मेरठ के चावल: खेतों से फैशन तक

मेरठ

 20-07-2018 04:12 PM
द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

विश्‍व के खाद्यानों में चावल का प्रमुख स्‍थान है जिसकी उत्‍पादकता में भारत दूसरे नंबर में है। भारत के पारंपरिक रीति रिवाज़ चावल के बिना पूर्ण नहीं होते हैं जैसे चावलों के बिना हमारी पूजा संपन्‍न नहीं हो सकती तथा माथे का तिलक भी चावल के साथ ही लगाया जाता है, जो कि हमारी संस्‍कृति का प्रतीक है और बात करें भारत के खाने की थाली की तो वह भी चावल के बीना अधुरी है। भारत के प्रमुख चावल उत्‍पादक राज्‍यों में पश्चिम बंगाल, पंजाब, बिहार, छत्‍तीसगढ़ और असम आदि शामिल हैं।

भारत में चावल की बात करें और उत्‍तर प्रदेश का नाम ना आये तो कुछ अधुरा लगेगा। उत्‍तर प्रदेश के मेरठ जिले में चावल प्रमुख उत्‍पादक फसल है यहां चावल के उत्‍पादन के लिए आवश्‍यक वातावरण है जैसे कि उपोष्ण जलवायु, दोमट व चिकनी मिट्टी, पर्याप्‍त जल व तापमान इत्‍यादि।

मेरठ का बासमती भारत में प्रसिद्ध है। चावलों के माध्‍यम से भारत के विभिन्‍न प्रकार के खानपान तैयार किए जाते हैं जिनमें प्रमुख हैं भिन्‍न भिन्‍न प्रकार की बिरयानी, पापड़, कचरी, खीर, अलग अलग तरह के पुलाव इत्‍य‍ादि। विभिन्‍न प्रकार के पोषक तत्‍वों कार्बोहाइड्रेड(carbohydtrate), वसा, प्रोटीन, शर्करा, कैल्‍शियम और लोह आदि की आपूर्ति हमारे शरीर में चावलों द्वारा होती है।

आज का युग फैशन का युग कहा जाता है, जिसमें विभिन्‍न प्रकार के प्रयोग किये जा रहे हैं। रोज लोग कुछ नया पहनना या खरीदना पसंद करते हैं यहां भी चावलों ने अपनी भूमिका निभाई है। चावल का रचनात्मक तरीके से भी प्रयोग किया जाता है, चावल के उपयोग से हम मोती बना सकते हैं, यह बहुत ही सरल और रचनात्मक है। चावलों के मोती तैयार करके विभिन्‍न आभूषण बनाएं जैसे जा रहे हैं जैसे गुरिया या मनका , जो लोगों द्वारा बहुतायात में पसंद किए जा रहे हैं। इस माध्‍यम से भी व्‍यवसाय का एक नया रूप उभरकर सामने आया है। अधिकांश भारतीय महिलाएं गहने पहनना पसंद करती हैं, चावल से बनें इन मोतियों से गहनों के क्षेत्र में एक नया बदलाव आयेगा।

इस प्रकार हम देख सकते हैं कि चावल हमारी खाद्य आपूर्ति ही नहीं कर रहा वरन् वर्तमान युग के साथ हमारे फैशन की मांग को पूर्ण करने में भी अपनी भूमिका निभा रहा है। चावल भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था का भी बहुत बड़ा हिस्‍सा है।

संदर्भ:
1.http://books.irri.org/8122402542_content.pdf
2.http://agmip-ie.alterra.wur.nl/indo-gangetic-basin1
3.http://onelmon.com/blog/2013/03/rice-beads/
4.Köhler–s Medizinal-Pflanzen by Hermann Adolph Köhles



RECENT POST

  • सदियों से फैशन के बदलते रूप को प्रदर्शित करती हैं, फ़यूम मम्मी पोर्ट्रेट्स
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     28-11-2020 07:10 PM


  • वृक्ष लगाने की एक अद्भुत जापानी कला बोन्साई (Bonsai)
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     28-11-2020 09:03 AM


  • गंध महसूस करने की शक्ति में शहरीकरण का प्रभाव
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     27-11-2020 08:34 AM


  • विशिष्ट विषयों और प्रतीकों पर आधारित है, जैन कला
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     26-11-2020 09:05 AM


  • सेना में बैंड की शुरूआत और इसका विस्‍तार
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     25-11-2020 10:26 AM


  • अंतिम ‘वस्तुओं’ के अध्ययन से सम्बंधित है, ईसाई एस्केटोलॉजी
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     24-11-2020 08:13 AM


  • क्वांटम कंप्यूटिंग को रेखांकित करते हैं, क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांत
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     22-11-2020 10:22 AM


  • धार्मिक महत्व के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व से भी जुड़ा है, श्री औघड़नाथ शिव मन्दिर
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     22-11-2020 08:16 PM


  • हिन्‍दू-मुस्लिम की एकता का प्रतीक हज़रत शाहपीर की दरगाह
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     21-11-2020 06:25 AM


  • व्यवसायों और उद्यमशीलता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं, प्रवासी नागरिक
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     20-11-2020 09:33 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id