हिंदी भाषा में मुहावरों का चित्रात्मक उपयोग

मेरठ

 10-09-2018 01:43 PM
ध्वनि 2- भाषायें

हिंदी एक ऐसी भाषा है जो कई रंगीन मुहावरों से भरी है, जो विशिष्ट शब्दावली की तुलना में लोगों और परिस्थितियों को एक और दिलचस्प तरीके से वर्णित करते हैं। मुहावरे भाषा को सुदृढ़, गतिशील और दिलचस्प बनाते हैं, उनके प्रयोग से भाषा में चित्रमयता आती है। मुहावरा ‘अरबी भाषा’ का शब्द है, जिसका अर्थ है बातचीत करना या उत्तर देना। कुछ लोग मुहावरे को ‘रोज़मर्रा’, ‘बोलचाल’, ‘तर्ज़ेकलाम’ या ‘इस्तलाह’ कहते हैं। यूनानी भाषा में मुहावरे को ‘ईडियोमा’, फ्रेंच में ‘इडियाटिस्मी’ और अंग्रेजी में ‘इडिअम’ कहते हैं। इसका शाब्दिक अर्थ अभ्यास होता है, जो कि वाक्यांश के आधार पर विशेष अर्थ को प्रकट करता है। इनके विशेष अर्थों में कभी बदलाव नहीं होता तथा ये हमेशा एक जैसे रहते हैं। ये लिंग, वचन, क्रिया के अनुसार वाक्यों में प्रयुक्त किये जाते हैं। इन शब्दों की तीन शक्तियाँ होती हैं : अभिधा, लक्षणा, व्यंजना। आइए आपको हिंदी के कुछ प्रसिद्ध मुहावरों के बारे में बताते हैं जिनकी सूची निम्नलिखित है:-

1. अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना - स्वयं अपनी प्रशंसा करना।
2. अक्ल का चरने जाना - समझ का अभाव होना।
3. सौ सुनार की एक लुहार की - एक महत्वपूर्ण कार्य कई अनर्गल कार्यों से ज्यादा सटीक होता है।
4. सर सलामत तो पगड़ी हजार - व्यक्ति बाधाओं से मुक्त हो जाये तो अन्य वस्तुओं की परवाह नहीं करनी चाहिए।
5. अंत भला सो सब भला - यदि कार्य का अंत अच्छा हो जाये तो पूरा कार्य ही सफल हो जाता है।
6. अधजल गगरी छलकत जाय - मूर्ख व्यक्ति ज्यादा चिल्लाता है, जबकि ज्ञानी शांत रहता है।
7. ना नौ मन तेल होगा ना राधा नाचेगी – ऐसी शर्त पर कार्य स्वीकार करना जो पूरी न हो सके।
8. नांच ना जाने आँगन टेढा - स्वंय की अकुशलता को दूसरों पर थोपना।
9. ओखली में सर दिया तो मूसलों से क्या डरना - जब आफत को निमंत्रण दे ही दिया है तो फिर डरने से क्या फायदा।
10. अन्धों में काना राजा - मूर्खों में कम विद्वान भी श्रेष्ठ माना जाता है।
11. घर का भेदी लंका ढाए - आपसी फूट के कारण कार्य में बाधा आना।
12. गरजने वाले बरसते नहीं हैं - शक्तिहीन व्यक्ति निरर्थक चिल्लाता है परन्तु वह कुछ कर नहीं सकता है।
13. बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद - मूर्ख एवं असक्षम व्यक्ति किसी अच्छी एवं मूल्यवान वस्तु का मोल नहीं जान सकता है।
14. अपना उल्लू सीधा करना - अपना मतलब निकालना।
15. ईंट से ईंट बजाना - पूरी तरह से नष्ट करना।
16. ईंट का जवाब पत्थर से देना - जबरदस्त बदला लेना।
17. ईद का चाँद होना - बहुत दिनों बाद दिखाई देना।
18. उलटी गंगा बहाना - अनहोनी हो जाना।
19. अक्ल पर पत्थर पड़ना - बुद्धि से काम न लेना।
20. आग मेँ घी डालना – क्रोध को और अधिक बढ़ाना।
21. जान है तो जहान है - अगर आप जीवित हैं, तो चीजें मायने रखती हैं।
22. जिसकी लाठी उसकी भैंस - जो ताकतवर होता है उसी की बात माननी पड़ती है।
23. जैसी करनी वैसी भरनी - जो जैसा करता है उसके साथ वैसा ही होता है।
24. ऊंची दुकान फीका पकवान - देखने में अच्छा पर असलियत में सामान्य होना।
25. मुख में राम बगल में छुरी - ऊपर से चिकनी-चुपड़ी बातें करना और अन्दर से बुरे विचार रखना।
26. सांच को आंच क्या - जो सच्चा होता है उसे किसी बात का डर नहीं होता है।
27. डूबते को तिनके का सहारा - मुसीबत में थोड़ी सी सहायता भी काफी होती है।
28. अंग–अंग खिल उठना - प्रसन्न हो जाना।
29. आकाश–पाताल एक करना – क्षमता से अधिक कठिन प्रयत्न करना।
30. कलेजे पर साँप लोटना - ईर्ष्या से जलना।
31. काँटे बिछाना - मार्ग में बाधा उत्पन्न करना।
32. कान पर जूँ न रेंगना - असर न होना।
33. खून का घूँट पीना - क्रोध को अंदर ही अंदर सहना।
34. गड़े मुर्दे उखाड़ना - पिछली बुरी बातों को याद करना।
35. गर्दन पर सवार होना - पीछे पड़े रहना।
36. गिरगिट की तरह रंग बदलना - बहुत जल्दी अपनी बात से बदलना।
37. गुल खिलाना - कोई बखेड़ा खड़ा करना/ऐसा कार्य करना जो दूसरों को उचित न लगे।
38. घाट–घाट का पानी पीना - बहुत अनुभवी होना।
39. चार दिन की चाँदनी - थोड़े दिनों का सुख/अस्थायी वैभव।
40. चिकना घड़ा - बेशर्म।
41. चुल्लू भर पानी में डूब मरना - लज्जा का अनुभव करना/शर्म के मारे मुँह न दिखाना।
42. चौदहवीं का चाँद - बहुत सुन्दर।
43. छाती पर मूँग दलना - बहुत परेशान करना/कष्ट देना।
44. छोटा मुँह बड़ी बात करना - अपनी हैसियत से ज्यादा बात कहना।
45. ज़मीन पर पैर न रखना - अत्यधिक घमण्ड करना।
46. जबान में लगाम न होना - बेमतलब बोलते जाना।
47. तलवे चाटना - खुशामद करना।
48. तारे गिनना - रात को नींद न आना/व्यग्रता से प्रतीक्षा करना।
49. जान हथेली पर रखना – प्राणों की परवाह ना करना।
50. चिराग तले अन्धेरा - सुविधा प्रदान करने वाले को स्वयं सुविधा न मिलना।

