। ऐसा माना जाता है कि दानव बाना ने लाखों छोटे लिंगों की पूजा की थी और उन्हें गंगा, गंडकी, गोमुखी आदि जैसी कई नदियों में गिरा दिया था। ये लिंग अभी भी नदियों के तट पर पाए जाते हैं।
इन लिंगों के गुणों के आंकलन के आधार पर स्वयंभू, देव और अर्श लिंगों को उत्तम माना जाता है और बाकी सभी लिंगों को मध्यम माना जाता है।

शिव लिंग के निर्माण के पीछे विज्ञान का होना बड़ी अनुभवी संभावना है। आम तौर पर, ऋषियों द्वारा बनाए गये शिवलिंग में वैज्ञानिक आधार पाया जाता है। उनमें कुछ शाश्वत कंपन देखने को मिलता है, और उन्हें विशिष्ट उद्देश्यों और गुणों के लिए मंत्रों के उपयोग से पवित्र करके बनाया जाता था। दक्षिण भारत में प्रकृति के पांच तत्वों (पृथ्वी, अग्नि, वायु, पानी, और अंतरिक्ष) के आधार पर पांच शिवलिंग बनाए गये हैं। ये लिंग पूजा के लिए नहीं वरन साधना के लिए बनाए गए थे। उदाहरण के लिए, यदि किसी को पानी की साधना करनी होगी तो वो तिरुवन्नाइकवल (Thiruvanaikaval) जाएगा, और यदि अंतरिक्ष की, तो चिदम्बरम (Chidambaram)।

क्या आप जानते हैं, ज्यादातर लिंग एक या दो चक्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। और कई आमतौर पर केवल एक का। वहीं ध्यानलिंग सभी सात चक्रों के साथ सशक्त हैं, इसे प्राण प्रतिष्ठा द्वारा पवित्र किया गया था। जो दुनिया में बहुत कम देखने को मिलता है, वह ध्यानमिंग में देखने को मिलता है, इसकी देखभाल पुरुषों और महिलाओं दोनों द्वारा की जाती है।

वहीं आप में से बहुत कम लोग ये जानते होंगे कि मेरठ के औघड़नाथ शिव मंदिर का 1857 की क्रांति पर एक महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारतीय सेना द्वारा मंदिर के कुएं से अक्सर पानी पीया जाता था, लेकिन एक दिन जब ब्रिटिश सेना द्वारा बंदूक की कारतूस में गाय की चर्बी का इस्तेमाल होने लगा, और उसका उपयोग कुछ सिपाहियों द्वारा किया जाने लगा, तब इस बात की जानकारी पाते ही मंदिर के पुजारी द्वारा सिपाहियों को कुएं का पानी पीने के लिए मना कर दिया गया। और तभी से सारे सिपाहियों के मन में विरोध की भावना उत्तेजित हो गयी। ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय सेना को ‘काली पलटन’ के नाम से जाना जाता था और इस मंदिर में काली पलटन के अधिकारियों की गुप्त बैठक हुआ करती थी। जिससे इस मंदिर का नाम काली पलटन मंदिर पड़ गया।

संदर्भ :-

1.https://www.dharisanam.com/pages/types-of-shivalingam
2.http://www.indianmirror.com/temples/augurnath-temple.html
3.https://isha.sadhguru.org/in/en/wisdom/article/science-history-creating-lingas



RECENT POST

  • जपजी साहिब के श्लोकों का अर्थ
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     12-11-2019 12:31 PM


  • क्यों होते हैं पेड़ और पौधे हरे रंग के?
    कोशिका के आधार पर

     11-11-2019 12:51 PM


  • पश्चिम की चित्रकला में फ़्रांस के कुछ महत्वपूर्ण कलाकार
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     10-11-2019 09:10 AM


  • विश्वभर में काफी धूमधाम से मनाया जाता है “ईद-ए-मिलाद-उन-नबी”
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     09-11-2019 11:40 AM


  • ई-कॉमर्स का शुरुआती चरण से अब तक का सफर
    संचार एवं संचार यन्त्र

     08-11-2019 11:29 AM


  • आखिर क्या है वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) और इसके मायने
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     07-11-2019 11:57 AM


  • किस तरह निकाला जा सकता है, भारत में अनेकों स्वास्थ्य समस्याओं का हल?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     06-11-2019 01:08 PM


  • विस्मयकारी तथा घातक प्रक्रिया है ज्वालामुखी का फटना
    पर्वत, चोटी व पठार

     05-11-2019 11:42 AM


  • कीट द्वारा किया जाता है रेशम का उत्पादन
    तितलियाँ व कीड़े

     04-11-2019 12:41 PM


  • शिक्षा प्रणाली पर प्रहार करती फिल्म पर आधारित स्पूफ चलचित्र
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     03-11-2019 10:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.