सिक्कों का महत्व - मेरठ

मेरठ

 02-06-2017 12:00 PM
मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक
सिक्के इतिहास कि पुष्टि करने हेतु एवं कुछ सिद्धांतो को सही सिद्ध करने के प्रमुख कारक होते हैं। प्राचीन काल के राजाओं के साम्राज्य, उनकी अर्थ व्यवस्था व सामाजिक स्थिति को जानने के लिये सिक्कों को एक प्रमुख स्त्रोत माना जाता है और इसी कारण मुद्राशास्त्र इतिहास के पुष्टीकरण मे व समझने में काफी योगदान देता है| प्राचीन काल से ही मानव सिक्कों का प्रयोग करते आ रहा है और वह महाजनपद काल से जोड़े जा सकते हैं। बनाने की तरीके की बिनः पर इन सिक्कों के दो प्रमुख प्रकार होते हैं एक छपाई और दूसरे ढलाई वाले| इनमे छापा तरह के सिक्के, अंग्रेजी मे जिन्हें पंच-मार्क कहा जाता है; अति प्राचीन माने जातें हैं| महाजनपद समय में यह काफी मात्रा में पाए जाते थे। कुषाणों के आगमन के साथ सिक्कों में कई प्रकार की विशेषतायें व इन्हें बनाने की प्रद्योगिकी में विकास आया। गुप्त साम्राज्य मे भारतीय सिक्कों मे एक अभूतपूर्व विकास देखने को मिला। मध्यकाल मे मेरठ में मुग़ल सम्राट अकबर ने एक टकसाल की स्थापना की जहाँ से विभिन्न प्रकार के सिक्कों की ढलाई हुआ करती थी| अकबर के टकसाल खोलने के संदर्भ से मेरठ की महत्ता व यहाँ के प्रद्योगिकी पर प्रकाश पड़ता है। 1. क्वाइन्स: पी. एल. गुप्ता

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