यमन से भारत तक कॉफी का सफर

मेरठ

 22-10-2018 04:52 PM
स्वाद- खाद्य का इतिहास

सर्दियों के आगमन के साथ ही लोगों का रुझान चाय की अपेक्षा कॉफी की ओर बढ़ने लगता है। यह कॉफी अपने अद्भुत स्वाद के साथ-साथ तासीर में भी गरम होती है, जो हमारे शरीर को ऊर्जा देकर आलस्य मुक्त बनाती है। अफ्रिका में जन्मी कॉफी विश्व के अधिकांश भागों में लोकप्रिय है। भारत में इसका प्रचलन आज कल या कुछ समय पहले से नहीं वरन ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत में आने से भी पहले है ।

ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत में आने से पहले ही कॉफी सूफी संत "बाबा बुडान" के माध्यम से लायी गयी थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार यमन नें कॉफी उत्पादन पर विश्वव्यापी एकाधिकार हासिल कर रखा था, इसलिए उन्होंने कच्चे कॉफी के बीज के व्यापार पर सख्त नियंत्रण लगा रखा था, यदि कोई व्यापार करते हुए पकड़ा जाता था तो उसे मृत्यु दंड दिया जाता था। ऐसा माना जाता है कि 17 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में जब बाबा बुडान मक्का हज के लिए घर से निकले तो वहाँ से वापस आते हुए उन्होंने यमन से सात कच्चे कॉफी के बीज लेकर छुपा दिए, और भारत के मालाबार तट और चिकमगलूर (कूर्ग, दक्षिणी भारत) पर इन्हें बो दिया। तब से इन क्षेत्रों में बागान स्थापित किए गए, जो दक्षिण में कोडागु तक फैले हुए हैं।

चिकमगलूर (Chikmagalur, karnataka) में आज बाबा बुडान के नाम में चिकमगलूर की पहाड़ी का नाम "बाबा बुडान गिरी" रखा गया और साथ ही वहाँ उनके नाम का मंदिर भी बनवाया गया। इस मंदिर को दत्तात्रेय पीठ के रूप में भी जाना जाता है। कई सैकड़ों वर्षों से, हिंदू और मुसलमान इस मंदिर में बाबा बुडान और श्री गुरु दत्तात्रेय की प्रार्थना करने आते हैं। कॉफी उत्पादन में दक्षिण भारतीय राज्यों के पहाड़ी क्षेत्रों का प्रभुत्व है। जिसमें 8,200 टन कॉफी उत्पादन में कर्नाटक राज्य का 53%, केरल का 28% और तमिलनाडु का 11% है। यहाँ पर उगाई जाने वाली कॉफी को "भारतीय मानसून कॉफी" भी कहा जाता है। कॉफी की दो प्रसिद्ध प्रजातियां अरेबिका और रोबस्टा कॉफी हैं। बाबा बुदान द्वारा पेश की जाने वाली कॉफी कई वर्षों तक एस 795 के नाम से विपणन की गयी। पहले इस कॉफी को एमटीआर, नारासु और फ़िल्टर कॉफी इत्यादि के नाम से बेची जाती है। भारत में लगभग 2,50,000 कॉफी उत्पादक हैं, जिनमें से 98% छोटे उत्पादक ही हैं। 2009 में विश्व उत्पादन के मुकाबले भारत में कुल 4.5% कॉफी का उत्पादन हुआ था।

संदर्भ :-

1.https://bluetokaicoffee.com/blogs/blue-tokai-coffee-roasters/17521356-tasting-the-roots-of-indian-coffee
2.https://en.wikipedia.org/wiki/Baba_Budan
3.https://en.wikipedia.org/wiki/History_of_coffee
4.http://indianculturalforum.in/2017/07/04/rajendra-chenni-in-dispute/



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