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जादूगरी की दुनिया के कुछ बेताज शहंशाह

मेरठ

 05-11-2018 02:39 PM
द्रिश्य 2- अभिनय कला

संसार में आये दिन कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं, जो मानव मस्तिष्‍क की समझ से बाहर होती हैं। जिन्‍हें अक्‍सर हम जादू की श्रेणी में रख देते हैं। आपने अक्‍सर मेलों में भी जादू के खेलों को देखा होगा। ये जादू क्‍या है एक भ्रमजाल या हाथों की सफाई, जो भी है लेकिन इसके बिना मेलों का आनंद अधूरा रहता है। आज तो मनोरंजन के सैकड़ों साधन उपलब्‍ध हैं, किंतु जहां जादू की बात होती है वहां हम सहज ही आ‍कर्षित हो जाते हैं। जादू दिखाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसमें एक जादूगर हमारे समक्ष एक भ्रमजाल बिछाता चला जाता है और हम उसमें फंसते चले जाते हैं। अंततः हमारे मस्तिष्‍क में एक ही प्रश्‍न उठता है कि यह कैसे हुआ?

भारत के इतिहास में कई ऐसे श्रेष्‍ठ जादूगर हुए जो जादू की दुनिया में अपना नाम छोड़ गये। इन्‍होंने भारत ही नहीं वरन विदेशों में तक अपने जादू का परचम फहराया। 20वीं सदी के इन श्रेष्‍ठ जादूगरों में नाम आता है पी.सी. सरकार, गोगिया पाशा और के. लाल का।

पी.सी. सोरकार:
भारत के जादू को विश्‍व स्‍तर तक फैलाने का श्रेय इस बंगाली जादूगर को जाता है। ‘वॉटर ऑफ इंडिया’ (Water of India), ‘एक्स-रे विज़न’ (X-Ray Vision), ‘ड्रम इल्यूशन’ (Drum Illusion) और ‘फ़्लोटिंग लेडी’ (Floating Lady) आदि इनके प्रसिद्ध जादू थे। इनके पुत्र जूनियर पी.सी. सरकार द्वारा लिखी गयी पुस्‍तक ‘जादू के महाराज’ में इनके जीवन की विस्‍तृत जानकारी मिलती है। इनके द्वारा छोटे परदे से लेकर जापान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, रूस, अमेरिका और यूरोप जैसे स्‍थानों पर जादू दिखाया गया। ब्रिटिश के प्रसिद्ध समाचार पत्र डेली मिरर (Daily Mirror) में इनके जादू के ऊपर विशेष लेख छपा, जिसमें बताया गया कि कैसे इन्‍होंने अपने जादू से ब्रिटेन की रानी को प्रभावित किया। इनका जादू देखने के लिए भारत ही नहीं वरन विदेशों में भी जन सैलाब उमड़ जाता था। जापान में चलने वाला इनका शो अंतिम साबित हुआ जहां दिल का दौरा पड़ने से इनकी मृत्‍यु हो गयी।

के. लाल:
मशहूर जादूगर कांतिलाल गिरधारीलाल वोरा यानी कि के. लाल आज हमारे बीच नहीं हैं। रविवार 23 सितंबर, 2012 की सुबह 88 वर्ष की आयु में नवरंगपुरा में उनके निवास स्थल पर उनका निधन हो गया था। वे बड़े ही आकर्षक प्रवृत्ति के जादूगर थे। उनकी चमकदार पगड़ी, सम्मोहक आंखे और पेंसिल की तरह पतली मूंछें जो दर्शकों को बड़ा ही मंत्रमुग्ध कर देती थी। उन्होंने जादूगरी की शिक्षा गणपति चक्रवर्ती से ली थी, जिन्होंने विश्व प्रसिद्ध जादूगर पी.सी. सरकार सीनियर को भी जादू सिखाया था। वे अक्सर अपने बेटे जूनियर के. लाल के साथ प्रदर्शन किया करते थे। उन्होंने बताया कि वे अपने समकालीन लोगों के बीच कई कारणों से प्रसिद्ध थे। वे अपने कार्यक्रमों में नवीनतम तकनीक का उपयोग करके उनमें सामाजिक विषयों को भी शामिल करते थे। यही कारण है कि उन्हें फिल्म सितारों, धार्मिक गुरुओं और जनसाधारण द्वारा सम्मानित किया गया था।

गोगिया पाशा:
गोगिया पाशा ने अपने अधिकांश जीवन-काल में खुद को मिस्र के रहने वाला बताकर दुनिया को धोखे में रखा। वास्तव में, गोगिया पाशा का जन्म 1910 में मुल्तान जिले (पाकिस्तान) में हुआ था और उनका वास्तविक नाम दनपत राय गोगिया था। विभाजन के बाद वे देहरादून में रहने लगे थे। इंग्लैंड के सफर के दौरान उनकी मुलाकात इंग्लैंड के प्रसिद्ध जादूगर ओवेन क्लॉर्क से हुई। उन्हें देख गोगिया को भी जादू में आकर्षण हो गया। वर्ष 1929 में ओवेन ने मृत्यु से पहले अपने सभी उपकरण धनपत को सौंप दिए। और वहीं से उनका जादू की दुनिया में जीवन-यात्रा का प्रारंभ हुआ। उनके प्रदर्शन में हास्यप्रधान नाटक, कप (Cup) और बॉल्स (Balls) का नाटक, मुंह से जिंदा मुर्गियों का निकलना और उनके सहायक का गर्दन में लगी एक तलवार के सहारे लटके रहना शामिल था। गोगिया द्वारा दर्शकों से बातचीत करते समय दाढ़ी और आस्तीन से सिक्कों का निकलना काफी आकर्षित था। उन्होंने जर्मनी में ‘द मैन विद दी हंडरेड मिलियन डॉलर्स’ नामक एक शो एडॉल्फ हिटलर के समक्ष पेश किया था। गोगिया पाशा के अनोखे जादू की एक झलक आप नीचे दिये गये विडियो में देख सकते हैं।


मेरठ के नौचंदी मैदान में प्रतिवर्ष वार्षिक मेले (नौचंदी मेले) का आयोजन किया जाता है। इसका प्रारंभ 17वीं शताब्‍दी में एक दिवसीय मवेशी व्‍यापार मेले के रूप में हुआ था तथा 1858 के बाद इसमें अन्‍य गतिविधियां भी जोड़ दी गईं। होली के दूसरे रविवार से प्रारंभ होने वाले इस मेले में बड़ी संख्‍या में आगंतुक आते हैं। लगभग एक माह तक चलने वाले इस मेले में विभिन्‍न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। मेरठ से लखनऊ जाने वाली रेल नौचंदी एक्‍प्रेस का नाम इसी मेले के नाम पर पड़ा। इस मेले में आयोजित होने वाले जादू के कार्यक्रम में दिखाये जाने वाले कुछ विशेष ट्र‍िक (Trick) को उपरोक्‍त जादूगरों के जादू की ट्र‍िक से ही लिया गया है। मेले में होने वाले जादुई कार्यक्रम की एक झलकी आप नीचे देख सकते हैं।


संदर्भ:
1.https://goo.gl/Xh2Gwm
2.https://thewire.in/culture/mysterious-gogia-pasha-original-gilly-gilly-man
3.https://www.youtube.com/watch?v=2qYCydLBS_Y
4.https://en.wikipedia.org/wiki/Nauchandi_Mela
5.https://timesofindia.indiatimes.com/city/ahmedabad/Famous-magician-K-Lal-passes-away/articleshow/16522871.cms



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