आखिर क्यूँ बनाते हैं मंदिर परिसरों में ईंट के घर

मेरठ

 16-03-2018 11:35 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

भारत एक अत्यंत धार्मिक देश जाना जाता है। यहाँ पर प्राचीन काल से ही कई धर्मों का उदय व विकास हुआ जिसका प्रमाण आज भी यहाँ पर बने मंदिर, मस्जिद, गुहा, विहार आदि देते हैं। यहाँ पर पत्थर को भी देव का दर्जा दिया जाता है। इसके अलावा यहाँ पर देवताओं के प्रति असीम श्रद्धा व भाव भी दिखाई देता है, वृक्षों पर धागा बांधने से लेकर मंदिर परिसर में छोटे घर तक का बनाना इस बात का सबूत है। ऐसी ही एक परंपरा पूरे उत्तर भारत में व्याप्त है तथा मेरठ में भी पाई जाती है। यह है यहाँ के प्रसिद्ध मंदिरों के परिसर में ईंट के छोटे घर बनाने की परम्परा। ऐसी मान्यता है कि यहाँ के मंदिरों में यदि कोई ईंटों को घर की तरह सजाकर मन्नत मांगे तो उसकी मुराद पूरी होती है। कहते हैं कि इससे जीवन में सपनों का घर मिलता है।

गढ़मुक्तेश्वर में भी नदियों के किनारे कई छोटे ईंट के मंदिर देखे जा सकते हैं जिनको ऐसी ही मन्नत के लिए बनाया जाता है, उत्तर भारत में कई अन्य स्थानों पर भी ऐसे मन्नत वाले छोटे घरों को विभिन्न मंदिरों के परिसर में देखा जा सकता है। एक अन्य परंपरा के अनुसार यदि कोई व्यक्ति घर की इक्षा रखता हो और वह एक मंदिर में मन्नत मांगता है और उसके घर का सपना पूर्ण हो जाता है तो वह मंदिर के परिसर में ऐसे घरों का निर्माण करवाता है।

1. https://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/gurgaon/here-is-a-vow-to-build-a-house-of-bricks/articleshow/48135162.cms



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