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हर मेरठवासी को पता होनी चाहिए साँप से जुड़ी ये बातें

मेरठ

 23-05-2018 01:52 PM
रेंगने वाले जीव

'साँप' यह शब्द सुनते ही लोग काँप उठते हैं। साँप एक रेंगने वाला ज़हरीला जीव है और सरीसृप वर्ग का प्राणी है। यह जल तथा थल दोनों जगहों पर पाया जाता है। विश्व भर में साँप की कुल 2,000 से 3,000 प्रजातियाँ हैं। अलग-अलग देशों में साँप की अलग-अलग प्रजातियाँ पाई जाती हैं। भारत वनस्पतियों और जीवों से समृद्ध है, भारत में कुल 90,000 प्रकार के जीव व वनस्पतियाँ पायी जाती हैं। इनमें 350 स्तनधारी हैं, 1,200 पक्षी और 50,000 पौधे हैं। भारत में साँप की कुल 270 प्रजातियाँ हैं और इनमें से 60 ज़हरीली हैं। यह बहुत ज़रूरी है कि आम आदमी ज़हरीले और बिना ज़हर वाले साँप के बीच भेद कर सके। बिना ज़हर वाले साँप - इनका थूथना गोल होता है और इनका सर त्रिकोण होता है मगर चौड़ा नहीं होता है तथा इनकी आँखों की पुतलियाँ गोल होती हैं। ज़हर वाले साँप - इनका थूथना कटीला होता है एवं इनके नाक के निचे गर्मी को महसूस करने वाला गड्ढा होता है। इनका छत्र अंडाकार होता है, इनका सिर काफ़ी चौड़ा होता है, गर्दन काफ़ी पतली होती है और आँखों की पुतलियाँ अंडाकार होती हैं।

भारत के 4 सबसे ज़्यादा ज़हरीले साँप -
1- इंडियन कोबरा, (Naja Naja)
2- करैत, (Bungarus Caeruleus)
3- रसल वाईपर, (Daboia Russelii)
4- सॉ-स्केल्ड वाईपर, (Echis Carinatus)

ज़्यादा ठोस रंग वाले साँप ज़हरीले नहीं होते हैं। ज़हरीले साँप का सिर त्रिकोणीय आकार का होता है और बिना ज़हर वाले साँप का जबड़ा गोल होता है। ज़हरीले साँप पानी में अपने शरीर को दिखा कर तैरते हैं और बिना ज़हर वाले साँप पानी के निचे तैरते हैं, इससे हम उनके बीच आराम से भेद कर सकते हैं।

साँप द्वारा सम्पूर्ण भारत में कुल 45,000 लोग प्रत्येक वर्ष अपनी जान गँवा बैठते हैं। बारिश के मौसम में साँप सबसे ज़्यादा पाए जाते हैं, कारण कि साँप के बिलों में पानी घुस जाता है जिससे उन्हें रहने में परेशानी का सामना करना पड़ता है और बारिश के मौसम में मेंढक बड़े पैमाने पर जमीन के सतह पर आते हैं। साँपों के बाहर आने से देहाती इलाकों में बहुत परेशानी होती है।

मेरठ और बिजनौर ज़िले में साँप द्वारा काटे जाने के बहुत से मामले सामने आए। बारिश के मौसम में आंकड़े बहुत बढ़ जाते हैं। वन अधिकारियों ने इस समस्या का हल निकालने के लिए साँप को पकड़ने की शिक्षा देने के लिए एक कैंप का भी गठन किया है। इनका मुख्य कार्य है साँपों को मारे जाने से बचाना और लोगों को साँपों के विष से भी बचाना। यहाँ कुल 321 गाँव गंगा नदी के किनारे बसे हैं और बारिश के मौसम में साँप इन गावों में घुस जाते हैं। साँप आम तौर पर झाड़ियों और पत्थर के नीचे रहते हैं, बारिश के कारण वे अपने घरों से बाहर निकल जाते हैं। हाल ही में, मेरठ के एक घर से कुल 150 साँप पकड़े गए। साँप ने उस घर में अंडे दिए थे और इस वजह से वहाँ साँपों की संख्या काफ़ी अधिक थी। भारत के अनेकों साँपों में से केवल कुछ एक ही साँप जहरीले हैं। यदि यहाँ पर नाम की बात की जाए तो सभी कोबरा को छोड़कर अन्य साँपों को करैत से ही जोड़ कर देखा जाता है। भारत के साँपों की प्रजातियों को हिंदी में कोई नाम नहीं दिया गया है क्योंकि भारतीयों द्वारा कभी उन्हें वर्गीकृत करने की कोशिश ही नहीं की गयी। सन 1790 से 1880 के दौरान कुछ अंग्रजों द्वारा भारतीय साँपों की सारणी पर कार्य किया गया था।

1.https://bit.ly/2CN1qWQ
2.https://timesofindia.indiatimes.com/city/meerut/over-150-snakes-come-out-of-a-meerut-house/articleshow/64141329.cms
3.https://timesofindia.indiatimes.com/city/meerut/in-a-first-forest-staff-to-be-trained-to-catch-snakes/articleshow/59240992.cms
4.https://www.indiansnakes.org/
5. https:/en.wikipeda.org/wiki/Big_Four_(Indian_snakes)



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