सहारनपुर का वानस्पतिक उद्यान

मेरठ

 15-04-2018 11:24 AM
पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

वानस्पतिक इतिहास किसी भी शहर या देश के लिए किसी महत्वपूर्ण बिंदु से कम नहीं है। भारत वनस्पतियों के दृष्टिकोण से विश्व के शिखर देशों में से एक है। यहाँ पर कई भौगोलिक विविधितायें हैं जिस कारण यहाँ पर वनस्पतियों में असंख्य विविधितायें देखने को मिलती हैं। भारतीय वनस्पतियों पर सर्वप्रथम यूरोपियों के आने के बाद ही काम हुआ जिसे होर्टस मालाबरिकस (Hortus Malabaricus) पुस्तक में संजो कर रखा गया है। मेरठ को अपना गढ़ बनाने के दौरान अंग्रेजों ने यहाँ से नजदीक ही एक वानस्पतिक उद्यान की स्थापना की। जैसा कि सहारनपुर हिमालय के नजदीक है तो यहाँ पर कई प्रकार के पौधों व जड़ीबूटियों की उपलब्धता थी जो कि इस स्थान को एक प्रमुख वानस्पतिक उद्यान होने का दर्जा प्रदान करने के लिए काफी थी।

सहारनपुर वनस्पति उद्यान (वर्तमान में बागवानी प्रयोग के रूप में और प्रशिक्षण केंद्र जाना जाता है) एक बहुत सुंदर उद्यान है। ब्रिटिश काल के दौरान यह 1779 में शुरू हुआ था जब मुस्लिम राजा ज़बाइता खान ने सात गांवों के राजस्व का खर्च सहारनपुर में बगीचे के रख-रखाव पर करने का फैसला किया। ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1817 में इस उद्यान का अधिग्रहण किया और जॉर्ज गोवन पहली बार सहारनपुर वनस्पति उद्यान के अधीक्षक बने। कालांतर में जॉन फ़ोर्ब्स रॉयल 1823 ने उनका स्थान लिया था। कलकत्ता और सहारनपुर बागानों के लिए डी हूकर और जॉन फर्मिंजर ड्यूटी आदि ने यहाँ उत्कृष्ट किया। भारत का वनस्पति सर्वेक्षण विभाग, 13 फरवरी 1890 को हावड़ा में देश की वनस्पति की क्षमता का आकलन करने के लिए स्थापित किया गया। टैक्सोनॉमिकल अनुसंधान के लिए प्रमुख केंद्रों में से एक ऐतिहासिक दृष्टि से सहारनपुर वनस्पति उद्यान दूसरे नंबर पर देखा जाता है।

राष्ट्रीय महत्व के मामले में भारतीय वनस्पति उद्यान, कलकत्ता और विशाल पौधे संग्रह, फ्लोरिस्टिक अध्ययन, टैक्सोनॉमिक अनुसंधान विभिन्न पौधों की शुरूआत और अनुकूलन सहित आर्थिक महत्व के लिए वर्तमान में यह उद्यान महत्वपूर्ण बागवानी है। यहाँ पर औषधीय पौधों के परिचय और अनुकूलन सहित कई उल्लेखनीय शोध किए गए हैं। उद्यान को अब बागवानी प्रयोग और प्रशिक्षण केंद्र के रूप में जाना जाता है। इस उद्यान का और लन्दन के क्वींस उद्यान का एक गहरा ताल्लुक है, यहाँ से कई प्रकार के शोधों आदि को और गहन अध्ययन के लिए लन्दन भेजा जाता था।

1. https://www.tandfonline.com/doi/abs/10.1080/03068376208731764?journalCode=raaf19
2. http://www.isca.in/IJBS/Archive/v4/i6/3.ISCA-IRJBS-2015-052.pdf



RECENT POST

  • ओलावृष्टि क्‍यों बन रही है विश्‍व के लिए एक चिंता का विषय?
    जलवायु व ऋतु

     21-02-2019 11:55 AM


  • हिन्दी भाषा के विवध रूपों कि व्याख्या
    ध्वनि 2- भाषायें

     20-02-2019 11:05 AM


  • उच्च रक्तचाप के लिये लाभकारी है योग
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     19-02-2019 10:59 AM


  • रॉबर्ट टाइटलर द्वारा खींची गई अबू के मकबरे की एक अद्‌भुत तस्वीर
    द्रिश्य 1 लेंस/तस्वीर उतारना

     18-02-2019 11:11 AM


  • बदबूदार कीड़े कैसे उत्पन्न करते है बदबूदार रसायन
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     17-02-2019 10:00 AM


  • सफल व्यक्ति की पहचान
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     16-02-2019 11:55 AM


  • क्या होते हैं वीगन (Vegan) समाज के आहार?
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     15-02-2019 10:24 AM


  • क्‍या है प्रेम के पीछे रसायनिक कारण ?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     14-02-2019 12:47 PM


  • स्‍वच्‍छ शहर बनने के लिए इंदौर से सीख सकता है मेरठ
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     13-02-2019 02:26 PM


  • मेरठ के युवाओं का राष्ट्रीय निशानेबाजी में बढता रुझान
    हथियार व खिलौने

     12-02-2019 03:49 PM