मेरठ के तीन घुड़सवारों ने किया भारत को गौरवान्वित

मेरठ

 07-09-2018 02:52 PM
हथियार व खिलौने

क्रांतिधरा मेरठ की जमीं पर वर्षों पहले स्थापित किए गए रिमाउंट वेटनरी कोर (Remount and Veterinary Corps) सेंटर एंड कॉलेज के घुड़सवारों ने इंडोनेशिया के जकार्ता में चल रहे 18वें एशियाई खेलों में दो रजत पदक जीत कर भारत को गौरवान्वित कर दिया है। भारतीय टीम में मेरठ की आर.वी.सी. के तीन घुड़सवार जितेंद्र सिंह, राकेश कुमार और ए.एस.सी. के मेजर आशीष मलिक की बदौलत हमें ये सफलता प्राप्त हुई है। आर.वी.सी. में बनाये गए आर्मी एक्वेस्ट्रियन नोड (Army Equestrian Node) में काफी समय से घुड़सवारों की ट्रेनिंग एशियाई खेलों को ध्यान में रखते हुए चलाई जा रही थी। समय-समय पर अतंरर्राष्ट्रीय प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण दिलवाया गया था, इसके अलावा घुड़सवारों को प्रशिक्षण के लिए फ्रांस भी भेजा गया था। इसी का नतीजा पदक के रूप में आज हमारे सामने है।

इस जीत के बाद से भारतीय टीम ने 2020 में होने वाले ओलंपिक की तैयारी शुरू कर दी है। हाल में ही अंतरराष्ट्रीय घुड़सवारी संघ (FEI) के अधिकारी मेरठ में कॉनकोर्स कॉम्प्लेट इंटरनेशनल (Concours Complet International) की जांच के लिये आए थे। उन्होनें बताया कि सेना द्वारा संचालित घुड़सवारी की सुविधा उच्चतम श्रेणी की है। यह अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों के लिए हर तरीके से सुसज्जित और तैयार हैं।

भारत में घुड़सवारी का खेल प्राचीनतम समय से ही खेला जा रहा है। घुड़सवारी गतिविधियों और इस खेल के साक्ष्य मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खुदाई, नक्काशी और सिक्के में भी पाए गए हैं। रामायण काल और वैदिक काल (2500 ईसा पूर्व - 600 ईसा पूर्व) से ही भारत में रथों की दौड़ सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक थी और आज भी इस खेल की लोकप्रियता बनी हुई है। वर्तमान में घुड़सवारी प्रतियोगिताओं में तीन गेम ड्रेसेज (Dressage), क्रॉस कंट्री (Cross Country) और शो जंपिंग (Show Jumping) शामिल होते हैं।

आजादी के बाद 1967 में भारत में घुड़सवारी खेल के विकास के लिए भारतीय घुड़सवारी संघ को संस्था पंजीकरण अधिनियम (1860 का अधिनियम xxi) के तहत रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटी के साथ विधिवत पंजीकृत किया गया था। घुड़सवारी खेल के लिए आपसी जुनून से प्रेरित लोगों के एक समूह द्वारा इसे स्थापित किया गया था और इसके बाद से यह EFI के रूप में जाना जाता है। EFI में अब 1030 से अधिक सदस्य हैं, और नियमित रूप से विदेशी प्रतिस्पर्धाओं के लिए यहाँ से सवार भेजता आ रहा है। भारत में घुड़सवारी के खेल दिल्ली, मेरठ, बैंगलोर, चंडीगढ़, जयपुर, कोलकाता, चेन्नई, पांडिचेरी, पुणे, मुंबई और भोपाल जैसे कुछ क्षेत्रों में केंद्रित हैं।

भारतीय घुड़सवारी संघ 1971 में FEI में शामिल हो गया था और 1982 से एशियाई खेलों में घुड़सवारी की सभी प्रतियोगिताओं में टीमों को भेज रहा है।

संदर्भ:
1.https://www.fei.org/stories/history-eventing?&list=2&content=2
2.http://www.efinf.org/history.html
3.https://timesofindia.indiatimes.com/city/meerut/army-equestrian-team-from-meerut-wins-silver-in-asian-games/articleshow/65554025.cms
4.https://timesofindia.indiatimes.com/city/meerut/Meeruts-equestrian-facility-top-class-say-FEI-officials/articleshow/45312788.cms



RECENT POST

  • शहीद भगत सिंह जी के विचार
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     23-03-2019 07:00 AM


  • मेरठ के नाम की उत्पत्ति का इतिहास
    मघ्यकाल के पहले : 1000 ईस्वी से 1450 ईस्वी तक

     22-03-2019 09:01 AM


  • रंग जमाती होली आयी
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     21-03-2019 01:35 PM


  • होली से संबंधित पौराणिक कथाएँ
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     20-03-2019 12:53 PM


  • बौद्धों धर्म के लोगों को चमड़े के जूते पहनने से प्रतिबंधित क्यों किया गया?
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     19-03-2019 07:04 AM


  • महाभारत से संबंधित एक ऐतिहासिक शहर कर्णवास
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     18-03-2019 07:40 AM


  • फूल कैसे खिलते हैं?
    बागवानी के पौधे (बागान)

     17-03-2019 09:00 AM


  • भारत में तांबे के भंडार और खनन
    खदान

     16-03-2019 09:00 AM


  • क्या है पौधो के डीएनए की संरचना?
    डीएनए

     15-03-2019 09:00 AM


  • अकबर के शासन काल में मेरठ में थी तांबे के सिक्कों की टकसाल
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     14-03-2019 09:00 AM