क्यों ली थी आयरिशों ने मेरठ में पनाह?

मेरठ

 13-08-2018 02:46 PM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

प्रवास आज से कई सौ साल से हो रहा है जिसके लिए विभिन्‍न कारण उत्‍तरदायी होते हैं। जिनमें से एक है 'अकाल'। इस शब्द से ही इसकी भयावहता का आकलन किया जा सकता है, विश्व ने कई तरह के अकालों का सामना किया है। तो इसी संदर्भ में बात करें 1845 में आयरलैंड में आये अकाल की जिसने लोगों को यूरोप से भारत तक आवास के लिए मजबूर कर दिया। औपनिवेशिक काल के दौरान आयरलैंड के कृषकों को ब्रिटिश बाजार में खाद्य आपूर्ति के लिए संघर्ष करना पड़ा। 19वीं शताब्दी तक आयरलेंड में कृषि के लिए उपलब्ध भूमि पर प्रमुख रूप से आलू का उत्पादन किया जाता था। विभिन्न पौष्टिकता से भरपूर आलू की फसल के लिए आयरिश मिट्टी काफी उपजाऊ थी।

दुर्भाग्यवश इस फसल पर ‘पोटेटो ब्लाईट’ (Potato blight: ब्लाईट का अर्थ, एक पौधों की बीमारी, जो कि विशेष रूप से एक कवक के कारण होती है) नामक बीमारी फैल गयी। जिसका सामना करने या इलाज ढूंढ़ने में यहाँ के लोग सक्षम नहीं थे, और ना ही इसके नुकसान की भरपाई के लिए तैयार थे। 1845 में अमेरिका से फैली फायटोप्थोरा (Phytopthora: पौधीय बीमारी) आयरलैंड तक पहुंची और उस वर्ष आयरलैंड असामान्य रूप से ठंडा नम मौसम झेल रहा था जिसके कारण ब्लाईट को पनाह मिली, जिसने आलू की फसल नष्ट कर दिया। यह सिलसिला 1846-1849 तक चलता रहा। और क्योंकि यहाँ की प्रमुख फसल आलू थी, इस कारण यहाँ के लोगों को भुखमरी का सामना करना पड़ा।

हालांकि ग्रेट ब्रिटेन के प्रधान मंत्री सर रॉबर्ट पील ने आयरलैंड से अनुपयोगी अनाज के निर्यात की अनुमति जारी रखी, परन्तु साथ ही उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका से उनके लिए मक्का के आयात को अधिकृत कर भुखमरी से राहत प्रदान करने के लिये अपना संपूर्ण योगदान दिया। परन्तु इस अकाल से छुटकारा पाने के लिए ब्रिटिश सरकार के प्रयास अपर्याप्त हो रहे थे।

अकाल के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में, 1844 में आयरलैंड की लगभग 84 लाख की आबादी, 1851 तक 66 लाख हो गई थी। इस दौरान लगभग दस लाख लोग भूख, टाइफस और अन्य अकाल से संबंधित बीमारियों से मारे गए, और अधिकांश लोग (करीब 10 लाख) आश्रय और काम के लिए विदेश में प्रवासित हुए, तथा इस दौरान मेरठ कैंट में भी कई आयरिश प्रवासियों का तांता देखा गया था। कितने ही ऐसे परिवार थे जो उस समय भारत में मेरठ में आकर बस गए तथा उनकी आगे की पीढ़ियों ने भी कई साल यहीं गुज़ारे। 1921 में जब आयरलैंड ने आजादी हासिल की, तब तक इसकी आबादी 1840 के दशक की शुरुआत के मुकाबले आधी हो चुकी थी।

संदर्भ :
1.https://www.britannica.com/event/Great-Famine-Irish-history
2.https://www.irishcentral.com/news/new-facts-about-great-famine-emigration-out-of-ireland-revealed-139540423-237788421
3.https://en.wikipedia.org/wiki/Great_Famine_%28Ireland%29
4.https://en.wikipedia.org/wiki/Irish_Indians



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