Machine Translator

आज से 73 साल पहले हुए हिरोशिमा-नागासाकी हमले पर गांधीजी की प्रतिक्रिया

मेरठ

 09-08-2018 02:03 PM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

विश्व के इतिहास में काले अक्षरों से लिखे वो दिन जिनके बारे में हम आज भी पढ़ कर सहम जाते हैं, वो दिन जब मानव अपनी इंसानियत को भूल गया था। हिरोशिमा के लोगों के लिए यह दिन भी हर सुबह जैसा ही था। लोग अपने रोज़मर्रा के कामों को निपटा रहे थे, इस बात से अंजान कि वहाँ सब कुछ चंद पलों में ही ख़त्म होने वाला है। उस दिन कैलेण्डर में तारीख थी 6 अगस्त 1945। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने एक बेहद गोपनीय अभियान में जापान के हिरोशिमा पर अमेरिकी वायु सेना द्वारा परमाणु बम "लिटिल बॉय" (Little Boy) गिरवाया था। साथ ही 9 अगस्त 1945 को अमरीका ने दोबारा नागासाकी पर "फ़ैट मैन" (Fat Man) परमाणु बम गिराया। इस हमले में लाखों लोग मारे गए थे। उसके बाद जापान ने समर्पण किया। परमाणु हमलों की त्रासदी के बाद से जापान परमाणु हथियारों का विरोध करता रहा है।

जब गांधी जी ने खबर सुनी कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापान में परमाणु बम का इस्तेमाल किया, तो उन्होंने कहा कि "मैं अपने शरीर को हिला भी नहीं पाया जब मैंने पहली बार सुना कि परमाणु बम ने हिरोशिमा को नष्ट कर दिया। इसके विपरीत, मैंने खुद से कहा कि यदि अब भी इस दुनिया ने अहिंसा को नहीं अपनाया, तो सम्पूर्ण मानव जाति आत्महत्या के मंत्र में बंध जाएगी।"

जब उनसे पूछा गया कि क्या इस घटना से अहिंसा में उनका विश्वास डगमगाया है, तो उन्होंने कहा कि ऐसा विश्वास ही एकमात्र चीज है जो परमाणु बम से भी नष्ट नहीं हो सकती है। साथ ही साथ उन्होनें हमें याद दिलाया कि काउंटर-बम (Counter Bomb) इस घटना के दुःख को नष्ट नहीं कर सकता बस इस पर शर्मिंदा हो सकता है, केवल प्यार ही हमें इससे उभरने की ताकत दे सकता है। हिंसा से हिंसा नष्ट नहीं हो सकती है। द्वेष केवल नफरत की गहराई को बढ़ाता है। मानव जाति को केवल अहिंसा के माध्यम से हिंसा से बाहर निकलना है। नफरत को केवल प्यार से दूर किया जा सकता है।

1945 में, संयुक्त राज्य अमरीका परमाणु हथियारों का एकमात्र निर्माता था। आज दुनिया में ऐसे घातक हथियारों के साथ नौ देश हैं - USA, रूस, फ्रांस, UK, चीन, इज़राइल, भारत, पाकिस्तान और उत्तरी कोरिया। अगर दुनिया की इन बड़ी ताकतों के बीच परमाणु युद्ध हो जाए तो इससे सीधे तौर पर दुनिया की लाखों की आबादी समाप्‍त हो जाएगी। यही नहीं, इसके बाद पृथ्वी पर निम्न तापमान और सूखे का असर सैकड़ों सालों तक रहेगा। गांधी जी द्वारा बताए गये आहिंसा के मार्ग पर चलने से ही आज लोगों के दिलों में मानवता की भावना उजागर हो सकती है। हमें ध्यान रखना होगा कि परमाणु-शक्ति का शांतिपूर्ण उपयोग हो, वह विनाश का हथियार नहीं वरन विकास का औज़ार बने।

संदर्भ:
1.https://mettacenter.org/daily-metta/gandhi-and-the-atom-bomb-daily-metta/
2.https://www.quora.com/What-was-the-reaction-s-of-Mahatma-Gandhi-after-the-twin-Atom-Bomb-blast-on-Japan-in-August-1945
3.https://www.huffingtonpost.in/sudheendra-kulkarni/hiroshimas-message-nuclea_b_7948732.html



RECENT POST

  • कैसे सम्बन्ध है मेरठ और संगीत के पटियाला घराने में
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     21-09-2019 12:23 PM


  • गंध और शहरीकरण के बीच संबंध
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     20-09-2019 12:14 PM


  • भारतीय खेल पच्चीसी और चौपड़ का इतिहास एवं नियम
    हथियार व खिलौने

     19-09-2019 11:59 AM


  • भारतीय स्वास्थ्य सेवा द्वारा एंटीबायोटिक प्रतिरोध से लड़ने की पहल
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     18-09-2019 11:08 AM


  • क्या सम्बन्ध है आगरा की शान, पेठा और ताजमहल में
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     17-09-2019 11:09 AM


  • क्या हैं अनुवांशिक बीमारियां और उनके कारण?
    डीएनए

     16-09-2019 01:35 PM


  • आखिर कौन हैं भारत के मेट्रोमेन (Metroman)
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     15-09-2019 02:27 PM


  • यमुना नहर से है आई.आई.टी. रुड़की का गहरा संबंध
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     14-09-2019 10:30 AM


  • मेरठ शहर और इसमें फव्वारों का इतिहास
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     13-09-2019 01:42 PM


  • क्या हैं मछलियों की आबादी में आ रही गिरावट के प्रमुख कारण
    मछलियाँ व उभयचर

     12-09-2019 10:30 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.