भला देसी नस्ल की गाय कैसे बेहतर है विदेशी नस्लों से

मेरठ

 27-08-2018 12:50 PM
शारीरिक

आज यह बात किसी से छिपी नहीं है कि भारत में दूध उत्पादन बहुत बड़े एक स्तर पर होता है। दूध उत्पादन में भैंस और गाय दोनों का ही मुख्य स्थान है। परंतु गाय के दूध को स्वास्थ्य के नजरिए से उत्तम माना जाता है। भारत में कई प्रकार की गायों की देशी नस्लें पायी जाती हैं। जिनमें से अभी तक लोगों को रेड सिन्धी, साहीवाल, गिर, देवनी, थारपारकर जैसी दुधारू नस्लों के बारे में ही पता है। परंतु भारत में कुल मिलाकर गायों की 37 शुद्ध नस्लें पाई जाती हैं। मेरठ जिले में लगबघ 8,22,000 मवेशियों की संख्या है जिसमे में से 1,55,338 गाय है।

भारत में देसी गायों की‍ नस्लों की सूची -
1.हरियाणा (हरियाणा)
2.गिर, कांकरेज (गुजरात)
3.मालवी (मालवा मध्यप्रदेश)
4. लाल कंधारी (बीड़ महाराष्ट्र)
5. राठी नागौरी (राजस्थान)
5. खिल्लारी (महाराष्ट्र)
6. वेचुर (केरल)
5. अंगोल (आन्ध्र प्रदेश)
6. नीमाड़ी (मध्यप्रदेश)
7. सीरी (सिकिकम एवं भूटान)
8. मेवाती (हरियाणा)
9. कंगायम (तमिलनाडु)
10. बरगूर (तमिलनाडु)
11. अंगोल (तमिलनाडु)
12. वेचूर (केरल)
13. कृष्णाबेली (महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश)
14. डांगी (महाराष्ट्र)
15. अमृतमहाल (कर्नाटक)
16. पवार प्रजाति (उत्तर प्रदेश)

परंतु विडम्बना यह है कि हमारे देश में पर्याप्त गोधन होने के बावजूद भी विदेशी नस्लें आयात की जाती हैं। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि सारी में तो नही परंतु अधिकांश विदेशी गोवंश (जिन्हें क्रॉस प्रजनन के माध्यम से दूध उत्पादन बढ़ाने के लिये बनाया गया है जैसे हॅालस्टीन, जर्सी आदि) के दूध में ‘बीटा कैसीन A1’ नामक प्रोटीन पाया जाता है, और भारतीय मूल की अधिकांश गायों में दूध में ‘बीटा कैसीन A2’ पाया जाता है। आप सोच रहे होंगे की A1 प्रोटीन और A2 प्रोटीन में क्या अंतर है ? कौन सा ज्यादा फायदेमंद है और क्यों?

यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की विदेशी गायों या हाइब्रिड (Hybrid) नस्लों के दूध में A1 होता है, और A2 भारतीय मूल की गायों के दूध में मिलता है। इन प्रोटीनों में केवल अमीनो एसिड का अंतर है। दरअसल, दूध में जो प्रोटीन होता है, वह पेप्टाइड्स में बदलता है, और यह पेप्टाइड्स(peptides) बाद में एमीनो एसिड्स(Amino Acid) का स्वरूप ले लेते हैं। इस तरह से दूध पचाने में आसानी हो जाती है। परंतु A1 बीटा कैसिन में पेप्टाइड्स को अमीनो एसिड्स में ब्रेक नहीं किया जा सकता है, क्योकि इसमें बीसीएम7(BCM 7) नामक प्रोटीन पाया जाता है। इस कारण से A1 दूध को पचाने में तकलीफ होती है, जो कई तरह के रोगों जैसे डायबिटीज, हृदय के रोग, बच्चों में सायकोमोटर का धीमा विकास, ऑटिज्म, सिजोफ्रेनिया आदि को जन्म देता है।

वहीं दूसरी ओर A2 यानी भारतीय गौवंश के दूध में लैक्टोज को आसानी पचाया जा सकता है, जो इसे गुणकारी बनाता है। बच्चों के लिए A2 दूध ही श्रेष्ठ माना जाता है। क्योंकि इससे बच्चों का मोटापा नहीं बढ़ता है, दिमागी क्षमता बढ़ती है, तथा पाचन में वृद्धि होती है। इसके दूध में अल्बुमिनाइड, वसा, क्षार, लवण तथा कार्बोहाइड्रेड(Carbohydrate), फैटी एसिड(Fatty Acid), ओमेगा(Omega 6) तो हैं ही साथ ही समस्त विटामिन ए, बी, सी, डी व ई भी प्रचुर मात्रा में विद्यमान हैं।

संदर्भ:

1.http://www.biodiversityofindia.org/index.php?title=Native_cow_varieties_of_India
2.https://www.linkedin.com/pulse/difference-between-indian-native-a2-cow-milk-cross-breed-osk-reddy/
3.https://www.downtoearth.org.in/blog/the-deshi-cow-milk-jinx-45095



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