जैविक (Organic) गुड़ की बढ़ती मांग और मेरठ

मेरठ

 25-04-2018 12:07 PM
पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

प्रकृति विश्व की सबसे खूबसूरत और महत्वपूर्ण घटकों में से एक है। प्राकृतिक सौन्दर्य आँख को तो उत्तम लगता ही है पर साथ ही साथ यह जीवनदायनी ऑक्सीजन भी उत्सर्जित करता है जो कि मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। मेरठ हिमालय के तराई और गंगा यमुना के दोआब पर बसा हुआ है जिस कारण यहाँ पर विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ पायी जाती हैं।

मेरठ में गन्ने का व्यापार अपनी चरम पर है। यहाँ का देसी गुड़ भारत ही नहीं अपितु विदेशों में भी बड़ी मांग में है। गुड़ की अधिक मांग यहाँ पर गन्ने के व्यापार को पंख लगाने का कार्य कर रही है। मेरठ के समीप बसे बिजनौर में जैविक (Organic) गुड़ का उत्पादन किया जा रहा है जिसे विश्व भर के अनेक देशों में भेजा जाता है। यह गुड़ वर्तमान काल में एक बड़ी मांग के रूप में उभरा है। इसका निर्माण गन्ने के रोपाई के दौरान ही किया जाता है। सर्वप्रथम गन्ने को निश्चित अंतराल पर काटा जाता है, यह सुनिश्चित करके कि गन्ने की आंख न कटे जिसमें से नए पौधे निकलेंगे। अब इसके बाद इसे 50 सेंटीग्रेड के तापमान पर पानी में गर्म किया जाता है और फिर इनको रोपा जाता है। इससे भविष्य में गन्ने में किसी प्रकार का रोग नहीं लगता। गन्ने में जैविक खाद का भी प्रयोग किया जाता है और केमिकल का प्रयोग बिलकुल नहीं जिस कारण इस गन्ने से बने गुड़ अन्य गुडों से अत्यंत अलग और स्वास्थवर्धक होते हैं। मेरठ में भी कुछ स्थानों पर इस प्रकार के गुड़ को बनाया जाता है। इतना सब कुछ होने के बावजूद मेरठ के लोगों में प्रकृति के प्रति उदासीनता यहाँ पर बड़े संकट का कारक बन रही है। बड़ी संख्या में फ़ैल रही शहरी सीमा यहाँ पर वृक्षों की कटाई को बढ़ावा दे रही है जिस कारण यहाँ पर्यावरणीय असंतुलता का प्रसार हो रहा है।

मेरठ में हाल ही में एक महायज्ञ का शुभारम्भ किया गया था जिसमें बड़ी संख्या में लकड़ी का प्रयोग किया गया था। 9 दिन चलने वाले इस यज्ञ में कई वृक्षों को काट कर जलाया गया था। जो सवाल अब हमें खुद से पूछना चाहिए वह यह है कि क्या धर्म के नाम पर वातावरण का शोषण करना उचित है? वातावरण को शुद्ध रखने के लिए वृक्षों का होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। जैसा कि यह देखा जा सकता है कि गुड़ के उत्पादन से बड़ी संख्या में रोजगार की उपलब्धता हुयी है और यदि मेरठ में पेड़ों की संख्या बढ़ी तो मौसम कृषि के और अनुकूल होगा और साथ ही साथ साफ़ हवा की भी व्यवस्था यहाँ पर होगी।

1.https://timesofindia.indiatimes.com/city/meerut/organic-jaggery-from-this-up-farm-is-a-hit-abroad/articleshow/63447164.cms
2.http://www.timesnownews.com/india/article/meerut-mahayagya-uttar-pradesh-anti-air-pollution-havan-500-quintals-of-mango-wood-burning-shri-ayutchandi-mahayagna-samiti-uttar-pradesh-pollution/209310



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