क्या और कौन है मेरठ कैंटोनमेंट बोर्ड?

मेरठ

 25-09-2018 03:20 PM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

मेरठ में उपजिले के नाम से जाना जाने वाला मेरठ छावनी बोर्ड पिछले कुछ समय से समाचार की सुर्खियों में दिखाई दे रहा है। तो चलिए जानते हैं कि आखिर क्या है मेरठ कैंटोनमेंट बोर्ड और क्या होते हैं इसके कर्तव्य।

मेरठ छावनी बोर्ड एक स्‍थानीय निकाय है जो इस क्षेत्र में:
1. सामाजिक कल्‍याण,
2. सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य,
3. स्‍वच्‍छता,
4. शहरी नवीनीकरण,
5. शिक्षा केंद्र,
6. जल आपूर्ति, तथा
7. सरकारी योजनाओं
को लागू करता है।

36 कि.मी. क्षेत्र में फैले लगभग 93 लाख (2011) की जनसंख्‍या वाले मेरठ छावनी क्षेत्र की स्‍थापना 1803 में अंग्रेजों द्वारा की गयी। यह क्षेत्र प्रमुखतः सेनाओं के लिए स्‍थापित किया गया था, किंतु वर्तमान समय में यहां सैन्‍य जनसंख्‍या (21,490) से ज्‍यादा सिविल जनसंख्‍या (72,194) देखने को मिलती है।

यह क्षेत्र भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के जिलाधिकारी के क्षेत्र में नहीं आता है। किंतु जिलाधिकारी द्वारा क्षेत्र के किसी मुद्दे पर अपनी अप्रत्‍यक्ष राय दी जा सकती है। जिलाधिकारी यहां के अधिकारियों से मिलकर, इस क्षेत्र के किसी ज्‍वलंत मुद्दे पर विचार-विमर्श कर सकता है।

मेरठ छावनी बोर्ड द्वारा लगभग 13 लाख रुपये के विद्युत बिल ना देने के कारण, विगत कुछ समय में उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यू.पी.पी.सी.एल.) द्वारा इस क्षेत्र की 2200 सड़कों की लाइटों को बंद कर दिया गया है। बोर्ड अधि‍कारियों द्वारा वित्‍तीय कमी को बिल ना देने का कारण बताया गया है। यदि हम पिछले आंकड़ें देखें तो इस क्षेत्र का एक महीने का बिल लगभग 6 लाख रुपये रहता था, जिसमें LED लाईट के प्रयोग से कमी देखी गयी है।

यहां स्थित मोबाईल नेटवर्क समस्‍या के कारण लोगों को लेंडलाईन सेवा पर निर्भर रहना पड़ता है। राष्‍ट्र में व्‍याप्‍त नेटवर्क सेवाओं को सुरक्षा के कारण छावनी क्षेत्र में प्रदान नहीं किया जाता है। किंतु बोर्ड द्वारा इस समस्‍या को सुलझाने का प्रयास किया गया, लेकिन इस क्षेत्र में कोई भी नेटवर्क कंपनी सेवा प्रदान करने को तैयार नहीं हो रही थी। अब टेंडर की निलामी द्वारा इस क्षेत्र में सेल ऑन व्‍हील (Cell-on-Wheels) की सुविधा उपलब्‍ध कराने का प्रयास किया जाएगा। लेकिन सेवा प्रदाताओं द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि बोर्ड इस समस्‍या को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

मेरठ छावनी बोर्ड अतिक्रमण के कारण भी सुर्खियों में है। साथ ही बोर्ड द्वारा गांधी बाग में अनावश्‍यक भीड़ को रोकने के लिए प्रवेश शुल्‍क 5 से 10 रूपए कर दिया गया है तथा बाग में बच्‍चों के खेलने का भी मासिक शुल्‍क 100 रुपये कर दिया गया है।

उपरोक्‍त विवरण से ज्ञात हो गया है कि वर्तमान समय में छावनी क्षेत्र कुछ अप्रत्‍याशित समस्‍याओं का सामना कर रहा है। किंतु इस क्षेत्र के अधिकारियों द्वारा स्थितियों को सुधारने के लिए विभिन्‍न कदम उठाए जा रहे हैं। जिसके भविष्‍य में सकारात्‍मक परिणाम देखे जा सकते हैं।

संदर्भ:
1.http://www.cbmrt.org.in/about-us.php
2.https://indikosh.com/city/128784/meerut
3.https://timesofindia.indiatimes.com/city/meerut/2200-street-lights-go-dark-in-meerut-cantt/articleshow/65810541.cms
4.http://www.cbmrt.org.in/index.php
5.https://timesofindia.indiatimes.com/city/meerut/meerut-cantonment-board-issues-notice-against-illegal-encroachment-at-board-meeting/articleshow/56651659.cms
6.https://timesofindia.indiatimes.com/city/meerut/cantonment-board-seeking-resolution-of-mobile-phone-network-issue-through-auction/articleshow/59166948.cms
7.https://timesofindia.indiatimes.com/city/meerut/DM-holds-meeting-for-transparent-MCB-poll/articleshow/47167289.cms



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