मेरठ के पास हस्तीनापुर में मिली मध्यकाल की कांच की चूड़ियां

मेरठ

 10-10-2018 02:25 PM
म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

प्राचीन भारत में महाभारत, यजुर्वेद संहिता, सोमदेव की कथासरित्सागर, रामायण और शतपथ ब्राह्मण में कांच शब्द का उपयोग कई जगह किया गया है। यही नहीं इनमें प्राचीन भारत में कांच निर्माण के तकनीकी विकास के विभिन्न पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया है। कहा जाता है कि शतपथ ब्राह्मण में काका शब्द का उपयोग कांच की वस्तुओं के अर्थ को दर्शाने के लिए किया जाता है, जबकि कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि केवल कांच के मोती के लिए ही काका शब्द का प्रयोग किया जाता है।

दरअसल कांच आमतौर पर भंगूर और अकार्बनिक पदार्थों से बना पारदर्शक और अपारदर्शक पदार्थ है। कांच में लगभग 75% सिलिका (Silica) होता है और सोडियम आक्साइड (Sodium Oxide) और चूना तथा अनेक चीजें कम मात्रा में मिली हुई होती हैं। किंवदंती के अनुसार, मुनष्य को कांच का पता तब चला जब कुछ व्यापारियों ने सीरिया में फ़ीनीशिया के समुद्रतट किनारे पर भोजन के पात्र चढ़ाए। अग्नि के प्रज्वलित होने पर उन्हें द्रवित कांच की धारा बहती हुई दिखाई दी। यह कांच बालू और शोरे के संयोग से बन गया था। परंतु ऐतिहासिक दृष्टि से कांच का आविष्कार मिस्र या मैसोपोटामिया में लगभग ढ़ाई हजार वर्ष ईसा पूर्व हुआ था। इसके साक्ष्य मैसोपोटामिया में कब्रिस्तान से प्राप्त कांच के मोती हैं जो कि 2100 ईसा पूर्व के है। शुरु में इसका उपयोग साज-सज्जा के लिये किया गया था, फिर ईसा से लगभग डेढ़ हजार साल पहले कांच के बर्तन बनने लगे, और समय बीतने के साथ साथ वेनिस शहर उत्कृष्ट कांच की चीजें बनाने का केंद्र बन गया।

हालांकि मैसोपोटामिया के साथ हड़प्पा या सिंधु घाटी सभ्यता का संपर्क था परंतु हड़प्पा संस्कृति की किसी भी साइट (Site) से कोई वास्तविक कांच के साक्ष्य नहीं मिलते है। हालांकि अशुद्ध कांच के मोती, चूड़ियां, आभूषण, बर्तन, आदि जैसे चमकीले पदार्थ कई साइटों पर पाए गए जो ज्यादातर चीनी मिट्टी या अशुद्ध कांच से बने हुए थे। भारत में कई प्रदेशों में प्राचीन कांच के टुकड़े प्राप्त हुए हैं। खासतौर पर मेरठ के आस-पास के इलाकों में प्राचीन काल के कांच के अवशेष खुदाई में मिले जिन्हें ऊपर चित्र में प्रस्तुत किया गया है।

वर्तमान में उत्तर प्रदेश में मेरठ के पास स्थित हस्तिनापुर (महाभारत का हस्तिनापुर, जिसके लिये कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध हुआ था) में 1000 ईसा पूर्व के काले और भूरे रंग के रंगीन कांच के मोती तथा चूड़ियां पायी गयी थी। जोकि सोडा-लाइम-सिलिकेट (Soda-Lime-Silicate) और पोटेशियम (Potassium) तथा लोहे के यौगिकों की भिन्न मात्रा के साथ बने हुए थे। दक्षिण डेक्कन में मस्की (मस्की कर्नाटक के रायचूर जिला का एक ग्राम है। यह एक पुरातात्त्विक स्थल भी है) में भी कांच के मोती के कुछ पुरातात्विक सबूत मिलते हैं, यह पहली सहस्राब्दी ईसा पूर्व की शुरुआत से भी पुराने है। भारत में सबसे पुराना कांच हरियाणा के उत्तरी राज्य में भगवानपुरा में पाया गया। ऐसा माना जाता है कि ये लगभग 1200 ईसा पूर्व के पेंटेड ग्रे वेयर संस्कृति (Painted Grey Ware) और हड़प्पा संस्कृति की अवधि में उपयोग किए जाते थे।

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में, लगभग 30 पुरातात्विक खुदाई साइटों में, हरे, नीले, लाल, सफेद, नारंगी और कुछ अन्य रंगों में कई कांच की वस्तुएं पाई गई हैं। कुछ स्थानों पर तो कुछ टाइलें और बर्तनों के खंडित हिस्से भी पाये गये हैं।

संदर्भ:
1.https://www.insa.nic.in/writereaddata/UpLoadedFiles/IJHS/Vol05_2_7_VGovind.pdf
2.https://www.infinityfoundation.com/mandala/t_es/t_es_goyal_glass_frameset.htm
3.https://www.cmog.org/sites/default/files/collections/DF/DFE8CE02-1704-4479-9C8D-7D35851B15F8.pdf
4.https://goo.gl/2N5J7B
5.https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%80



RECENT POST

  • मेरठ का ऐतिहासिक स्थल सूरज कुंड
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     22-09-2020 11:14 AM


  • आभूषणों को सुंदर रूप प्रदान करता है कांच
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     21-09-2020 04:08 AM


  • अजंता और एलोरा
    खदान

     20-09-2020 09:26 AM


  • क्यों होते हैं आनुवंशिक रोग?
    डीएनए

     18-09-2020 07:48 PM


  • बैटरी - वर्षों से ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     18-09-2020 04:49 AM


  • मानवता के लिए चुनौती हैं, लीथल ऑटोनॉमस वेपन्स सिस्टम (LAWS)
    हथियार व खिलौने

     17-09-2020 06:19 AM


  • मेरठ पीतल से निर्मित साज
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     16-09-2020 02:10 AM


  • हमारी आकाशगंगा का भाग्य
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     15-09-2020 02:04 AM


  • हस्तिनापुर में स्थित जैन मंदिर में पद्मासन मुद्रा में मौजूद है तीर्थंकर शांतिनाथ की प्रतिमा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-09-2020 04:47 AM


  • निवासी और प्रवासी पक्षियों की कई विविध प्रजातियों का घर है, कच्छ रेगिस्तान वन्यजीव अभयारण्य
    मरुस्थल

     13-09-2020 04:26 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id