हम मेरठियों की खड़ी बोली

मेरठ

 13-06-2018 01:56 PM
ध्वनि 2- भाषायें

खड़ी से अर्थ है ‘खरी’ अर्थात् ‘शुद्ध’, मतलब ‘ठेठ हिन्दी बोली’। शु़द्ध अथवा ठेठ हिन्दी बोली या भाषा को उस समय खरी या खड़ी बोली के नाम से संबोधित किया गया जब हिंदुस्तान में अरबी, फारसी, और हिंदुस्तानी मिश्रित शब्दों व उर्दू भाषा का चलन था। लगभग 18वीं शताब्दी के आरम्भ में कुछ हिन्दी गद्यकारों ने ठेठ हिन्दी में लिखना शुरू किया था। खड़ी बोली से तात्पर्य खड़ी बोली हिन्दी से है, जिसे भारतीय संविधान ने राजभाषा के रूप में स्वीकार किया है।

खड़ी बोली पश्चिम रूहेलखण्ड, गंगा के उत्तरी दोआब और अंबाला जिले की उपभाषा है, जो ग्रामीण जनता के द्वारा मातृभाषा के रूप में बोली जाती है। इस प्रदेश में मेरठ, रामपुर, बिजनौर, मुज़फ्फरनगर, मुरादाबाद, सहारनपुर, देहरादून का मैदानी भाग, अंबाला और भूतपूर्व पटियाला रियासत के पूर्वी भाग आते हैं।

आज जिस हिन्दी भाषा को तीस करोड़ लोग बोल रहे हैं, उस खड़ी बोली के विकास में हरिऔध जी का ऐतिहासिक योगदान रहा है। एक महाकाव्य के रूप में सबसे पहले हरिऔध के “प्रिय प्रवास” ने ही खड़ी बोली की दुंदभी बजाई थी।

1.https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%96%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%80
2.https://hindi.yourstory.com/read/bb52d9dcfe/first-world-poet-39-



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