यह तो हुई हिन्दी मुहावरों की बात, अब आपको हम कुछ पंजाबी मुहावरों के बारे में भी बताएंगे ताकि आप वर्षों से मेरठ में पंजाबी प्रवासियों के प्रभाव की पहचान कर सके।

1. घर दा जोगी जोगरा, बाहर दा जोगी सिद्ध - एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मानित किया जाता है, अपने घर में छोड़कर।
2. उडीक नालों काह्ल चंगी - किसी और का इंतज़ार करने के बजाए स्वयं कार्य करना बेहतर है।
3. सुनो सब दी करो अपनी - सब का दिया सुझाव सुनो और जो खुद को सही लगे वही करो।
4. जगदे दा लख सुत्ते दा कख - जो लोग हमेशा सक्रिय रहते हैं वे दुनिया में तरक्की करते हैं, जो सोये रहते हैं वे कुछ नहीं कर सकते।
5. आप बुरे तां जग बुरा, आप भले तां जग भला - अच्छे बनें, लोग आपके लिए अच्छे बने रहेंगे, बुरे बने रहोगे तो दूसरों से भी यही उम्मीद रखना।
6. नैन मिला के कदे चैन नइ मिलदा - प्यार में पड़ना, बेचैनी को गले लगाना है।
7. कोठी वाला रोये, छप्पर वाला सोये - अमीर बेचैन हैं, जबकि गरीब शांति से सोते हैं।
8. पल्ले नइ ढेला, करदी मेला मेला – पैसा जेब में ना होते हुए भी उसे खर्चने की इच्छा रखना।
9. तू वि रानी मैं वि रानी, कौन भरेगा पानी - जहां हर कोई वी.आई.पी. सुलूक चाहता है, वहाँ कोई काम नहीं होता है।
10. राँझा सब दा साँझा – जिस ईश्वर को सभी अलग-अलग नाम से पुकार कर उसकी ओर जाना चाहते हैं, वह एक ही है।

संदर्भ :-
1.https://hi.wikiquote.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%87
2.https://en.wikiquote.org/wiki/Indian_proverbs
3.https://jobloo.in/hindi-muhavare-with-meanings-and-sentences/
4.http://pkhedar.uiwap.com/Gen.Hindi/muhavare
5.https://www.rajasthangyan.com/hindi?nid=19
6.https://www.scoopwhoop.com/Punjabi-Proverbs/#.ihc1n1ozx



RECENT POST

  • मेरठवासियों के लिए सिर्फ 170 किमी दूर हिल स्टेशन
    पर्वत, चोटी व पठार

     18-12-2018 11:58 AM


  • लुप्त होने के मार्ग पर है बुनाई और क्रोशिया की कला
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     17-12-2018 01:59 PM


  • दुनिया का सबसे ठंडा निवास क्षेत्र, ओयम्याकोन
    जलवायु व ऋतु

     16-12-2018 10:00 AM


  • 1857 की क्रांति में मेरठ व बागपत के आम नागरिकों का योगदान
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     15-12-2018 02:10 PM


  • मिठास की रानी चीनी का इतिहास
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     14-12-2018 12:12 PM


  • वृक्षों का एक लघु स्वरूप 'बोन्साई '
    शारीरिक

     13-12-2018 04:00 PM


  • निरर्थक नहीं वरन् पर्यावरण का अभिन्‍न अंग है काई
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     12-12-2018 01:24 PM


  • विज्ञान का एक अद्वितीय स्‍वरूप जैव प्रौद्योगिकी
    डीएनए

     11-12-2018 01:09 PM


  • पौधों के नहीं बल्कि मानव के ज़्यादा करीब हैं मशरूम
    फंफूद, कुकुरमुत्ता

     10-12-2018 01:18 PM


  • रेडियो का आविष्कार और समय के साथ उसका सफ़र
    संचार एवं संचार यन्त्र

     09-12-2018 10:00 PM