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जब पृथ्वी पर वर्षों तक हुई वर्षा

मेरठ

 05-06-2018 01:48 PM
समुद्र

महासागरों हमारे जीवन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। पूरे विश्व के 71 प्रतिशत भाग पर आज महासागरों का बोलबाला है, बाकि के बचे 29 प्रतिशत स्थान पर मानव निवास करता है। समुद्र या महासागरों का विकास एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना थी जिसके अंतर्गत पृथ्वी पर जीवन संभव हो सका। शुरूआती काल में पृथ्वी एक आग का गोला थी तथा यह भी अन्य ग्रहों की तरह जीवन के लिए उत्तम नहीं थी परन्तु यहाँ पर अन्य ग्रहों की अपेक्षा गैसों में प्रक्रिया होने की संभावना अधिक थी और यही कारण है कि यहाँ पर विभिन्न गैसों के मध्य गैसीय प्रतिक्रियाएं हुईं। इन गैसीय प्रतिक्रियाओं की वजह से यहाँ पर अत्यंत तीव्र वर्षा होना शुरू हुई। सालों तक हुई यह वर्षा इतनी तीव्र थी कि आग सी तपती पृथ्वी ठंडी हो गयी। इन्हीं हिस्सों और अम्लों के कारण ही समुद्र का जल खारा हुआ। इन महासागरों के निर्माण की प्रक्रिया का ही फल था कि पृथ्वी जीव जगत और वनस्पति जगत से गुलजार हुयी।

एक बार हुयी वर्षा के बाद जब पृथ्वी ठंडी हो गयी थी तब से यहाँ पर एक अन्य प्रक्रिया की शुरुआत हुयी जो आज तक कायम है और यह प्रक्रिया है वाष्पीकरण की। वाष्पीकरण का ही प्रतिफल है कि पृथ्वी पर वर्षा होती है। यह होने वाली वर्षा मीठे पानी की होती है जो कि मानव सहित जीव जगत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जल को पीने के आलावा अन्य कई बिन्दुओं पर प्रयोग किया जाता है। कृषि के लिए जल का प्रयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है और जहाँ पर जल की कमी हो जाती है वहां पर जमीन बंजर हो जाती है और ऐसे स्थानों पर कृषि करना लगभग असंभव सा हो जाता है। यही कारण है कि विभिन्न सरकारें नहरों का निर्माण कराती हैं ताकि जहाँ पर जल की कमी हो वहाँ तक जल को पहुँचाया जा सके।

मेरठ एक महत्वपूर्ण जिला है जहाँ पर उद्योग और कृषि दोनों ही बड़े पैमाने पर किये जाते हैं। कृषि और उद्योगों में जल का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। यहाँ पर जल विभिन्न नहरों आदि के माध्यम से और भूमिगत जल की उपलब्धता के आधार पर लाया जाता है। यदि मेरठ में प्रति वर्ष होने वाली वर्षा का आंकड़ा देखें तो पता चलता है कि यहाँ पर प्रतिवर्ष लगभग 933 मिली मीटर वर्षा होती है। यहाँ पर वर्षा बंगाल की खाड़ी और दक्षिण भारत की तरफ से उठने वाले बादलों द्वारा लायी जाती है। इस प्रकार हम देख सकते हैं कि मेरठ में समुद्र का एक अहम किरदार है।

1. https://en.wikipedia.org/wiki/Sea
2. https://www.monroecti.org/cms/lib07/PA03000492/Centricity/Domain/37/Origin_Oceans.pdf
3. https://en.climate-data.org/location/4948/
4. इंडिका, प्रणय लाल



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