मेरठ में बंट रहीं फर्जी डिग्रीयाँ

मेरठ

 26-07-2018 02:50 PM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

शिक्षा कौशल और ज्ञान प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षा के लिए हमारा पहला कदम हमारे घर से शुरू होता है और फिर हमारे बाल विहार, स्कूलों और कॉलेजों तक चलता है। शिक्षा एक व्यक्ति के कौशल में सुधार करती है, और उसे सकारात्मक वातावरण देने में मदद करते हुए, सफल जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है।

हमारे विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास के साथ, हमारी जरूरतों में भी वृद्धि हुई है। भोजन, आश्रय और कपड़ों जैसी जीवन की बुनियादी जरूरतों के अलावा, हमें मोबाइल फोन, एयर कंडीशनर, कार इत्यादि जैसे अन्य आराम की भी आवश्यकता है। बढ़ती जरूरतों ने हमारे समाज में अपराधों में भी वृद्धि की है, क्योंकि ऐसे कई छात्र हैं जो प्रतियोगिता का सामना करने से डरते हैं और शॉर्ट कट (Short Cut) पाने की तलाश में लगे रहते हैं। प्रौद्योगिकी के अपडेट ने समाज में आपराधिक मानसिकता के लोगों को भी बढ़ाया है। इन आपराधिक मानसिकता वाले लोगों ने शिक्षा को भी शुद्ध नहीं छोड़ा है। नवीनतम उदाहरण मेरठ में हुए एक अपराध के बारे में है।

मेरठ एक महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्र है। यहां अत्यधिक प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों, और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थापना हो रही है जिससे मेरठ की अर्थव्यवस्था बेहतर हो रही है। परंतु इस बढ़ते व्यावसायीकरण के कई नुकसान भी हैं। यहाँ कई छात्र ऐसे भी हैं जो अपने नकली प्रमाणपत्र बना रहे हैं, और बिना किसी कड़ी मेहनत के अच्छी नौकरियां प्राप्त कर रहे हैं।

हाल ही में यू.पी. पुलिस ने ऐसे ही एक फर्जी-डिग्री रैकेट (Racket) का भांडाफोड़ किया, और एक गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया जो निजी विश्वविद्यालयों की जाली अंक तालिका तैयार कर रहे थे। यह रैकेट पिछले चार सालों से चल रहा था और नकली उत्तर पत्रकों के माध्यम से 600 से अधिक छात्रों को धोखाधड़ी से डॉक्टर की डिग्री हासिल करने में मदद की गयी थी।

फर्जी डिग्री बनाना तो एक समस्या है ही, साथ ही साथ डिग्री पाने का जुनून भी एक समस्या है। इन्टरनेट (Internet) के इस ज़माने में बात यहाँ तक बढ़ गयी है कि ये फर्जी डिग्री प्रदान करने वाले आज इन्टरनेट पर खुले आम इन फर्जी डिग्रीयों का विज्ञापन दे रहे हैं।

ऐसे गुनाह गुनहगारों के लिए तो खतरनाक हैं ही, साथ ही साथ ये समाज के लिए भी खतरा खड़ा करते हैं। सोचिये यदि ऐसे डॉक्टरों से मरीज़ परामर्श करेंगे तो उनके लिए यह कितना जानलेवा साबित हो सकता है। और सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, ऐसी डिग्री वाले इंजीनियर (Engineer) यदि हमारे सड़क और पुल का निर्माण करते हैं तो देश कैसे प्रगति कर सकता है।

एक तरफ मेरठ की संस्थाओं से कई छात्र मेहनत और परिश्रम से देश के अच्छे नागरिक बन रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग हैं जो नकली दस्तावेज़ बनाकर और उन्हें अकुशल छात्रों को देकर शहर और देश का शोषण कर रहे हैं। सरकार को इन धोखेबाज़ों के प्रति एक बड़े से बड़ा कदम उठाने की ज़रूरत है जिससे हम अपने कुशल छात्रों को समाज के विकास की दिशा में सहेज सकते हैं।

संदर्भ:
1.https://www.thehindu.com/features/education/issues/watch-out-for-the-fake/article3807971.ece
2.https://www.outlookindia.com/newsscroll/meerut-interstate-marksheet-racket-busted-five-arrested/1352987
3.https://thewire.in/education/fake-degrees-is-not-the-problem-obsession-with-degrees-is



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