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फिल्‍म जगत द्वारा समलैंगिकता का चित्रलेखन

मेरठ

 08-09-2018 12:02 PM
सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

आज की फिल्‍में समाज के सभी छुए अनछुए तथ्‍यों को उजागर करने में सक्षम हैं। तो चलिए जानें एक एसे ही अनछुए तथ्‍य समलैंगिकता का सिनेमा में आगमन। सर्वप्रथम 1894 में अमेरिका की एक फिल्‍म द डिक्‍सन एक्‍सपेरिमेंटल साउंड (The Dickson Experimental Sound Film) में पहली बार 17 सेकेंड के लिए दो समलैंगिक पुरूषों को डांस करते हुए दिखाया गया, जिसने दर्शकों के मध्‍य असहजता उत्‍पन्‍न की। लेकिन धीरे धीरे हॉलिवुड में समलैंगिकता को उजागर किया गया। भारतीय सिनेमा समलैंगिकता को दर्शाने के लिए अभी भी असमंजस में था, यहां सर्वप्रथम दीपा मेहता ने इस तथ्‍य को उजागर करने का साहस दिखाया, उनकी फिल्‍म फायर (1996) समलैंगिकता पर बनीं थी। इसके बाद भारत में इस तथ्‍य पर अनेक फिल्‍में बनीं जिनमें से कुछ का विवरण इस प्रकार है :

1.फायर (1996)

यह समलैंगिकता पर बनी पहली भारतीय फिल्‍म थी, जिसने पुरानी विचारधारा रखने वालों के समक्ष एक बहुत बड़ा समाज का प्रतिबिंब लाकर खड़ा कर दिया।

2.माई ब्रदर निखिल (2005)

यह फिल्‍म भी समलैंगिकता को एक असामान्‍य और मजाक के रूप में नहीं देखती है। इस फिल्‍म में एक समलैंगिक जोड़े को समाज की रूढि़वादिता से जूझते हुए दिखया गया है साथ ही इसमें एड्स पर भी बात की गयी जिसके लिए यहां उतनी जागरूकता नहीं थी।

3.आई एम (2011)

इस फिल्‍म में दर्शाया गया है कि कैसे कोई पुलिस वाला अनुच्‍छेद 377 का दुरूपयोग कर मुम्‍बई के एक समलैंगिक व्‍यक्ति को प्रताड़ित करते हैं।

4.मार्गरिता विद अ स्‍ट्रो (2014)

यह फिल्‍म विकलांग लोगों के मध्‍य समलैंगिकता और कामुकता को दर्शाती है। साथ ही इसमें समलैंगिक लोगों के प्रति भारतीय लोगों की मानसिकता को दर्शाया गया है।

5.बॉम्‍बे बॉयज (1998)

पहली भारतीय फिल्‍म जो शहरों में समलैंगिक लोगों के जीवन में इतनी गंभीरता से बात करती है।

ऐसी ही कुछ अन्‍य फिल्‍में मित्राची गोष्‍ता (एक दोस्‍त की कहानी), अरेक्‍ति प्रेमर गोल्‍पो (एक प्रेम कथा), रान्‍दु पेनकुत्तिकल (दो लड़कियां), सांचाराम (यात्रा), बॉम्‍बगे आदि। ये सभी समलैंगिक लोगों की किसी ना किसी समस्‍या को उजागर करती हैं तथा समाज के साथ उनके संघर्ष को दर्शाती हैं। फिल्‍म की कहानी के साथ ही कुछ पात्र अपने दमदार प्रदर्शन के माध्‍यम से हमारी मानसिकता को परिवर्तित करने में सहायक सिद्ध हुए हैं। वे हैं फवाद खान (कपूर एंड संस), मनोज बाजपेयी (अलीगढ़), जय और शाहिल (लव), रणदीप हुड्डा (बॉम्‍बे टॉल्किस), उमर (आई एम), समीर सोनी (फेशन) आदि। कई फिल्‍में ऐसी भी हैं जिन्‍होंने समलैंगिक समुदाय को सही सिद्ध किया है।

6 सितंबर 2018 को भारतीय उच्‍चतम न्यायालय ने समलैंगिकता को अनुच्‍छेद 377 का खंडन करते हुए अपराध की श्रेणी से बाहर लाया है, किंतु भारतीय फिल्‍म जगत इस चीज को कई वर्ष पूर्व से दर्शाने का प्रयास कर रहा है। जिसका उदाहरण उपरोक्‍त फिल्‍में हैं।

संदर्भ :

1. http://www.womensweb.in/2016/02/10-movies-that-display-lgbt-community-sensitively/
2. https://www.thenewsminute.com/article/indian-cinema-and-its-misguided-portrayal-lgbt-community-45508
3. https://www.indiatimes.com/entertainment/bollywood/7-greatest-gay-characters-in-bollywood-films-that-helped-us-open-our-minds-about-the-community-324928.html
4. https://buddybits.com/2018/02/lgbt-bollywood-movies/
5. https://en.wikipedia.org/wiki/Category:Indian_LGBT-related_films



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