धार्मिक कट्टरता हो सकती है जानलेवा

मेरठ

 14-07-2018 10:47 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

धार्मिक कट्टरता सदैव ही नुकसान प्रदान करने वाली होती है। इससे जुड़ी कई समस्याएं हमको वर्तमान युग में दिखाई दे जाती हैं। हाल ही में दिल्ली के बुराड़ी से 11 लोगों की आत्म हत्या ने यह सिद्ध कर दिया कि धार्मिक कट्टरता और अंध विश्वास जान के लिए खतरा है। यह एक ऐसा जरिया है जहाँ पर मानव अपनी खुद की तथा अपने प्रियजनों की तक जान ले सकता है। मानव अपने अमूल्य जीवन को और इसकी महत्ता को न समझ कर ऐसी दशा में आ जाता है जहाँ पर वह ऐसे कदम उठाने लगता है जो उसके और समाज के लिए नुकसानदायक साबित होते हैं। आज भी हम मेरठ और यहाँ के अंचलों में देखते हैं कि यहाँ पर लोग सोखा और ओझा आदि के पास किसी न किसी भूत आदि के चक्कर में जाते हैं। ऐसे में ये एक बड़ी रकम से तो हाथ धो ही बैठते हैं और साथ ही साथ कुछ ऐसा कुकृत्य कर देते हैं जो कि समाज में जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है। हाल ही में कई ऐसी कहानियाँ सामने आयीं थीं जहाँ पुत्र की चाह में तांत्रिकों के कहने पर लोग अन्य किसी के बच्चे की बली तक चढ़ा देते हैं। यह वाकया अपने में ही सिहरन पैदा करने वाला है और यह प्रदर्शित करता है कि यह कट्टरता और तांत्रिकों आदि में विश्वास हमारे जीवन के लिए किसी कुष्ठ से कम नहीं है।

बुराड़ी जैसे वाकये जिससे पूरा देश आश्चर्य में पड़ गया था, ठीक वैसी ही एक घटना मेरठ में सन 2016 में घटी थी जहाँ पर बड़े पैमाने पर आत्महत्या हुयी थी। इस आत्महत्या में 5 लोगों ने एक साथ आत्महत्या कर पूरे मेरठ को सनसनी में डाल दिया था। यह घटना मेरठ के अत्यंत सजीले इलाके टी.पी. नगर में घटित हुयी थी। यहाँ पर भी एक ही परिवार के 5 लोगों ने फांसी लगायी थी और बुराड़ी की तरह ही एक व्यक्ति अन्य दूसरे कमरे में फांसी लगाया था। वहां से मिले हवन आदि के सामान पंथ प्रथाओं या कुछ धार्मिक कुरीतियों की पुष्टि करते हैं। बुराड़ी की तरह वहां भी एक लेख मिला था जिसमें यह अनुष्ठान करने की प्रेरणा दी गयी थी।

बुराड़ी के वाकये ने पूरे देश को अचम्भे में डाल दिया था और अब यह महत्वपूर्ण हो गया है कि इसपर चर्चा की जाए। उदाहरण के लिए हम डेरा सच्चा सौदा का उदाहरण लेते हैं जो कि शुरुआत में एक ऐसे स्थान के रूप में उभर रहा था जहाँ व्यक्ति अपने धर्म आदि में बनी कुरीतियों आदि पर चर्चा कर सकता था। सामान्य रूप से सभी डेरों का यही दृष्टिकोण होता है। डेरा का अर्थ भी घर से लिया जाता है। कालान्तर में डेरा सच्चा सौदा एक पंथ के रूप में उभर कर सामने आया जिसमें एक व्यक्ति खुदको भगवान का दूत बताने लगा और कई समस्या से जूझ रहे लोग ऐसी कथनी पर भरोसा करने लगे। अब आइये कोशिश करते हैं कि ऐसे पंथ में भरोसा कर रहे लोगों को पहचाना कैसे जाए:

1. ऐसे लोग महत्वपूर्ण और गहन चिंतन का विरोध करते हैं।
2. ऐसे लोग विभिन्न सिद्धांतों आदि पर जोर देते हैं जो कि सामान्य अनुष्ठानों से भिन्न हों।
3. अन्य कई धार्मिक विचारों को अपने में आत्मसात करना जो कि सामान्य ना हो।
4. अपने गुरु के प्रति असाधारण आस्था।

संदर्भ:
1.https://timesofindia.indiatimes.com/city/meerut/burari-house-of-horror-a-grim-reminder-of-2016-meerut-mass-suicide/articleshow/64909918.cms
2.https://thewire.in/culture/growth-of-deras-and-their-following-over-the-years
3.https://www.theatlantic.com/national/archive/2014/06/the-seven-signs-youre-in-a-cult/361400/



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